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देहरादून DAV PG कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाला: ED ने दो आरोपियों के खिलाफ दाखिल की अभियोजन शिकायत

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देहरादून DAV PG कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाला: ED ने दो आरोपियों के खिलाफ दाखिल की अभियोजन शिकायत

सारांश

देहरादून के DAV (PG) कॉलेज में SC/ST/OBC छात्रों की छात्रवृत्ति में हुई कथित हेराफेरी अब PMLA कोर्ट तक पहुँच गई है। ED ने पीयूष चंद्र भटनागर और रंजना रावत के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है, जिसमें ₹2.27 करोड़ ब्याज, अनाधिकृत बैंक खाता और ₹7.86 लाख की संपत्ति कुर्की जैसे गंभीर खुलासे शामिल हैं।

मुख्य बातें

ED देहरादून ने 29 मई को विशेष PMLA न्यायालय में पीयूष चंद्र भटनागर व रंजना रावत के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की।
मामला DAV (PG) कॉलेज में SC/ST/OBC छात्रों की छात्रवृत्ति राशि की कथित हेराफेरी से जुड़ा है।
2009-2014 के बीच देना बैंक के अनाधिकृत खाते में लगभग ₹2.27 करोड़ का ब्याज जमा हुआ बताया गया।
ED के अनुसार ₹42.50 लाख नकद, ₹66.50 लाख चेक से और ₹99.43 लाख भटनागर के निजी खातों में स्थानांतरित किए गए।
27 मई 2026 के अस्थायी कुर्की आदेश के तहत ₹7.86 लाख की चल संपत्ति कुर्क की गई।

प्रवर्तन निदेशालय (ED), देहरादून ने 29 मई को विशेष न्यायालय (PMLA), देहरादून के समक्ष पीयूष चंद्र भटनागर और रंजना रावत के खिलाफ DAV (PG) कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े मामले में अभियोजन शिकायत (PC) दाखिल की है। यह शिकायत मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत दायर की गई है, जिसमें SC/ST/OBC छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति फंड की कथित हेराफेरी का आरोप है।

मामले की पृष्ठभूमि

ED ने उत्तराखंड पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR के आधार पर जाँच शुरू की थी। FIR और उसके बाद दाखिल चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि SC/ST/OBC श्रेणी के छात्रों के लिए आवंटित छात्रवृत्ति राशि को देना बैंक में खोले गए एक अनाधिकृत खाते के माध्यम से धोखाधड़ी कर इधर-उधर किया गया। जाँच के अनुसार, इस खाते में 2009 से 2014 के बीच अन्य DAV कॉलेज खातों से छात्रवृत्ति फंड स्थानांतरित होता रहा और उस पर लगभग ₹2.27 करोड़ का ब्याज जमा हुआ।

अनाधिकृत खाता और हेराफेरी का तरीका

PMLA के तहत हुई जाँच में सामने आया कि DAV (PG) कॉलेज की प्रबंध समिति ने देना बैंक की लक्ष्मी रोड शाखा में खाता खोलने की मंजूरी दी थी, लेकिन कथित तौर पर शाखा का नाम बदलकर देना बैंक की DMS रोड शाखा में अनाधिकृत खाता खुलवाया गया। ED के अनुसार, कॉलेज में छात्रवृत्ति प्रभारी/सहायक लिपिक (बाद में कार्यालय अधीक्षक) के रूप में कार्यरत भटनागर ने इस प्रक्रिया में हेरफेर कर खुद को खाता संचालक के रूप में जोड़ा और 'अपराध से अर्जित आय' को उत्पन्न करने, छुपाने व उपयोग करने में मुख्य भूमिका निभाई।

कहाँ-कहाँ गया पैसा

जाँच में बताया गया कि अनाधिकृत खाते से ₹42.50 लाख नकद निकाले गए, ₹66.50 लाख विभिन्न व्यक्तियों के नाम जारी चेकों के माध्यम से निकाले गए, और ₹99.43 लाख भटनागर के कई निजी बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए। ED के अनुसार, इन रकमों का इस्तेमाल बीमा प्रीमियम भुगतान, नकद निकासी, खातों के बीच लेयरिंग और परिवार के सदस्यों के नाम पर निजी खर्चों के लिए किया गया।

