पीयूष गोयल की अहम बैठक: भारतीय निर्यातकों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने पर मंथन, FY26 में रिकॉर्ड $863 अरब निर्यात

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पीयूष गोयल की अहम बैठक: भारतीय निर्यातकों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने पर मंथन, FY26 में रिकॉर्ड $863 अरब निर्यात

सारांश

अमेरिकी टैरिफ विवाद और मध्य पूर्व संघर्ष के बीच भारत का निर्यात रिकॉर्ड $863 अरब पर पहुंचा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने DOC और DPIIT के साथ बैठक में वैश्विक पहुंच और नए बाज़ारों में प्रवेश की रणनीति पर मंथन किया — यह संकेत है कि सरकार निर्यात नीति को और धार देने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 7 मई 2026 को DOC और DPIIT के अधिकारियों के साथ निर्यात विस्तार पर समीक्षा बैठक की।
FY 2025-26 में भारत का कुल माल और सेवाओं का निर्यात 4.6% बढ़कर रिकॉर्ड $863.11 अरब डॉलर पर पहुंचा।
सेवा निर्यात 8.71% की मज़बूत वृद्धि के साथ $421.32 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर।
माल निर्यात 0.93% बढ़कर $441.78 अरब डॉलर रहा।
1–21 अप्रैल 2026 के बीच निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 20% से अधिक वृद्धि; पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक सामान प्रमुख।
Apple जैसी कंपनियों के भारत में विनिर्माण के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में तेज़ उछाल।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार, 7 मई 2026 को वाणिज्य विभाग (DOC) और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में भारतीय व्यवसायों की वैश्विक पहुंच विस्तार, निर्यात प्रोत्साहन और नए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में प्रवेश की रणनीतियों पर केंद्रित विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल माल और सेवाओं का निर्यात रिकॉर्ड 863.11 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।

बैठक में क्या हुआ

मंत्री गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि चर्चा मुख्यतः तीन बिंदुओं पर केंद्रित रही — निर्यात और निवेश को प्रोत्साहन देना, इच्छुक निर्यातकों के लिए नए अवसर सृजित करना और देश भर के उद्योगों की वैश्विक भागीदारी बढ़ाना। उन्होंने कहा कि घरेलू निर्यातकों में पश्चिम एशिया के संघर्ष के बावजूद जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

निर्यात के ताज़ा आंकड़े

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ विवाद और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल माल और सेवाओं के निर्यात में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के 825.26 अरब डॉलर से बढ़कर रिकॉर्ड 863.11 अरब डॉलर पर पहुंच गया। माल निर्यात 0.93 प्रतिशत बढ़कर 441.78 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 437.70 अरब डॉलर था।

सेवा निर्यात ने और मज़बूत प्रदर्शन किया — इसमें 8.71 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 421.32 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा, जो पिछले वित्त वर्ष के 387.55 अरब डॉलर से काफी अधिक है। यह वृद्धि भारत की आईटी सेवाओं, व्यावसायिक समाधानों और पेशेवर विशेषज्ञता की निरंतर वैश्विक माँग को रेखांकित करती है।

अप्रैल में निर्यात की रफ्तार

मध्य पूर्व संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बावजूद, 1 से 21 अप्रैल 2026 के बीच कुल निर्यात में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक सामान निर्यात में सबसे उल्लेखनीय वृद्धि के क्षेत्र रहे।

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में उभरती ताकत

गौरतलब है कि Apple जैसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा भारत में विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित किए जाने के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक सामानों का एक प्रमुख निर्यातक बनकर उभरा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में पुनर्गठित हो रही हैं, जिससे भारत को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

आगे की राह

मंत्रालय स्तर पर हो रही यह समीक्षा संकेत देती है कि सरकार निर्यात प्रोत्साहन नीतियों को और धार देने की तैयारी में है। विशेषज्ञों के अनुसार, सेवा निर्यात की मज़बूत वृद्धि और इलेक्ट्रॉनिक्स में उभरती क्षमता भारत के लिए अगले दशक में वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का सुनहरा अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी परतें खोलने पर तस्वीर अधिक जटिल दिखती है — माल निर्यात में महज़ 0.93% की वृद्धि यह बताती है कि असली रफ्तार IT और सेवा क्षेत्र से आ रही है, न कि विनिर्माण से। यह वही विरोधाभास है जिसे सरकार PLI जैसी योजनाओं से सुलझाने की कोशिश कर रही है, पर नतीजे अभी अपेक्षाओं से पीछे हैं। Apple का भारत में विनिर्माण एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन एक कंपनी से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का ढाँचा नहीं बदलता। जब तक नीतिगत समीक्षाएँ ठोस क्रियान्वयन रोडमैप में नहीं बदलतीं, ये बैठकें महज़ आश्वासन बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल की 7 मई 2026 की बैठक में क्या चर्चा हुई?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने DOC और DPIIT अधिकारियों के साथ भारतीय व्यवसायों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने, निर्यात प्रोत्साहन को मज़बूत करने और नए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में प्रवेश की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। इच्छुक निर्यातकों के लिए नए अवसर सृजित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
FY 2025-26 में भारत का कुल निर्यात कितना रहा?
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, FY 2025-26 में भारत का कुल माल और सेवाओं का निर्यात 4.6% बढ़कर रिकॉर्ड $863.11 अरब डॉलर पर पहुंचा, जो पिछले वित्त वर्ष के $825.26 अरब डॉलर से अधिक है।
भारत के सेवा निर्यात में कितनी वृद्धि हुई?
FY 2025-26 में सेवा निर्यात 8.71% बढ़कर $421.32 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा, जो पिछले वर्ष के $387.55 अरब डॉलर से काफी अधिक है। यह वृद्धि मुख्यतः भारत की आईटी सेवाओं और पेशेवर विशेषज्ञता की वैश्विक माँग से प्रेरित है।
अप्रैल 2026 में भारत के निर्यात का प्रदर्शन कैसा रहा?
1 से 21 अप्रैल 2026 के बीच कुल निर्यात में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 20% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक सामान इस अवधि के प्रमुख निर्यात क्षेत्र रहे।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में कैसे आगे बढ़ रहा है?
Apple जैसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा भारत में विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित किए जाने के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक सामानों का एक प्रमुख निर्यातक बनकर उभरा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के चीन-निर्भरता से दूर होने की प्रवृत्ति भारत के लिए दीर्घकालिक अवसर पैदा कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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