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दुबई में भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 पहुंची, 2025 में गैर-तेल व्यापार $60.6 अरब के रिकॉर्ड पर

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दुबई में भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 पहुंची, 2025 में गैर-तेल व्यापार $60.6 अरब के रिकॉर्ड पर

सारांश

दुबई में भारतीय कारोबारी मौजूदगी नए शिखर पर है — 85,841 सक्रिय कंपनियाँ, $60.6 अरब का रिकॉर्ड गैर-तेल व्यापार और एक दशक में 136% की वृद्धि। CEPA और भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के साथ दुबई भारत का वैश्विक कारोबारी गेटवे बनता जा रहा है।

मुख्य बातें

जून 2026 तक दुबई चैंबर में पंजीकृत सक्रिय भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 पहुंची।
2026 की पहली छमाही में 7,579 नई भारतीय कंपनियाँ जुड़ीं — पिछले वर्ष से 15% अधिक ।
2025 में भारत-दुबई गैर-तेल व्यापार $60.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड पर, सालाना 15% वृद्धि।
2016-2025 के बीच दुबई कंपनियों ने भारत में 147 परियोजनाओं से $9.3 अरब निवेश कर 55,274 रोज़गार सृजित किए।
एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार $25.6 अरब से बढ़कर $60 अरब+ — 136.2% की वृद्धि।
भारत-UAE CEPA को व्यापारिक बाधाएँ घटाने और बाज़ार पहुंच बढ़ाने का प्रमुख कारक बताया गया।

दुबई चैंबर्स के अध्यक्ष मोहम्मद अली राशिद लूता ने बताया कि जून 2026 के अंत तक दुबई चैंबर में सक्रिय सदस्यों के रूप में पंजीकृत भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 तक पहुंच गई है। 2026 की पहली छमाही में ही 7,579 नई भारतीय कंपनियाँ दुबई चैंबर से जुड़ीं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत की वृद्धि है — यह आँकड़ा दुबई में भारतीय कारोबारी उपस्थिति के लगातार विस्तार का प्रमाण है।

व्यापारिक संबंधों का विस्तार

अरेबियन बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और दुबई के बीच गैर-तेल व्यापार $60.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो सालाना आधार पर 15 प्रतिशत अधिक है। लूता ने बताया कि पिछले एक दशक में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 136.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है — 2016 में यह $25.6 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर $60 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है।

इस विस्तार के साथ भारत अब दुबई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। गौरतलब है कि यह वृद्धि केवल परंपरागत वस्तु व्यापार तक सीमित नहीं रही, बल्कि सेवा, प्रौद्योगिकी और डिजिटल क्षेत्रों में भी सहयोग तेज़ी से बढ़ा है।

दोनों दिशाओं में निवेश प्रवाह

लूता के अनुसार, 2016 से 2025 के बीच दुबई ने भारत से लगभग $8.8 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया। इनमें से केवल 2025 में ही $2.3 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दर्ज किया गया।

निवेश एकतरफ़ा नहीं रहा। इसी अवधि में दुबई की कंपनियों ने भारत में 147 परियोजनाओं के ज़रिये $9.3 अरब डॉलर का निवेश किया और 55,274 रोज़गार अवसर सृजित किए। यह आँकड़ा दर्शाता है कि साझेदारी पारस्परिक और बहुआयामी है।

दुबई: भारतीय कंपनियों का वैश्विक केंद्र

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियाँ मध्य पूर्व, अफ्रीका और अन्य वैश्विक बाज़ारों में विस्तार के लिए दुबई को अपने संचालन केंद्र के रूप में चुन रही हैं। विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा, उत्कृष्ट संपर्क व्यवस्था, प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल और निवेशकों तक सीधी पहुंच इसकी प्रमुख वजहें हैं।

लूता ने कहा, 'ये आँकड़े दुबई और उसके भविष्य के विकास अवसरों के प्रति भारतीय कारोबारी समुदाय के मज़बूत विश्वास को दर्शाते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि एजेंटिक AI, डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी नवाचार जैसे भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों में भी दोनों पक्षों के बीच सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है।

CEPA की भूमिका

लूता ने भारत-UAE व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को इस वृद्धि का एक प्रमुख चालक बताया। उनके अनुसार, इस समझौते ने व्यापारिक बाधाओं को कम करने, बाज़ार पहुंच बेहतर बनाने और नए विकास अवसर खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। CEPA ने दोनों देशों के व्यवसायों को अधिक प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर सक्रिय बनाने में मदद की है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'विकसित भारत' रणनीति के तहत वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है — और दुबई उस रणनीति का एक अहम स्तंभ बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

841 का आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितनी कंपनियाँ वास्तविक परिचालन कर रही हैं और कितनी केवल टैक्स या रजिस्ट्रेशन सुविधा के लिए पंजीकृत हैं — यह भेद रिपोर्ट स्पष्ट नहीं करती। $60.6 अरब का गैर-तेल व्यापार निश्चित रूप से ऐतिहासिक है, पर भारत के कुल वैश्विक व्यापार में दुबई की हिस्सेदारी और CEPA के बाद घरेलू निर्यातकों को मिले वास्तविक लाभ का विश्लेषण अभी बाकी है। दुबई को 'ग्लोबल हब' के रूप में प्रस्तुत करने की यह आख्यान भारतीय नीति-निर्माताओं के लिए भी एक संकेत है — यदि घरेलू कारोबारी माहौल प्रतिस्पर्धी नहीं रहा, तो पूंजी और प्रतिभा दोनों बाहर जाते रहेंगे।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जून 2026 तक दुबई में कितनी भारतीय कंपनियाँ सक्रिय हैं?
दुबई चैंबर्स के अनुसार, जून 2026 के अंत तक दुबई चैंबर में सक्रिय सदस्यों के रूप में पंजीकृत भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 है। 2026 की पहली छमाही में अकेले 7,579 नई भारतीय कंपनियाँ जुड़ीं, जो पिछले वर्ष से 15% अधिक है।
2025 में भारत और दुबई के बीच गैर-तेल व्यापार कितना रहा?
2025 में भारत और दुबई के बीच गैर-तेल व्यापार $60.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो सालाना आधार पर 15 प्रतिशत अधिक है। यह 2016 के $25.6 अरब के मुकाबले एक दशक में 136.2% की वृद्धि दर्शाता है।
दुबई की कंपनियों ने भारत में कितना निवेश किया है?
2016 से 2025 के बीच दुबई की कंपनियों ने भारत में 147 परियोजनाओं के ज़रिये $9.3 अरब डॉलर का निवेश किया और 55,274 रोज़गार अवसर सृजित किए। इसी अवधि में भारत से दुबई में $8.8 अरब डॉलर का निवेश आया, जिसमें 2025 में $2.3 अरब डॉलर FDI शामिल है।
भारत-UAE CEPA का व्यापार पर क्या असर पड़ा है?
दुबई चैंबर्स के अध्यक्ष मोहम्मद अली राशिद लूता के अनुसार, भारत-UAE CEPA ने व्यापारिक बाधाएँ कम करने, बाज़ार पहुंच बेहतर बनाने और नए विकास अवसर खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस समझौते ने दोनों देशों के व्यवसायों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।
भारतीय कंपनियाँ दुबई को अपना केंद्र क्यों चुन रही हैं?
विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा, मध्य पूर्व और अफ्रीका के बाज़ारों तक आसान पहुंच, प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल और CEPA के तहत व्यापार सुविधाएँ इसकी प्रमुख वजहें हैं। इसके अलावा, एजेंटिक AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे नए क्षेत्रों में भी दुबई-भारत सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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