पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इलाहाबाद जोनल कार्यालय ने 8 जुलाई 2026 (बुधवार) को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई झांसी और लखनऊ में की गई, जिसमें दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए।
जांच की पृष्ठभूमि
ईडी की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें पूर्व विधायक पर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगाए गए हैं। इसी एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच शुरू की। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में 23 से अधिक एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
मनी लॉन्ड्रिंग का नेटवर्क
ईडी की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कथित अपराध से अर्जित धन को रियल एस्टेट, निर्माण (कंस्ट्रक्शन) और अन्य कारोबार से जुड़ी कई कंपनियों तथा सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) के नेटवर्क के ज़रिए इधर-उधर किया गया। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन संस्थाओं का उपयोग अवैध धन को वैध दिखाने के लिए किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हस्तियों से जुड़े धन शोधन मामलों की जांच में तेज़ी आई है।
तलाशी में क्या मिला
तलाशी के दौरान ईडी की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और चल-अचल संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्ज़े में लिए। वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज़ों की भी बारीकी से जांच की जा रही है। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य अपराध से अर्जित धन का पता लगाना और उसे छिपाने में शामिल लोगों की पहचान करना है।
आगे क्या होगा
सूत्रों के मुताबिक, बरामद दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत मामले की आगे की जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और अहम खुलासे हो सकते हैं। गौरतलब है कि यह मामला धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत सूचीबद्ध कई अपराधों से जुड़ा बताया जा रहा है।