महाराष्ट्र मंत्रालय में अनौपचारिक नियुक्तियाँ रद्द, 10 सितंबर तक मूल विभाग लौटने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 25 अगस्त 2026 को एक कड़ा सरकारी आदेश जारी करते हुए राज्य सचिवालय (मंत्रालय) के सभी विभागों और मंत्रियों के कार्यालयों में मौखिक, अनौपचारिक एवं अनियमित आधार पर की गई तमाम प्रतिनियुक्तियाँ तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा राज्यपाल के अधिकार से जारी और मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित इस आदेश का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और अनुशासन को पुनर्स्थापित करना है।
क्या है पूरा मामला
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अनुसार, मंत्रियों के कार्यालयों और सचिवालय विंग में डॉक्टरों, इंजीनियरों, स्टेनोग्राफरों और शिक्षकों सहित बड़ी संख्या में कर्मचारियों को केवल मौखिक निर्देशों, अनौपचारिक व्यवस्था या बाहरी अनुबंध के आधार पर तैनात किया गया था। ये नियुक्तियाँ मूल विभागों, अतिरिक्त मुख्य सचिव (GAD/सेवाएँ), मुख्य सचिव या मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बिना की गई थीं।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि इन नियुक्तियों में ईमानदारी प्रमाण पत्र, चरित्र सत्यापन, गोपनीय प्रदर्शन रिपोर्ट और विभागीय जाँच जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। इससे सचिवालय स्तर पर परिचालन सुरक्षा और प्रशासनिक मानकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
अनौपचारिक नियुक्तियों से क्या नुकसान हुआ
अनियमित स्थानांतरणों के कारण दोहरी रिक्तियाँ उत्पन्न हुईं — एक ओर मूल विभागों में पद खाली रहे, दूसरी ओर सचिवालय में ऐसे कर्मचारी तैनात हो गए जिनके पास उचित प्रशासनिक प्रशिक्षण नहीं था। इससे कार्य में देरी हुई और पहले किए गए प्रशिक्षण निवेश व्यर्थ गए। पुराने कैडर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अनुबंध बढ़ाने की प्रथा को भी आदेश में अनुचित घोषित किया गया है।
अनुपालन की समयसीमा और दंड का प्रावधान
आदेश के अनुसार, सभी अनियमित कर्मचारियों को 10 सितंबर 2026 तक अपने मूल कैडर में वापस लौटना होगा। ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर्स (DDO) को निर्देश दिया गया है कि जो कर्मचारी 15 सितंबर 2026 तक कार्यभार नहीं संभालते, उनका वेतन रोक दिया जाए। सचिवालय प्रवेश पास, फेशियल-रिकग्निशन एक्सेस और डिजिटल उपस्थिति की सुविधा 20 सितंबर 2026 तक रद्द कर दी जाएगी।
सभी विभागों के सचिवों को मुख्य सचिव कार्यालय में अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी। अनुपालन न करने पर MCSR (अनुशासन और अपील) नियम, 1979 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भविष्य के लिए नई व्यवस्था
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मंत्रियों के कार्यालयों में किसी भी अतिरिक्त कर्मचारी की आवश्यकता के लिए आधिकारिक GAD दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। पदों के सृजन, रूपांतरण या अपग्रेडेशन के प्रस्ताव अब मुख्य सचिव के माध्यम से GAD डेस्क को भेजे जाएंगे और मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी। सरकार ने स्वीकृत रिक्त पदों की समीक्षा और प्रशिक्षण, पदोन्नति तथा कैडर प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक समर्पित प्रशासनिक ढाँचा स्थापित करने की भी घोषणा की है।
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के प्रशासनिक तंत्र पर पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि राज्य के कई विभागों में अनौपचारिक नियुक्तियों की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। इस कदम से सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब नियम-आधारित प्रशासन से कोई समझौता नहीं होगा।