सीपीग्राम्स और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट से पारदर्शी हो रहा शासन: डॉ. जितेंद्र सिंह ने दक्षिण कोरियाई मंत्री को बताई भारत की डिजिटल सफलता
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 20 जून 2026 को नई दिल्ली में कहा कि सीपीग्राम्स (केंद्रीयकृत जन शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली) और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जैसी तकनीक-आधारित पहलें भारत में शासन की संरचना को मौलिक रूप से बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों से पारदर्शिता में वृद्धि हुई है, सेवाओं की डिलीवरी सुदृढ़ हुई है और प्रशासन आम नागरिकों के और निकट आया है।
भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय बैठक
डॉ. सिंह ने ये विचार दक्षिण कोरिया के गृह एवं सुरक्षा मंत्री यून होजुंग के साथ हुई व्यापक द्विपक्षीय बैठक के दौरान साझा किए। यून होजुंग इन दिनों भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों के साथ एक घंटे से अधिक समय तक डिजिटल गवर्नेंस, लोक प्रशासन, क्षमता निर्माण और नागरिक सेवाओं में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
डिजिटल गवर्नेंस में भारत की उपलब्धियाँ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की डिजिटल प्रगति का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि तकनीक-आधारित शासन प्लेटफॉर्मों ने सेवा वितरण और शिकायत निवारण तंत्र को उल्लेखनीय रूप से मज़बूत किया है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि सीपीग्राम्स और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट ने प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम किया है और शासन को सामान्य नागरिकों तक सुलभ बनाया है। गौरतलब है कि ये पहलें भारत के व्यापक 'डिजिटल इंडिया' कार्यक्रम की धुरी हैं।
भारत-कोरिया रणनीतिक साझेदारी
डॉ. सिंह ने दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और सुशासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। उन्होंने इस वर्ष दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान जारी संयुक्त रणनीतिक दृष्टि वक्तव्य का उल्लेख करते हुए इसे द्विपक्षीय सहयोग का महत्वपूर्ण रोडमैप बताया। उन्होंने ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और लोक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने का आह्वान किया।
ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव
डॉ. सिंह ने दोनों देशों के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का भी स्मरण कराया। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना और प्राचीन गया संघ के राजा सुरो के वैवाहिक संबंध का उल्लेख किया, जो आज भी भारत और दक्षिण कोरिया दोनों के लिए सांस्कृतिक महत्व रखता है। उन्होंने यून होजुंग की कोरिया-भारत संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष के रूप में भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनकी यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और दक्षिण कोरिया दोनों अपनी-अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं को विस्तार देने में जुटे हैं। आलोचकों का कहना है कि द्विपक्षीय घोषणाओं को ठोस कार्यान्वयन ढाँचे से जोड़ा जाना आवश्यक है, ताकि सहयोग के संकल्प वास्तविक नीतिगत परिणामों में बदल सकें। दोनों देशों के बीच ई-गवर्नेंस और एआई के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाएँ आने वाले वर्षों में और स्पष्ट होंगी।