दूसरी आरोपी की भूमिका

जाँच के अनुसार, DAV (PG) कॉलेज के बैंक खातों की स्कॉलरशिप कोऑर्डिनेटर व अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता रहीं रंजना रावत ने देना बैंक खातों से जुड़े कई खाली चेकों पर हस्ताक्षर करने की बात कथित तौर पर स्वीकार की। ED का दावा है कि इन हस्ताक्षरित चेकों के माध्यम से अनाधिकृत वित्तीय लेनदेन हुए और अपराध से हासिल रकम की कई लाभार्थियों एवं खातों के बीच लेयरिंग की गई।

संपत्ति कुर्की और अगला कदम

ED के अनुसार, अपराध से अर्जित कुछ राशि बीमा पॉलिसी, बैंक बैलेंस और एक वाहन जैसी चल संपत्तियों में परिवर्तित कर दी गई थी। 27 मई 2026 के अस्थायी कुर्की आदेश के तहत ₹7.86 लाख मूल्य की चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्य और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर एजेंसी ने धारा 3 और 4 के तहत विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। मामले की आगे की सुनवाई पर वंचित वर्ग के छात्रों से जुड़े छात्रवृत्ति घोटालों पर एक अहम मिसाल कायम होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनका इस अवधि में चुप रहना सिर्फ़ दो कर्मचारियों की भूमिका तक सीमित नहीं माना जा सकता। ₹7.86 लाख की कुर्की कथित ₹2 करोड़ से अधिक की हेराफेरी के सामने प्रतीकात्मक है; असली परीक्षा वसूली और प्रभावित छात्रों तक राशि पहुँचाने में होगी। SC/ST/OBC छात्रवृत्ति घोटाले देशभर में दोहराई जाने वाली पैटर्न हैं, और बिना डिजिटल DBT ऑडिट ट्रेल के ऐसे मामले आगे भी सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DAV PG कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाला क्या है?
यह देहरादून के DAV (PG) कॉलेज में SC/ST/OBC छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति फंड की कथित हेराफेरी का मामला है। आरोप है कि देना बैंक की DMS रोड शाखा में एक अनाधिकृत खाता खोलकर 2009 से 2014 के बीच फंड को इधर-उधर किया गया, जिस पर लगभग ₹2.27 करोड़ का ब्याज जमा हुआ।
ED ने किन आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है?
प्रवर्तन निदेशालय ने कॉलेज के तत्कालीन छात्रवृत्ति प्रभारी पीयूष चंद्र भटनागर और स्कॉलरशिप कोऑर्डिनेटर रंजना रावत के खिलाफ विशेष PMLA न्यायालय, देहरादून में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह शिकायत 29 मई को PMLA, 2002 की धारा 3 और 4 के तहत दाखिल की गई।
इस मामले में अब तक कितनी संपत्ति कुर्क की गई है?
ED ने 27 मई 2026 के अस्थायी कुर्की आदेश के तहत ₹7.86 लाख मूल्य की चल संपत्तियाँ कुर्क की हैं। इनमें भटनागर और उनके परिवार के नाम पर ली गई बीमा पॉलिसी, बैंक बैलेंस और एक वाहन शामिल बताया गया है।
छात्रवृत्ति फंड का दुरुपयोग कैसे किया गया?
ED की जाँच के अनुसार, अनाधिकृत खाते से ₹42.50 लाख नकद निकाले गए, ₹66.50 लाख चेकों के माध्यम से और ₹99.43 लाख भटनागर के निजी बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए। इन रकमों का इस्तेमाल बीमा प्रीमियम, नकद निकासी और निजी खर्चों के लिए किया गया।
मामले में बैंक की क्या भूमिका रही?
प्रबंध समिति ने देना बैंक की लक्ष्मी रोड शाखा में खाता खोलने की मंजूरी दी थी, लेकिन कथित तौर पर शाखा का नाम बदलकर DMS रोड शाखा में अनाधिकृत खाता खोला गया। रंजना रावत ने इस खाते से जुड़े कई खाली चेकों पर हस्ताक्षर करने की बात स्वीकार की, जिनका बाद में फंड निकालने के लिए उपयोग हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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