ई-जागृति प्लेटफॉर्म से 2.29 लाख उपभोक्ता शिकायतें दर्ज, 90.75% निपटान दर: PM मोदी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई 2026 को कहा कि ई-जागृति प्लेटफॉर्म उपभोक्ता शिकायतों की दर्ज होने से लेकर निपटारे तक की पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस और ऑनलाइन बनाकर उपभोक्ता न्याय व्यवस्था की कई बड़ी चुनौतियों का समाधान कर रहा है। मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी का एक लेख साझा करते हुए यह बात कही।
ई-जागृति क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी
मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अपने लेख में बताया कि आज करोड़ों उपभोक्ता ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान प्रणालियों और ऑनलाइन मार्केटप्लेस के ज़रिये लेनदेन कर रहे हैं। पुरानी उपभोक्ता न्याय व्यवस्था — जिसमें कागजी फाइलिंग, मैनुअल जाँच, अलग-अलग सॉफ्टवेयर और व्यक्तिगत सुनवाई शामिल थी — तेज़ी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं रह गई थी।
जोशी ने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल युग में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा केवल कानूनी बदलावों से नहीं, बल्कि न्याय वितरण की पूरी व्यवस्था को तकनीक-आधारित बनाने से ही संभव है।
चार पुराने सिस्टम की जगह एक एकीकृत मंच
1 जनवरी 2025 को लॉन्च हुए ई-जागृति ने चार पुराने सिस्टम — ओसीएमएस, ई-दाखिल, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) सीएमएस और कन्फोनेट — को एकीकृत कर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-आधारित, पेपरलेस डिजिटल मंच में बदल दिया है। व्यापक स्तर पर हितधारकों से चर्चा और सुझाव लेने के बाद इस प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाया गया, जिससे उपभोक्ता न्याय व्यवस्था को भी डिजिटल सुधारों के दायरे में लाया गया।
प्रदर्शन के आँकड़े
सरकार के अनुसार, लॉन्च के बाद से ई-जागृति पर 2.29 लाख से अधिक उपभोक्ता मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 2.07 लाख से अधिक का निपटारा हो चुका है — यानी कुल 90.75 प्रतिशत निपटान दर। यह प्लेटफॉर्म देश और विदेश, दोनों जगह रहने वाले उपभोक्ताओं को कहीं से भी ऑनलाइन न्याय पाने की सुविधा देता है।
विशेष रूप से, प्रवासी भारतीय (एनआरआई) अब भारत लौटे बिना भी अपनी उपभोक्ता शिकायतों का समाधान प्राप्त कर सकते हैं — यह एक महत्त्वपूर्ण बदलाव है जो पहले संभव नहीं था।
उपभोक्ता आयोगों का बेहतर प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 में देशभर के उपभोक्ता आयोगों में 1.65 लाख से अधिक नए मामले दर्ज हुए और 1.52 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। निपटान दर बढ़कर 92.3 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 की 89.47 प्रतिशत की दर से बेहतर है।
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च) में 38,944 नए मामले दर्ज हुए और 34,600 मामलों का निपटारा हुआ, जिससे 88.84 प्रतिशत की तिमाही निपटान दर दर्ज की गई — जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि से बेहतर रही।
आगे की राह
ई-जागृति का यह प्रदर्शन भारत की डिजिटल गवर्नेंस यात्रा में एक उल्लेखनीय पड़ाव है। यह देखना अहम होगा कि आने वाले वर्षों में प्लेटफॉर्म ग्रामीण और अर्ध-शहरी उपभोक्ताओं तक अपनी पहुँच किस हद तक बढ़ा पाता है, जहाँ डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।