बालाघाट दौरे से पहले डिप्टी CM शुक्ला का राहुल गांधी पर हमला, आदिवासी बच्चों की मौत पर राजनीति का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने 30 सितंबर 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बालाघाट दौरे से ठीक पहले कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। शुक्ला ने राहुल गांधी पर बैगा और गोंड आदिवासी समुदाय के बच्चों की मौत के संवेदनशील मामले को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया।
डिप्टी CM का आरोप: राजनीति चमकाने की कोशिश
उपमुख्यमंत्री शुक्ला ने कहा, 'राहुल गांधी इतने दिनों बाद आ रहे हैं। यह सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने और अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश है।' उन्होंने राज्य सरकार की ओर से आदिवासी बहुल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए कदमों का बचाव किया।
गौरतलब है कि 17 सितंबर को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि बालाघाट के बैहर-बिरसा इलाके में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है। उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, स्वच्छ पेयजल और बीमारी-रोकथाम की कमियों पर सवाल उठाए थे।
राहुल गांधी का दौरा और कांग्रेस की माँगें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 1 अक्टूबर को बालाघाट के बैहर-बिरसा क्षेत्र के प्रभावित गाँवों का दौरा करने और मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात करने का कार्यक्रम है। कांग्रेस ने इस मामले में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की माँग भी की है।
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने बालाघाट में पहले ही 'न्याय यात्रा' निकाली और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की माँग कर चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में आदिवासी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुकी है।
बच्चों की मौत की वजह: कोई एक कारण नहीं
स्वास्थ्य संबंधी आकलनों के अनुसार, बैगा और गोंड आदिवासी समुदायों के बच्चों की मौतों को किसी एक बीमारी या कारण से नहीं जोड़ा गया है। रिपोर्टों में खसरा, मलेरिया, श्वसन संबंधी तकलीफ, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएँ सामने आई हैं।
इस मामले पर दायर एक जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी राज्य सरकार से जवाब और संबंधित दस्तावेज माँगे हैं, जो इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करता है।
सरकार की प्रतिक्रिया: स्वास्थ्य ढाँचे को मजबूत करने का दावा
उपमुख्यमंत्री शुक्ला ने बताया कि राज्य सरकार ने बालाघाट में 67 नए मेडिकल अधिकारियों की तैनाती की है और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए ₹2 करोड़ की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एक उप-स्वास्थ्य केंद्र और दो मोबाइल मेडिकल यूनिट स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने के लिए 3,100 से अधिक डॉक्टरों की तैनाती की गई है, जिनमें से 2,600 से ज्यादा ने ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। कुपोषण से निपटने के लिए आंगनवाड़ी व्यवस्था को सशक्त बनाने के प्रयास भी जारी हैं।
शुक्ला ने कहा, 'हमारा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि लोगों को प्राथमिक स्तर पर ही इलाज मिल जाए और केवल गंभीर मामलों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजने की जरूरत पड़े।'
आगे क्या होगा
राहुल गांधी के दौरे के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की सक्रियता के बीच सरकार को जल्द ही अदालत के सामने ठोस जवाब पेश करना होगा। बालाघाट में आदिवासी स्वास्थ्य सेवाओं की दीर्घकालिक बहाली और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सत्ताधारी दल के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है।