देहरादून DAV PG कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाला: ED ने दो आरोपियों के खिलाफ दाखिल की अभियोजन शिकायत
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ED), देहरादून ने 29 मई को विशेष न्यायालय (PMLA), देहरादून के समक्ष पीयूष चंद्र भटनागर और रंजना रावत के खिलाफ DAV (PG) कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े मामले में अभियोजन शिकायत (PC) दाखिल की है। यह शिकायत मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत दायर की गई है, जिसमें SC/ST/OBC छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति फंड की कथित हेराफेरी का आरोप है।
मामले की पृष्ठभूमि
ED ने उत्तराखंड पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR के आधार पर जाँच शुरू की थी। FIR और उसके बाद दाखिल चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि SC/ST/OBC श्रेणी के छात्रों के लिए आवंटित छात्रवृत्ति राशि को देना बैंक में खोले गए एक अनाधिकृत खाते के माध्यम से धोखाधड़ी कर इधर-उधर किया गया। जाँच के अनुसार, इस खाते में 2009 से 2014 के बीच अन्य DAV कॉलेज खातों से छात्रवृत्ति फंड स्थानांतरित होता रहा और उस पर लगभग ₹2.27 करोड़ का ब्याज जमा हुआ।
अनाधिकृत खाता और हेराफेरी का तरीका
PMLA के तहत हुई जाँच में सामने आया कि DAV (PG) कॉलेज की प्रबंध समिति ने देना बैंक की लक्ष्मी रोड शाखा में खाता खोलने की मंजूरी दी थी, लेकिन कथित तौर पर शाखा का नाम बदलकर देना बैंक की DMS रोड शाखा में अनाधिकृत खाता खुलवाया गया। ED के अनुसार, कॉलेज में छात्रवृत्ति प्रभारी/सहायक लिपिक (बाद में कार्यालय अधीक्षक) के रूप में कार्यरत भटनागर ने इस प्रक्रिया में हेरफेर कर खुद को खाता संचालक के रूप में जोड़ा और 'अपराध से अर्जित आय' को उत्पन्न करने, छुपाने व उपयोग करने में मुख्य भूमिका निभाई।
कहाँ-कहाँ गया पैसा
जाँच में बताया गया कि अनाधिकृत खाते से ₹42.50 लाख नकद निकाले गए, ₹66.50 लाख विभिन्न व्यक्तियों के नाम जारी चेकों के माध्यम से निकाले गए, और ₹99.43 लाख भटनागर के कई निजी बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए। ED के अनुसार, इन रकमों का इस्तेमाल बीमा प्रीमियम भुगतान, नकद निकासी, खातों के बीच लेयरिंग और परिवार के सदस्यों के नाम पर निजी खर्चों के लिए किया गया।
दूसरी आरोपी की भूमिका
जाँच के अनुसार, DAV (PG) कॉलेज के बैंक खातों की स्कॉलरशिप कोऑर्डिनेटर व अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता रहीं रंजना रावत ने देना बैंक खातों से जुड़े कई खाली चेकों पर हस्ताक्षर करने की बात कथित तौर पर स्वीकार की। ED का दावा है कि इन हस्ताक्षरित चेकों के माध्यम से अनाधिकृत वित्तीय लेनदेन हुए और अपराध से हासिल रकम की कई लाभार्थियों एवं खातों के बीच लेयरिंग की गई।
संपत्ति कुर्की और अगला कदम
ED के अनुसार, अपराध से अर्जित कुछ राशि बीमा पॉलिसी, बैंक बैलेंस और एक वाहन जैसी चल संपत्तियों में परिवर्तित कर दी गई थी। 27 मई 2026 के अस्थायी कुर्की आदेश के तहत ₹7.86 लाख मूल्य की चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्य और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर एजेंसी ने धारा 3 और 4 के तहत विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। मामले की आगे की सुनवाई पर वंचित वर्ग के छात्रों से जुड़े छात्रवृत्ति घोटालों पर एक अहम मिसाल कायम होने की संभावना है।