भारत का औद्योगिक उत्पादन जून में 7.3% बढ़ा, विनिर्माण और निर्यात से मिली रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर जून 2026 में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत रही, जो मजबूत घरेलू मांग और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में वस्तुओं के निर्यात में आई तेज़ी से संभव हुई। केयरएज रेटिंग्स की 29 जुलाई 2026 को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार
जून में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर उछलकर 7.8 प्रतिशत हो गई, जो मई में 5.2 प्रतिशत थी। विनिर्माण के 23 में से 19 उप-क्षेत्रों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इलेक्ट्रिकल उपकरण क्षेत्र में 34 प्रतिशत और मोटर वाहन, ट्रेलर एवं सेमी-ट्रेलर क्षेत्र में 17.5 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
इसके अलावा, कपड़ा क्षेत्र में 13.7 प्रतिशत, खाद्य उत्पाद में 10.8 प्रतिशत और अन्य गैर-धात्विक खनिज उत्पाद क्षेत्र में 12.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, खनन और उत्खनन क्षेत्र इस समग्र तेज़ी में अपवाद रहा।
उपयोग-आधारित वर्गीकरण में तस्वीर
उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार, पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 14.2 प्रतिशत बढ़ा — जो निवेश गतिविधि में उत्साह का संकेत है। मध्यवर्ती वस्तुओं में 9.3 प्रतिशत, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में 7.7 प्रतिशत, बुनियादी ढाँचा एवं निर्माण सामग्री में 7.5 प्रतिशत और प्राथमिक वस्तुओं में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
तिमाही आधार पर देखें तो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में सालाना आधार पर 5.8 प्रतिशत की वृद्धि रही। इस दौरान इलेक्ट्रिकल उपकरण में 25.8 प्रतिशत और मोटर वाहन क्षेत्र में 15 प्रतिशत की मजबूत बढ़त प्रमुख चालक रही।
मानसून और ग्रामीण मांग का समीकरण
28 जुलाई 2026 तक देश में वर्षा की कमी जून के अंत में दर्ज 40 प्रतिशत से घटकर 15.8 प्रतिशत रह गई है। यह सुधार आंशिक राहत तो देता है, लेकिन वर्षा अभी भी सामान्य स्तर से नीचे बनी हुई है। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, "ग्रामीण मांग पर मानसून के प्रभाव का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में खरीफ फसलों की बुवाई में सुधार एक सकारात्मक संकेत है।"
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताएँ — विशेषकर अमेरिकी व्यापार नीति और भू-राजनीतिक तनाव — भारत के निर्यात परिदृश्य पर दबाव बना रही हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि "भारत की औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के साथ-साथ उभरती घरेलू चुनौतियों का भी सामना करना होगा।"
बाह्य क्षेत्र की भूमिका
केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, "वैश्विक अनिश्चितता के समय में भी भारत के बाह्य क्षेत्र का प्रदर्शन मजबूत रहा है और वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में सामानों के निर्यात में वृद्धि हुई है।" गौरतलब है कि यह निर्यात-वृद्धि तब आई है जब वैश्विक माँग में अनिश्चितता बनी हुई है, जो भारतीय उत्पादों की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता का संकेत है।
आगे चलकर मानसून की प्रगति, वैश्विक कच्चे माल की कीमतें और घरेलू उपभोग का रुझान IIP के आगामी आँकड़ों की दिशा तय करेंगे।