वंदे मातरम संशोधन विधेयक पर सपा का रुख: आशुतोष वर्मा बोले, संविधान सभा के प्रावधानों पर हो गहन विचार-विमर्श
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने 17 जुलाई 2026 को लखनऊ में राष्ट्रीय सम्मान (राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम) संशोधन विधेयक — जो 'वंदे मातरम' के अपमान पर दंड का प्रावधान करता है — को लेकर केंद्र सरकार की कथित योजना पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले विधेयक का पूरा मसौदा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
वर्मा ने कहा कि इस विषय पर संविधान सभा के उन नियमों, प्रावधानों और संवैधानिक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा ज़रूरी है, जो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को आधिकारिक रूप से स्वीकार किए जाने के समय तय की गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श के बाद ही समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर अपना विस्तृत रुख सामने रखेगी।
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह की प्रतिक्रिया
सपा के एक अन्य प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने इस प्रस्तावित विधेयक पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'सरकार ऐसी चीज़ें करती रहेगी। राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान का सम्मान बनाए रखने के लिए पहले से ही कानून मौजूद हैं। लेकिन सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब नहीं देना चाहती। इसीलिए वह पुरानी बातों को ही नए रूप में पेश करती रहती है।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष केंद्र सरकार पर रोज़गार और महँगाई जैसे मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाता रहा है।
संजय निषाद के बयान पर सपा का जवाब
वर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उनके लिए 'दरवाज़ा बंद' करती है तो उन्हें दूसरा रास्ता खोजना होगा। सपा प्रवक्ता ने इस पर विशेष टिप्पणी से परहेज़ करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दल स्वतंत्र हैं और अपनी रणनीति के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
सपा में शामिल होने की शर्त
हालाँकि, वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संजय निषाद समाजवादी पार्टी के साथ आने का फैसला करते हैं, तो उन्हें पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को मज़बूती और मुखरता के साथ उठाने की ज़िम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारधारा सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों पर आधारित है, इसलिए पार्टी में आने वाले किसी भी नेता से यही अपेक्षा रहेगी।
आगे क्या
गौरतलब है कि प्रस्तावित विधेयक का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। सपा ने संकेत दिया है कि मसौदा सामने आने और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा के बाद ही वह अपना अंतिम रुख घोषित करेगी।