28 जुलाई 2026
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भारत का रिकॉर्ड $863.1 अरब निर्यात: FTA ने खोले नए बाज़ार, UAE-ऑस्ट्रेलिया-ओमान सौदों से बड़ा फायदा

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भारत का रिकॉर्ड $863.1 अरब निर्यात: FTA ने खोले नए बाज़ार, UAE-ऑस्ट्रेलिया-ओमान सौदों से बड़ा फायदा

सारांश

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का $863.1 अरब का रिकॉर्ड निर्यात महज़ एक संख्या नहीं — यह FTA कूटनीति का ज़मीनी नतीजा है। UAE, ऑस्ट्रेलिया, ओमान और EFTA के समझौतों ने सैकड़ों नई टैरिफ लाइनें खोलीं और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को वैश्विक बाज़ार दिलाया।

मुख्य बातें

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में $863.1 अरब का सर्वकालिक सर्वाधिक निर्यात दर्ज किया — माल निर्यात $441.8 अरब और सेवा निर्यात $421.3 अरब ।
UAE CEPA ( 1 मई 2022 से लागू) के तहत 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी; टैरिफ लाइनें 7,546 से बढ़कर 8,053 , निर्यात $37.3 अरब ।
ऑस्ट्रेलिया ECTA के बाद औसत वार्षिक सर्टिफिकेट 1,482 से बढ़कर 45,527 ; कुल निर्यात $7.2 अरब ।
ओमान CEPA ( 1 जून 2026 ) के बाद जून 2026 में निर्यात $622.8 मिलियन — जून 2025 की तुलना में 189.6% उछाल।
EFTA-TEPA ( अक्टूबर 2025 ) के तहत 7,885 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी; भारत के 99.6% निर्यात को रियायत।
हाल के FTA में टेक्सटाइल और चमड़ा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज किया है — और इस ऐतिहासिक उपलब्धि में मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) की निर्णायक भूमिका रही है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में लिखित उत्तर के ज़रिए यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि FTA ने भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाज़ारों तक व्यापक पहुँच दिलाई, निर्यात-टोकरी में विविधता लाई और श्रम-प्रधान उद्योगों को नई ऊर्जा दी।

निर्यात का पूरा ब्यौरा

कुल 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में मर्चेंडाइज (माल) निर्यात 441.8 अरब डॉलर और सेवा निर्यात 421.3 अरब डॉलर रहा। मंत्री प्रसाद के अनुसार, वस्तु और सेवा निर्यात — दोनों ने मिलकर इस रिकॉर्ड को संभव बनाया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार पर भू-राजनीतिक दबाव और अमेरिकी टैरिफ नीतियों का साया मंडरा रहा है।

UAE और ऑस्ट्रेलिया: FTA का ज़मीनी असर

भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA), जो 1 मई 2022 से लागू है, के तहत अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं। UAE को निर्यात होने वाली HS 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के 7,546 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 8,053 हो गई — यानी 507 नई टैरिफ लाइनें (6.7%) जुड़ीं। इन लाइनों के तहत 37.3 अरब डॉलर का निर्यात हुआ।

भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के तहत 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी हो चुके हैं। समझौते से पहले वित्त वर्ष 2020-21 में मात्र 1,482 सर्टिफिकेट जारी हुए थे, जबकि ECTA लागू होने के बाद हर साल औसतन 45,527 सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया को निर्यात टैरिफ लाइनें 5,396 से बढ़कर 5,668 हो गईं और कुल निर्यात 7.2 अरब डॉलर रहा।

ओमान और मॉरीशस: नए समझौतों से उछाल

भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 1 जून 2026 से लागू हुआ है और इसके तहत मूल्य के आधार पर भारत के 99.38% निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुँच मिली है, जो ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों को कवर करती है। समझौते के बाद से 783 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी हुए हैं। ओमान को निर्यात टैरिफ लाइनें मई 2026 के 2,879 से बढ़कर जून 2026 में 3,371 हो गईं। जून 2026 में इन लाइनों के तहत 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ — मई 2026 के 402.7 मिलियन डॉलर की तुलना में 54.7% और जून 2025 के 215.1 मिलियन डॉलर की तुलना में 189.6% अधिक।

भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (CECPA) के तहत 1,956 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन का उपयोग हुआ। मॉरीशस को निर्यात टैरिफ लाइनें वित्त वर्ष 2021-22 के 3,593 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 4,345 हो गईं — 752 नई लाइनें (20.9%) जुड़ीं। इन लाइनों के तहत करीब 473 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ।

EFTA समझौते से भी मज़बूत हुई स्थिति

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA)-TEPA के तहत भारत को 92.2% टैरिफ लाइनों पर रियायत मिली है, जो भारत के 99.6% निर्यात को कवर करती है। अक्टूबर 2025 से लागू इस समझौते के बाद अब तक 7,885 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी हो चुके हैं।

श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता

मंत्री जितिन प्रसाद ने रेखांकित किया कि हाल के FTA में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष तरजीह दी गई है। UAE, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूज़ीलैंड और EFTA के साथ हुए समझौतों ने भारतीय उत्पादों को बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराया है। साथ ही, संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपनाई गई है। गौरतलब है कि सरकार 2021 के बाद लागू हुए समझौतों के तहत शुल्क रियायतों के उपयोग की निगरानी सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन और साझेदार देशों के व्यापार आँकड़ों के विश्लेषण के ज़रिए करती है। आने वाले वर्षों में भारत-ब्रिटेन FTA और अन्य प्रस्तावित समझौतों के लागू होने से यह आँकड़ा और ऊपर जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि FTA से मिली टैरिफ रियायतों का लाभ किस हद तक छोटे और मझोले निर्यातकों तक पहुँचा — सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन की संख्या उपयोग का संकेत देती है, मूल्य-संवर्धन का नहीं। ओमान CEPA के बाद एक महीने में 189.6% की उछाल चमकदार है, पर इतने छोटे बेस पर प्रतिशत वृद्धि भ्रामक हो सकती है। आलोचकों का कहना है कि जब तक घरेलू विनिर्माण क्षमता और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढाँचा नहीं सुधरता, टैरिफ रियायतें केवल मध्यस्थ व्यापार को प्रोत्साहित करती हैं — भारतीय मूल्य-शृंखला को नहीं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का वित्त वर्ष 2025-26 में कितना निर्यात हुआ और यह रिकॉर्ड क्यों है?
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में $863.1 अरब का निर्यात किया, जो देश का अब तक का सर्वाधिक है। इसमें माल निर्यात $441.8 अरब और सेवा निर्यात $421.3 अरब शामिल हैं — दोनों ने मिलकर यह ऐतिहासिक आँकड़ा बनाया।
भारत-UAE CEPA से निर्यात को कितना फायदा हुआ?
1 मई 2022 से लागू भारत-UAE CEPA के तहत अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी हुए हैं। UAE को निर्यात टैरिफ लाइनें 7,546 से बढ़कर 8,053 हो गईं और इन लाइनों के तहत $37.3 अरब का निर्यात हुआ।
भारत-ओमान CEPA क्या है और इससे निर्यात पर क्या असर पड़ा?
भारत-ओमान CEPA 1 जून 2026 से लागू हुआ है, जिसके तहत मूल्य के आधार पर भारत के 99.38% निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुँच मिली है। जून 2026 में ओमान को $622.8 मिलियन का निर्यात हुआ, जो जून 2025 की तुलना में 189.6% अधिक है।
EFTA-TEPA समझौते से भारतीय निर्यातकों को क्या लाभ मिला?
अक्टूबर 2025 से लागू EFTA-TEPA के तहत भारत को 92.2% टैरिफ लाइनों पर रियायत मिली है, जो भारत के 99.6% निर्यात को कवर करती है। अब तक 7,885 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी हो चुके हैं।
FTA में श्रम-प्रधान क्षेत्रों को क्यों प्राथमिकता दी गई है?
वाणिज्य राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के अनुसार, हाल के FTA में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष तरजीह दी गई है ताकि रोज़गार सृजन और निर्यात विविधता एक साथ सुनिश्चित हो। साथ ही, संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए संतुलित रणनीति अपनाई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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