राहुल गांधी के बालाघाट दौरे में सुरक्षा चूक: कांग्रेस ने अमित शाह को लिखा पत्र, जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 2 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 1 अक्टूबर को बालाघाट दौरे के दौरान कथित सुरक्षा और प्रोटोकॉल चूक की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। पटवारी ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी — उल्लेखनीय रूप से, यह मुद्दा गृह मंत्री के स्वयं भोपाल दौरे से महज कुछ घंटे पहले उठाया गया।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
पटवारी ने आरोप लगाया कि बालाघाट जिले के जगला गांव में राहुल गांधी के कार्यक्रम के दौरान जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यक्रम स्थल पर अनुपस्थित रहे, जबकि उन्हें दौरे की पूर्व सूचना थी। उन्होंने 29 सितंबर को बालाघाट पुलिस की ओर से बैहर विधायक एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय उइके को भेजे गए पत्र का हवाला दिया, जिसमें पुलिस ने अपेक्षित भीड़, स्वयंसेवकों, पार्किंग व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और राहुल गांधी से मिलने वाले लोगों की सूची समेत अन्य जानकारियां मांगी थीं। उक्त पत्र में क्षेत्र को संवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित इलाका भी बताया गया था।
पटवारी ने सवाल उठाया कि जब पुलिस को कार्यक्रम की जानकारी पहले से थी और उसने सुरक्षा से जुड़ी सूचनाएं स्वयं मांगी थीं, तो जिला प्रशासन और पुलिस की अनुपस्थिति गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
कांग्रेस की विशिष्ट मांगें
पटवारी ने गृह मंत्रालय से इस पूरे मामले पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगने के साथ-साथ मध्य प्रदेश सरकार से जिला कलेक्टर और एसपी की कथित अनुपस्थिति पर लिखित स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या राहुल गांधी के दौरे के लिए कलेक्टर और एसपी का ड्यूटी चार्ट जारी किया गया था, उनकी अनुपस्थिति में जिम्मेदारियां निभाने के लिए किसी अधिकारी को औपचारिक रूप से अधिकृत किया गया था या नहीं, और क्या संबंधित अधिकारियों ने पूर्व अनुमति ली थी।
उन्होंने राहुल गांधी के दौरे से संबंधित एडवांस सिक्योरिटी लाइजन (एएसएल) बैठकों और उनमें लिए गए निर्णयों की जानकारी भी मांगी। पटवारी ने गृह मंत्री से सभी सुरक्षा और प्रोटोकॉल दस्तावेजों की समीक्षा करने तथा उल्लंघन की पुष्टि होने पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की।
दौरे की पृष्ठभूमि
राहुल गांधी ने 1 अक्टूबर को बालाघाट के जगला गांव का दौरा कर उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात की थी, जिन्होंने बीमारी और कुपोषण के कारण अपने बच्चों को खोया है। इस दौरान उन्होंने आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, मुआवजे और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में आदिवासी कल्याण को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है।
प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल
पटवारी ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष के सार्वजनिक दौरे के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सवाल के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी जनता के सेवक हैं और संविधान तथा कानून के प्रति जवाबदेह हैं। गौरतलब है कि विपक्षी नेताओं के दौरों के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में सवाल उठे हों।
पटवारी ने भविष्य में नेता प्रतिपक्ष और अन्य संवैधानिक या वैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त उच्च पदों पर बैठे लोगों के दौरों के लिए स्पष्ट और एकसमान प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने की भी मांग की। अब यह देखना होगा कि गृह मंत्रालय इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देता है और मध्य प्रदेश प्रशासन स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं।