राहुल गांधी के बालाघाट दौरे से पहले सुरक्षा चूक का आरोप, पुलिस की 29 सितंबर की चिट्ठी में था पूर्व अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 1 अक्टूबर, गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के प्रस्तावित दौरे से महज कुछ घंटे पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस ने पुलिस और प्रशासन पर सुरक्षा व्यवस्था में घोर लापरवाही का आरोप लगाया। इस विवाद के बीच बालाघाट जिला पुलिस की 29 सितंबर को जारी एक चिट्ठी सामने आई, जिसमें स्थानीय बैहर विधायक संजय उइके को दौरे की सुरक्षा चिंताओं से अवगत कराकर सहयोग माँगा गया था।
विवाद की जड़: दो परस्पर विरोधी दावे
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को जारी बयान में बालाघाट पुलिस और प्रशासन की कथित लापरवाही को 'अत्यंत आपत्तिजनक' करार दिया। पटवारी ने कहा, 'कार्यक्रम पहले से निर्धारित था और इसकी पूर्व सूचना भी दी गई थी। इसके बावजूद सरकारी तंत्र उनके दौरे की जानकारी नहीं होने की बात कह रहा है। यह अपने आप में व्यवस्था की खामियों और कमियों को उजागर करता है।'
कांग्रेस ने यही पुलिस चिट्ठी मीडिया के साथ साझा की और तर्क दिया कि जब पुलिस 29 सितंबर को ही दौरे की जानकारी लिखित रूप में दर्ज कर रही थी, तो सरकारी तंत्र का 'अनजान' होने का दावा बेबुनियाद है।
पुलिस की चिट्ठी में क्या था
बालाघाट जिला पुलिस ने 29 सितंबर को बैहर विधायक संजय उइके को लिखी चिट्ठी में स्वीकार किया कि पुलिस को 'विभिन्न माध्यमों' से राहुल गांधी के 1 अक्टूबर के दौरे और सार्वजनिक कार्यक्रम की जानकारी थी। हालाँकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोजकों की ओर से लिखित सूचना या विस्तृत कार्यक्रम विवरण पहले उपलब्ध नहीं कराया गया था।
चिट्ठी में बालाघाट को सुरक्षा की दृष्टि से 'अत्यंत संवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्र' बताया गया। पुलिस ने रेखांकित किया कि ऐसे इलाकों में वीआईपी/वीवीआईपी आवाजाही के लिए एडवांस सिक्योरिटी लाइजनिंग, रूट क्लियरेंस, बम डिस्पोजल जाँच, एंटी-नक्सल कॉम्बिंग ऑपरेशन और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा अनिवार्य होते हैं।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में कम समय में पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती, यातायात डायवर्जन और आपातकालीन व्यवस्थाएँ करना प्रशासनिक और सुरक्षा दृष्टि से 'बेहद जटिल और कठिन' है।
आयोजकों से माँगी गई जानकारी
चिट्ठी में विधायक उइके से प्रशासन के साथ तत्काल समन्वय करने को कहा गया। पुलिस ने कार्यक्रम का शेड्यूल, संभावित उपस्थिति संख्या, स्वयंसेवकों की सूची व मोबाइल नंबर, पार्किंग एवं यातायात व्यवस्था, तथा राहुल गांधी से मिलने वाले लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और आधार संबंधी विवरण माँगे थे।
गौरतलब है कि चिट्ठी में न्यायमूर्ति वर्मा आयोग और वीवीआईपी सुरक्षा संहिता का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि किसी भी वीवीआईपी कार्यक्रम की पूर्ण जानकारी, समय-सारणी और रूट मैप पर्याप्त समय पूर्व प्रशासन को उपलब्ध कराना आयोजकों की जिम्मेदारी है। पुलिस ने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी को जेड-प्लस सुरक्षा प्राप्त है।
दौरे का उद्देश्य: आदिवासी बच्चों की मौत
राहुल गांधी का बालाघाट दौरा जिले में आदिवासी बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिले में संक्रामक बीमारियों, कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष राज्य सरकार पर आदिवासी स्वास्थ्य और बाल मृत्यु दर के मुद्दे पर लगातार दबाव बना रहा है।
बैहर विधायक संजय उइके वर्ष 2013 से लगातार बैहर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं और उन्होंने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की थी।
आगे क्या
यह विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है — कांग्रेस जहाँ सुरक्षा चूक को सत्तारूढ़ दल की मंशा से जोड़ रही है, वहीं पुलिस के दस्तावेज़ी साक्ष्य यह भी संकेत देते हैं कि आयोजकों की ओर से अपेक्षित सूचना समय पर नहीं मिली थी। यह मामला वीवीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल में जिम्मेदारी के निर्धारण और राज्य-विपक्ष समन्वय की कमी को रेखांकित करता है।