23 अगस्त 2026
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बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत: उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने माछुर्दा गांव का दौरा किया, अधिकारियों पर गिरी गाज

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बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत: उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने माछुर्दा गांव का दौरा किया, अधिकारियों पर गिरी गाज

सारांश

बालाघाट के माछुर्दा गांव में बैगा बच्चों की मौत के बाद उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मैदान में उतरकर दो अधिकारियों को हटाया, 38 गांवों में मलेरिया रोधी अभियान तेज किया और जांच के आदेश दिए — लेकिन असली सवाल यह है कि ये कदम कितने समय में ज़मीन पर उतरेंगे।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने 22 अगस्त 2026 को बालाघाट के माछुर्दा गांव का दौरा कर बैगा परिवारों से मुलाकात की।
जिला टीकाकरण अधिकारी का तबादला और जिला मलेरिया अधिकारी को पद से हटाया गया।
बिरसा क्षेत्र के 38 गांवों में मलेरिया रोधी दवा छिड़काव और घर-घर सर्वेक्षण जारी।
माछुर्दा उप-स्वास्थ्य केंद्र में ANM की तत्काल तैनाती के निर्देश दिए गए।
बैगा बच्चों की मौत की जांच होगी; लापरवाही साबित होने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने पर चर्चा प्रस्तावित।

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने 22 अगस्त 2026 को बालाघाट जिले के माछुर्दा गांव का दौरा कर बीमार बैगा आदिवासी बच्चों के परिवारों से सीधी मुलाकात की और राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। बिरसा विकास खंड के इस सुदूर गांव में बैगा बच्चों की मौत की घटनाओं ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

मुख्य घटनाक्रम

शुक्ला ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति और आर्थिक कठिनाइयों को समझा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बालाघाट के जिला टीकाकरण अधिकारी का तबादला कर दिया गया है और जिला मलेरिया अधिकारी को पद से हटा दिया गया है। शुक्ला ने कहा कि बैगा बच्चों की मौत की जांच की जाएगी और लापरवाही साबित होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य उपाय और अभियान

बिरसा क्षेत्र के 38 गांवों में मलेरिया रोधी दवा का छिड़काव किया जा रहा है और बीमार लोगों की पहचान के लिए घर-घर सर्वेक्षण चलाए जा रहे हैं। बीमार पाए गए व्यक्तियों की जांच और उपचार की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में एक विशेष टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है। शुक्ला ने बैगा परिवारों से अपील की कि वे इस अभियान में सहयोग करें, क्योंकि संक्रामक रोगों से बच्चों की सुरक्षा के लिए टीकाकरण अनिवार्य है।

उन्होंने माछुर्दा उप-स्वास्थ्य केंद्र में एक सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) की तत्काल तैनाती के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें। यह ऐसे समय में आया है जब दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी लंबे समय से एक गंभीर चिंता का विषय रही है।

पोषण और जागरूकता पर जोर

शुक्ला ने परिवारों को स्वच्छता बनाए रखने और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की सलाह दी। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें। उन्होंने यह भी बताया कि वे भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैगा बच्चों के पोषण संबंधी व्यवस्थाओं पर चर्चा करेंगे और क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्रों में सेवाओं को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

सरकार की प्रतिक्रिया

शुक्ला ने घोषणा की कि बैगा आदिवासी परिवारों में स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना पर काम करेगा। गौरतलब है कि बैगा जनजाति मध्य प्रदेश की विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों (PVTGs) में शामिल है, जिनके लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पहले से ही एक बड़ी चुनौती रही है।

आगे की राह

प्रशासनिक कार्रवाई और मैदानी अभियानों के बाद अब असली परीक्षा इन उपायों के क्रियान्वयन की होगी। मृत्यु की जांच रिपोर्ट और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रतीक्षा अभी बाकी है। आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने और ANM की तैनाती जैसे कदम यदि समयबद्ध तरीके से लागू हुए, तो बिरसा क्षेत्र के सुदूर गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बैगा जैसे PVTGs के लिए स्वास्थ्य संकट कोई नई घटना नहीं — यह दशकों की संरचनात्मक उपेक्षा का नतीजा है। ANM तैनाती और मलेरिया छिड़काव जरूरी हैं, पर पर्याप्त नहीं; असली सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट कब आएगी और क्या दोषियों पर कार्रवाई महज़ तबादले तक सीमित रहेगी। आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने की बात पहले भी कही जाती रही है — इस बार क्रियान्वयन की समयसीमा और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत का मामला क्या है?
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा विकास खंड अंतर्गत माछुर्दा गांव में बैगा आदिवासी बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आई हैं। इन मौतों की जांच के आदेश दिए गए हैं और लापरवाही साबित होने पर अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही गई है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने माछुर्दा दौरे में क्या कदम उठाए?
शुक्ला ने जिला टीकाकरण अधिकारी का तबादला और जिला मलेरिया अधिकारी को पद से हटाने के आदेश दिए। साथ ही माछुर्दा उप-स्वास्थ्य केंद्र में ANM की तैनाती, 38 गांवों में मलेरिया रोधी छिड़काव और घर-घर सर्वेक्षण जारी रखने के निर्देश दिए।
बिरसा क्षेत्र में स्वास्थ्य अभियान की स्थिति क्या है?
बिरसा विकास खंड के 38 गांवों में मलेरिया रोधी दवा का छिड़काव किया जा रहा है और घर-घर सर्वेक्षण के जरिए बीमार लोगों की पहचान की जा रही है। बीमार पाए गए लोगों की जांच और उपचार के साथ-साथ एक विशेष टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है।
बैगा आदिवासी बच्चों के पोषण के लिए क्या योजना है?
उपमुख्यमंत्री शुक्ला ने कहा कि वे भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैगा बच्चों के पोषण संबंधी व्यवस्थाओं पर चर्चा करेंगे। क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्रों में सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए जाने की बात कही गई है।
मौतों की जांच और जवाबदेही कब तय होगी?
शुक्ला ने कहा कि बैगा बच्चों की मौत की जांच की जाएगी और लापरवाही साबित होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि जांच की समयसीमा और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तारीख का अभी ऐलान नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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