30 सितंबर 2026
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मेघालय: गारो हिल्स परिषद चुनावों में अनुसूचित जनजाति मतदाताओं के लिए अलग मतदाता सूची को मंजूरी

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मेघालय: गारो हिल्स परिषद चुनावों में अनुसूचित जनजाति मतदाताओं के लिए अलग मतदाता सूची को मंजूरी

सारांश

मेघालय में जनजातीय स्वशासन की दिशा में अहम कदम — राज्यपाल सीएच विजयशंकर की मंजूरी के बाद गारो हिल्स परिषद चुनाव अब केवल एसटी मतदाताओं की अलग सूची से होंगे। हाई कोर्ट के झटके के बाद विधायी प्रक्रिया से हासिल यह बदलाव जनजातीय प्रतिनिधित्व को कानूनी मजबूती देता है।

मुख्य बातें

राज्यपाल सीएच विजयशंकर ने जीएचएडीसी (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 को मंजूरी दी।
गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (जीएचएडीसी) चुनावों में अब केवल अनुसूचित जनजाति (एसटी) मतदाताओं की अलग मतदाता सूची होगी।
गैर-जनजातीय मतदाताओं को परिषद की मतदाता सूची से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा।
नियम 8 उम्मीदवारों के लिए एसटी होना अनिवार्य करता है; नियम 129 अलग मतदाता सूची का प्रावधान करता है।
मेघालय हाई कोर्ट द्वारा कार्यकारी अधिसूचना रद्द किए जाने के बाद मई 2025 में समिति गठित की गई थी।
मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा ने स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई।

मेघालय के राज्यपाल सीएच विजयशंकर ने चुनाव नियमों में संशोधन को अपनी सहमति दे दी है, जिसके तहत गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (जीएचएडीसी) के आगामी चुनाव अब केवल अनुसूचित जनजाति (एसटी) मतदाताओं की अलग मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएंगे। 30 सितंबर 2026 को अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गैर-जनजातीय मतदाताओं को परिषद की मतदाता सूची से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा। अब मेघालय सरकार द्वारा जीएचएडीसी (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 को राज्य राजपत्र में अधिसूचित किए जाने की प्रक्रिया शेष है।

संशोधन में क्या बदलाव हुए

संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत नियम 8 जीएचएडीसी चुनावों में भाग लेने वाले उम्मीदवारों के लिए अनुसूचित जनजाति का होना अनिवार्य योग्यता के रूप में स्थापित करता है। नियम 128 एसटी मतदाताओं की पात्रता निर्धारित करता है, जबकि नियम 129 जीएचएडीसी चुनावों के लिए एक स्वतंत्र मतदाता सूची का प्रावधान करता है।

ये संशोधन असम और मेघालय स्वायत्त जिले (जिला परिषदों का गठन) नियम, 1951 में परिवर्तन के रूप में प्रभावी होंगे। इस नई व्यवस्था से विधानसभा मतदाता सूची के उपयोग की मौजूदा प्रथा समाप्त हो जाएगी, जो अब तक परिषद चुनावों में अपनाई जाती रही थी।

मुख्य घटनाक्रम और पृष्ठभूमि

राज्यपाल ने 6 अगस्त को संशोधन विधेयक को परिषद में प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी, जिसके बाद जीएचएडीसी ने 10 अगस्त को संशोधन विधेयक पारित किया। इससे पहले परिषद ने 23 मार्च को नियम 8 में संशोधन पारित किया था। यह पूरी विधायी प्रक्रिया मेघालय हाई कोर्ट के उस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद प्रारंभ हुई, जिसमें जीएचएडीसी की एक पूर्व कार्यकारी अधिसूचना — जो उम्मीदवारों के लिए अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र अनिवार्य करती थी — को रद्द कर दिया गया था।

न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि ऐसी कोई भी आवश्यकता कार्यकारी अधिसूचना से नहीं, बल्कि निर्धारित नियम-निर्माण प्रक्रिया के माध्यम से ही लागू की जा सकती है। इस कानूनी झटके के बाद जीएचएडीसी ने मई 2025 में चुनाव प्रावधानों की जांच और अलग मतदाता सूची की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए एक विशेष समिति गठित की थी।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि शासन और नीति-निर्माण उन्हीं समुदायों के प्रति जवाबदेह रहने चाहिए, जिनकी सेवा के लिए ये संस्थाएं अस्तित्व में आई हैं।

