वित्त मंत्रालय की समीक्षा: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत, घरेलू मांग बनी रीढ़
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्रालय ने 29 जुलाई 2026 को जारी जुलाई 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा है कि पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। समीक्षा के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग इस प्रदर्शन की प्रमुख चालक शक्ति रही है और भारत वैश्विक दबावों के बीच भी स्थिर विकास पथ पर बना हुआ है।
औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में कोर इंडस्ट्रीज इंडेक्स के संशोधित आँकड़ों के मुताबिक औद्योगिक उत्पादन में 5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में लौह अयस्क, बिजली, सीमेंट और इस्पात क्षेत्रों का प्रमुख योगदान रहा। यह आँकड़ा दर्शाता है कि भारत का बुनियादी उद्योग क्षेत्र वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बावजूद ठोस आधार पर खड़ा है।
प्रमुख नीतिगत पहलें
समीक्षा में जुलाई 2026 के दौरान सरकार की कई महत्वपूर्ण विनिर्माण और नीतिगत पहलों का उल्लेख किया गया है। इनमें सेमिकॉन 2.0, नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, क्रिटिकल मिनरल्स और शिपबिल्डिंग क्षेत्र में प्रगति, स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) के निर्माताओं के लिए नियामकीय ढील तथा भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन की शुरुआत शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये पहलें देश की विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ कर रही हैं, सप्लाई चेन को अधिक लचीला बना रही हैं और रणनीतिक क्षेत्रों में आयात-निर्भरता घटाने में सहायक हैं।
मिश्रित संकेत: कुछ क्षेत्रों में नरमी
हालाँकि, समीक्षा में यह भी स्वीकार किया गया है कि कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतकों — जैसे ई-वे बिल जनरेशन और मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) — में कुछ नरमी देखी गई है। दूसरी ओर, घरेलू और वैश्विक माँग मजबूत रहने के कारण सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन और बेहतर हुआ है। यह विभाजन दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के बीच असमान गति बनी हुई है।
वैश्विक जोखिम और राजकोषीय दबाव
रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के जुलाई 2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक का हवाला देते हुए बताया गया है कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2025 के 3.2 प्रतिशत से घटकर 2026 में 3.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि हुई है। वित्त मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि यह संकट और गहराता है तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य — जो GDP का 4.3 प्रतिशत निर्धारित है — और चालू खाता संतुलन पर दबाव पड़ सकता है।
आगे की राह
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि तेज़ी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत को उच्च विकास दर और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए निरंतर घरेलू सुधारों और संतुलित व्यापक आर्थिक प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना होगा। समीक्षा में कहा गया, 'हाल के वर्षों में वैश्विक परिस्थितियों ने सतर्क रहने की आवश्यकता पैदा की है और आने वाले वर्षों में भी यही स्थिति बनी रह सकती है।' विदेशी और घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत फैसलों को तेज़ी से लागू करना इस दिशा में अनिवार्य कदम बताया गया है।