भोजशाला हाईकोर्ट फैसले पर वारिस पठान का विरोध: 'वक्फ कानून और प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को नजरअंदाज किया गया'

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भोजशाला हाईकोर्ट फैसले पर वारिस पठान का विरोध: 'वक्फ कानून और प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को नजरअंदाज किया गया'

सारांश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के भोजशाला फैसले पर मुस्लिम पक्ष एकजुट हुआ — AIMIM नेता वारिस पठान ने वक्फ कानून और प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की अनदेखी का आरोप लगाया, जबकि कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी और काजी सैयद निसार अली ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की घोषणा की।

मुख्य बातें

AIMIM नेता वारिस पठान ने 15 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के भोजशाला फैसले को 'गलत और निराशाजनक' करार दिया।
पठान के अनुसार फैसले में वक्फ कानून और प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट दोनों को दरकिनार किया गया।
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के अब्दुल समद ने कहा — मुस्लिम समुदाय हर शुक्रवार भोजशाला में नमाज जारी रखेगा।
मुस्लिम पक्ष के सभी प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की घोषणा की।
काजी सैयद निसार अली ने कहा — हाईकोर्ट का यह फैसला 'अंतिम नहीं', न्यायपालिका पर भरोसा बरकरार।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के भोजशाला संबंधी फैसले पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने 15 मई को कड़ी आपत्ति जताई। पठान ने इस निर्णय को 'गलत और निराशाजनक' करार देते हुए कहा कि फैसले में वक्फ कानून और प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट दोनों को दरकिनार कर दिया गया। मुस्लिम पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की तैयारी की घोषणा की है।

मुख्य आपत्तियाँ: कानूनी आधार पर सवाल

वारिस पठान ने कहा कि फैसले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को बिना समुचित विचार किए ही नजरअंदाज कर दिया गया। उनके अनुसार, वक्फ कानून को फैसले में स्थान नहीं दिया गया और प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की अनदेखी की गई — जो उपासना स्थलों की धार्मिक पहचान को 1947 की स्थिति में बनाए रखने का प्रावधान करता है।

पठान ने राम मंदिर मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ भी आस्था को कानूनी आधार से ऊपर रखकर फैसला दिया गया था, और अब भोजशाला मामले में भी वही प्रवृत्ति दिख रही है। उन्होंने कहा, 'हमें सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है।'

कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी का रुख

कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के अब्दुल समद ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय हर शुक्रवार भोजशाला में नमाज अदा करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि जो तर्क हाईकोर्ट में नहीं सुने गए, वे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे जाएंगे।

समद ने यह भी कहा कि जब से मस्जिद का निर्माण हुआ है, तब से वहाँ नमाज पढ़ी जा रही है और यह संवैधानिक अधिकार के अंतर्गत है। उन्होंने 2003 के प्रशासनिक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उस आदेश में मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदू समाज को केवल 'विजिटर' के रूप में प्रवेश की अनुमति थी, पूजा-पाठ की नहीं — फिर भी वहाँ कथित तौर पर अवैध रूप से धार्मिक गतिविधियाँ होती रहीं।

काजी सैयद निसार अली की प्रतिक्रिया

काजी सैयद निसार अली ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला एक पक्ष के पक्ष में गया है, परंतु यह अंतिम फैसला नहीं है। उन्होंने भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट न्याय सुनिश्चित करेगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।

भोजशाला विवाद: पृष्ठभूमि

भोजशाला, जो धार, मध्य प्रदेश में स्थित है, हिंदू पक्ष के लिए माँ वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद मानता है। यह विवाद दशकों पुराना है। गौरतलब है कि यह मामला उन कई धार्मिक-ऐतिहासिक स्थलों के विवादों में से एक है जो भारतीय अदालतों में लंबित हैं।

आगे की राह: सुप्रीम कोर्ट

मुस्लिम पक्ष के सभी प्रमुख प्रतिनिधियों ने एकमत से सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की घोषणा की है। यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में जाएगा, जहाँ वक्फ कानून, प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े तर्क नए सिरे से प्रस्तुत किए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कानूनी दृष्टि से दोनों मामलों की परिस्थितियाँ भिन्न हैं — इस अंतर को अक्सर मुख्यधारा की बहस में नजरअंदाज किया जाता है। असली परीक्षा सुप्रीम कोर्ट में होगी, जहाँ वक्फ कानून की संवैधानिक स्थिति और उपासना स्थलों की कानूनी सुरक्षा पर एक निर्णायक व्याख्या की दरकार है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला विवाद क्या है और हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
भोजशाला धार, मध्य प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है जिसे हिंदू पक्ष माँ वाग्देवी का मंदिर और मुस्लिम पक्ष कमाल मौलाना मस्जिद मानता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में इस स्थल को लेकर एक फैसला सुनाया, जिसे मुस्लिम पक्ष ने अपने विरुद्ध बताया है।
वारिस पठान ने भोजशाला फैसले पर क्या आपत्ति जताई?
AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा कि फैसले में वक्फ कानून और प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट दोनों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने इसे 'गलत और निराशाजनक' बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद जताई।
क्या मुस्लिम पक्ष भोजशाला में नमाज जारी रखेगा?
हाँ, कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के अब्दुल समद ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय हर शुक्रवार भोजशाला में नमाज अदा करता रहेगा। उनके अनुसार यह संवैधानिक अधिकार के तहत है।
2003 का प्रशासनिक आदेश क्या था जिसका उल्लेख किया गया?
2003 के आदेश के अनुसार मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदू समाज भोजशाला में केवल 'विजिटर' के रूप में जा सकता था, पूजा-पाठ की अनुमति नहीं थी। अब्दुल समद के अनुसार, इस आदेश का पालन नहीं करवाया गया और वहाँ कथित तौर पर अवैध धार्मिक गतिविधियाँ होती रहीं।
भोजशाला मामला अब आगे कहाँ जाएगा?
मुस्लिम पक्ष के सभी प्रमुख प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की घोषणा की है। काजी सैयद निसार अली ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला अंतिम नहीं है और भारतीय न्यायपालिका पर उनका भरोसा बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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