राहुल गांधी के इंदौर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने स्थल व सुरक्षा पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 18 सितंबर 2026 को इंदौर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आगामी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर पार्टी को मध्य प्रदेश में आ रही बाधाओं का खुलासा किया। खेड़ा ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम-स्थल के आवंटन से लेकर सुरक्षा नोट तक, हर मोड़ पर रुकावटें खड़ी की गई हैं।
आयोजन स्थल पर विवाद
कार्यक्रम मूलतः जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में निर्धारित था, लेकिन स्टेडियम की अनुपलब्धता के कारण इसे क्षेत्रीय पार्क के निकट एक खुले मैदान में स्थानांतरित करना पड़ा। इंदौर विकास प्राधिकरण ने बाद में अस्थायी भूमि आवंटन दिया, परंतु नागरिक प्राधिकरण द्वारा मैदान के उपयोग के लिए अतिरिक्त भुगतान की माँग किए जाने के बाद यह मुद्दा और उलझ गया। पार्टी के अनुसार, ये सभी अड़चनें मध्य प्रदेश में बड़े विपक्षी आयोजनों को हतोत्साहित करने की रणनीति का हिस्सा हैं।
सुरक्षा नोट पर उठा विवाद
खेड़ा ने गांधी के दौरे से पहले जारी किए गए एक सुरक्षा संबंधी नोट का भी उल्लेख किया, जिसे लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। हालाँकि उन्होंने नोट के विशिष्ट विवरण सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किए, उनका आरोप था कि इस तरह की कार्रवाइयाँ राजनीतिक दबाव का संकेत हैं।
दिग्विजय सिंह के कार्यकाल का उदाहरण
खेड़ा ने कांग्रेस की राजनीतिक परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने 1995 से 1998 तक भोपाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में काम किया था। उन्होंने कहा, 'दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। दिग्विजय सिंह ने स्वयं उस बैठक का स्वागत किया था और भोजन की व्यवस्था भी की थी। मैं आपको कांग्रेस की इस परंपरा के बारे में बता रहा हूं।' यह टिप्पणी मौजूदा राज्य सरकार पर परोक्ष प्रहार मानी जा रही है।
युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा कार्यक्रम
खेड़ा ने स्पष्ट किया कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पेपर लीक, बेरोज़गारी और युवाओं से जुड़ी बुनियादी समस्याओं पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने सवाल उठाया, 'अगर आप नाम बदल देंगे, तो क्या उनकी किस्मत बदल जाएगी? क्या उनकी स्थिति बदल जाएगी? क्या पेपर लीक बंद हो जाएगा? क्या लोगों को नौकरियाँ मिलनी शुरू हो जाएंगी? मैं बुनियादी सवालों से अपना ध्यान भटकाना नहीं चाहता।' यह बयान सत्तारूढ़ दल की शैक्षणिक एवं रोज़गार नीतियों पर सीधा हमला है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष मध्य प्रदेश में अपनी राजनीतिक उपस्थिति पुनः स्थापित करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य में करारी हार का सामना करना पड़ा था। राहुल गांधी की यह यात्रा पार्टी के युवा-संपर्क अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। आयोजन की अनुमति और स्थल-विवाद का अंतिम समाधान अभी बाकी है, और कार्यक्रम से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और गरमा सकता है।