आम जनता और जनजातीय समुदाय पर असर

इस संशोधन का सीधा असर गारो हिल्स क्षेत्र के जनजातीय और गैर-जनजातीय निवासियों दोनों पर पड़ेगा। जहाँ एसटी मतदाताओं को परिषद चुनाव में भागीदारी का विशेष अधिकार मिलेगा, वहीं गैर-जनजातीय मतदाता इन चुनावों में मतदान करने में सक्षम नहीं रहेंगे। यह बदलाव स्वायत्त जिला परिषदों के मूल उद्देश्य — जनजातीय स्वशासन — को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि यह घटनाक्रम जीएचएडीसी के अगले चुनावों की तारीखों को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच आया है। राज्य राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद ही नया नियामक ढाँचा पूरी तरह लागू होगा, जिसके बाद चुनाव आयोग नई प्रक्रिया के अनुसार मतदाता सूची तैयार करने की कार्यवाही शुरू कर सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें एक गहरे संवैधानिक तनाव में हैं — छठी अनुसूची के तहत जनजातीय स्वशासन की मूल भावना बनाम समावेशी लोकतांत्रिक भागीदारी। मेघालय हाई कोर्ट ने पहले कार्यकारी रास्ते को अवैध ठहराया था, जो दर्शाता है कि जनजातीय संस्थाएं अक्सर नियम-निर्माण की औपचारिकता से बाहर काम करती रही हैं। असली परीक्षा यह है कि अलग मतदाता सूची तैयार करने का तंत्र कितना पारदर्शी और विवाद-मुक्त होगा — विशेषकर ऐसे क्षेत्रों में जहाँ जनजातीय और गैर-जनजातीय आबादी की सीमाएं अस्पष्ट हैं। जीएचएडीसी के अगले चुनावों को लेकर जारी अनिश्चितता यह भी संकेत देती है कि यह कानूनी स्पष्टता व्यावहारिक क्रियान्वयन की गारंटी नहीं है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (जीएचएडीसी) के लिए अलग मतदाता सूची का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि जीएचएडीसी चुनावों में मतदान का अधिकार केवल अनुसूचित जनजाति (एसटी) मतदाताओं को होगा, जिनकी एक स्वतंत्र सूची तैयार की जाएगी। अब तक विधानसभा मतदाता सूची का उपयोग होता था, जिसमें गैर-जनजातीय मतदाता भी शामिल रहते थे।
यह संशोधन मेघालय हाई कोर्ट के फैसले से कैसे जुड़ा है?
मेघालय हाई कोर्ट ने जीएचएडीसी की एक पूर्व कार्यकारी अधिसूचना रद्द की थी, जो उम्मीदवारों के लिए एसटी प्रमाण पत्र अनिवार्य करती थी। अदालत ने कहा था कि ऐसी शर्त कार्यकारी आदेश से नहीं, बल्कि नियम-निर्माण प्रक्रिया से लागू होनी चाहिए — इसीलिए विधायी संशोधन का रास्ता अपनाया गया।
जीएचएडीसी संशोधन नियम 2026 कब लागू होगा?
राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है। अब मेघालय सरकार द्वारा जीएचएडीसी (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 को राज्य राजपत्र में अधिसूचित करने के बाद यह नियम पूरी तरह प्रभावी होगा।
इस बदलाव से गारो हिल्स के गैर-जनजातीय निवासियों पर क्या असर होगा?
गैर-जनजातीय निवासी अब जीएचएडीसी चुनावों में मतदान नहीं कर सकेंगे, क्योंकि उन्हें परिषद की मतदाता सूची से बाहर रखा जाएगा। यह परिवर्तन परिषद के जनजातीय स्वशासन के मूल उद्देश्य को कानूनी आधार देता है।
जीएचएडीसी के अगले चुनाव कब होंगे?
रिपोर्टों के अनुसार, जीएचएडीसी के अगले चुनावों की तारीखों को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। राजपत्र में अधिसूचना के बाद नई प्रक्रिया के अनुसार मतदाता सूची तैयार होगी, तभी चुनाव कार्यक्रम तय हो सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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