18 अगस्त 2026
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भारत के FTA साझेदार देशों को निर्यात में उछाल: UAE को $37.35 अरब, ऑस्ट्रेलिया को $7.28 अरब

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भारत के FTA साझेदार देशों को निर्यात में उछाल: UAE को $37.35 अरब, ऑस्ट्रेलिया को $7.28 अरब

सारांश

भारत के हालिया मुक्त व्यापार समझौते अब काग़ज़ से ज़मीन पर उतर रहे हैं। UAE को $37.35 अरब और ऑस्ट्रेलिया को $7.28 अरब का निर्यात, EFTA-TEPA के तहत 7,885 और ओमान CEPA के तहत 783 मूल प्रमाणपत्र — ये आँकड़े बताते हैं कि भारतीय कंपनियाँ शुल्क रियायतों का उपयोग तेज़ी से बढ़ा रही हैं।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात $863.1 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर, माल निर्यात $441.8 अरब ।
अप्रैल-जून 2026 में संयुक्त निर्यात $232.73 अरब रहने का अनुमान — पिछले वर्ष की तुलना में 11.37% अधिक।
UAE को निर्यात $37.35 अरब से अधिक; ऑस्ट्रेलिया को $7.28 अरब से अधिक।
EFTA-TEPA (अक्टूबर 2025 से लागू) के तहत 7,885 और ओमान CEPA (जून 2026 से लागू) के तहत 783 मूल प्रमाणपत्र जारी।
सरकार ने डिजिटल COO प्रक्रिया सरल बनाई; SME को भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा का अवसर।

भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) अब ठोस निर्यात परिणामों में तब्दील हो रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, हालिया FTA साझेदार देशों के साथ भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है — शुल्क रियायतों का उपयोग बढ़ा है, उत्पादों की विविधता विस्तृत हुई है, और छोटे-मझोले उद्यम भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में पाँव जमा रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात $863.1 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा, जिसमें $441.8 अरब का माल निर्यात शामिल था।

मुख्य निर्यात आँकड़े

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ऑस्ट्रेलिया इस सफलता के दो प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, UAE को भारत का निर्यात $37.35 अरब से अधिक पहुँच चुका है, जबकि ऑस्ट्रेलिया को निर्यात $7.28 अरब के स्तर को पार कर गया है। चालू वित्त वर्ष में भी यह गति बरकरार है — अप्रैल-जून 2026 के दौरान संयुक्त निर्यात $232.73 अरब रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 11.37 प्रतिशत अधिक है।

प्रमाणपत्र उपयोग में वृद्धि

किसी FTA का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब निर्यातक प्रेफरेंशियल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (COO) के ज़रिये यह प्रमाणित करें कि उनके उत्पाद समझौते के 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' को पूरा करते हैं। इस दस्तावेज़ के आधार पर आयातक देश कम या शून्य सीमा शुल्क लागू करता है। सरकार के अनुसार, विभिन्न FTA के तहत COO जारी करने की संख्या लगातार बढ़ रही है।

UAE व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) और ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ECTA) — दोनों वर्ष 2022 से लागू हैं — के तहत बड़ी संख्या में मूल प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। नए समझौतों में, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता (EFTA-TEPA) के अक्टूबर 2025 में लागू होने के बाद 7,885 COO जारी हुए। ओमान CEPA के जून 2026 में लागू होने के महज़ कुछ हफ्तों में 783 COO जारी हो चुके हैं।

सरकार की पहल और SME को लाभ

सरकार का कहना है कि प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और डिजिटल सुविधाएँ उपलब्ध कराकर COO जारी करने की प्रक्रिया को तेज़ और सुलभ बनाया गया है। इससे न केवल बड़े निगमों को, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) को भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा का मौका मिल रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद भारत अपनी निर्यात विविधता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत फिलहाल यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK) और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भी FTA वार्ता में है। मौजूदा समझौतों की शुरुआती सफलता इन आगामी वार्ताओं के लिए सौदेबाज़ी की स्थिति को मज़बूत करती है। COO उपयोग के बढ़ते आँकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय उद्योग जगत FTA के अवसरों को पहले से कहीं अधिक गंभीरता से ले रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह वृद्धि FTA की वजह से है या वैश्विक माँग और रुपये की चाल जैसे बाहरी कारकों से। UAE और ऑस्ट्रेलिया के साथ निर्यात बढ़ा है, पर यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें शुल्क रियायत का योगदान कितना है और पहले से चले आ रहे व्यापारिक रिश्तों का कितना। EU और UK के साथ FTA वार्ता अभी अधूरी है — जो भारत के सबसे बड़े संभावित बाज़ार हैं। तब तक, मौजूदा सफलता की कहानी असली क्षमता का केवल एक अंश है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) निर्यात को कैसे बढ़ा रहे हैं?
FTA के तहत भारतीय उत्पादों को साझेदार देशों में कम या शून्य सीमा शुल्क पर प्रवेश मिलता है, जिससे वे प्रतिस्पर्धी रूप से सस्ते हो जाते हैं। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, UAE और ऑस्ट्रेलिया जैसे FTA साझेदारों को निर्यात में स्पष्ट वृद्धि दर्ज हुई है और प्रेफरेंशियल COO का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात $863.1 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा, जिसमें $441.8 अरब का माल निर्यात शामिल था। अप्रैल-जून 2026 में संयुक्त निर्यात $232.73 अरब रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 11.37% अधिक है।
प्रेफरेंशियल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (COO) क्या होता है और यह क्यों ज़रूरी है?
COO एक सरकारी दस्तावेज़ है जो प्रमाणित करता है कि निर्यातित उत्पाद FTA के 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' को पूरा करता है। इसके आधार पर आयातक देश उस उत्पाद पर कम या शून्य सीमा शुल्क लगाता है, जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रत्यक्ष लागत लाभ मिलता है।
EFTA-TEPA और ओमान CEPA के तहत कितने मूल प्रमाणपत्र जारी हुए?
अक्टूबर 2025 में लागू हुए EFTA-TEPA के तहत अब तक 7,885 COO जारी किए गए हैं। जून 2026 में लागू हुए ओमान CEPA के तहत अल्प समय में ही 783 COO जारी हो चुके हैं, जो नए समझौतों के प्रति निर्यातकों की त्वरित प्रतिक्रिया दर्शाता है।
क्या भारत के FTA का लाभ छोटे और मझोले उद्यमों (SME) को भी मिल रहा है?
सरकार का कहना है कि डिजिटल COO प्रक्रिया को सरल बनाने से SME के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में प्रवेश आसान हुआ है। हालाँकि, SME की हिस्सेदारी के अलग आँकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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