भारत-मिस्र व्यापार 2030 तक $12 अरब के लक्ष्य की ओर, मुंबई में 'डूइंग बिजनेस विद इजिप्ट' सम्मेलन

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भारत-मिस्र व्यापार 2030 तक $12 अरब के लक्ष्य की ओर, मुंबई में 'डूइंग बिजनेस विद इजिप्ट' सम्मेलन

सारांश

₹5 अरब डॉलर से ₹12 अरब डॉलर — यह सिर्फ एक व्यापारिक लक्ष्य नहीं, बल्कि भारत की अफ्रीका-मध्य पूर्व रणनीति का अहम पड़ाव है। मुंबई में हुई इस बैठक ने साफ़ कर दिया कि सूएज नहर आर्थिक क्षेत्र भारतीय कंपनियों के लिए अगला बड़ा निवेश गंतव्य बन सकता है।

मुख्य बातें

मुंबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में 7 मई 2026 को 'डूइंग बिजनेस विद इजिप्ट' बिजनेस डेलिगेशन मीटिंग आयोजित हुई।
भारत और मिस्र का वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 5 अरब डॉलर ; 2030 तक 12 अरब डॉलर का लक्ष्य।
जून 2023 में रणनीतिक साझेदारी समझौता और अक्टूबर 2025 में नई दिल्ली में रणनीतिक संवाद आयोजित।
सूएज नहर आर्थिक क्षेत्र को भारतीय निवेश के लिए प्रमुख अवसर के रूप में चिह्नित किया गया।
फार्मास्युटिकल, केमिकल, टेक्सटाइल, ऊर्जा और पर्यटन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
वीज़ा प्रक्रिया और लॉजिस्टिक सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

मुंबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में 7 मई 2026 को आयोजित 'डूइंग बिजनेस विद इजिप्ट' बिजनेस डेलिगेशन मीटिंग में भारत और मिस्र (इजिप्ट) के प्रतिनिधियों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 12 अरब डॉलर तक पहुँचाने के साझा लक्ष्य को दोहराया। वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग 5 अरब डॉलर का सालाना व्यापार होता है, और इस आयोजन ने ऊर्जा, फार्मास्युटिकल, पर्यटन, कृषि और ऑटोमोबाइल सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने का मंच तैयार किया।

मुख्य घटनाक्रम

मुंबई स्थित मिस्र की महावाणिज्य दूत डाहलिया मोहम्मद नाजिह मोहम्मद तवाकोल ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि भारत और इजिप्ट के बीच ऐतिहासिक और सुदृढ़ द्विपक्षीय संबंध रहे हैं। उन्होंने एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन डॉ. विजय कलंत्री का इस आयोजन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देगा।

गौरतलब है कि जून 2023 में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी समझौता संपन्न हुआ था, और इसके बाद अक्टूबर 2025 में नई दिल्ली में रणनीतिक संवाद भी आयोजित किया गया था। इन पहलों की कड़ी में यह मुंबई सम्मेलन अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

महावाणिज्य दूत तवाकोल ने विशेष रूप से सूएज नहर आर्थिक क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है और भारतीय कंपनियों के लिए निवेश एवं व्यापार के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि मिस्र से स्ट्रॉबेरी, अंगूर, उर्वरक और इलेक्ट्रॉनिक वायर जैसे उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

डॉ. विजय कलंत्री ने कहा कि फार्मास्युटिकल, केमिकल और टेक्सटाइल क्षेत्रों में व्यापार बढ़ाने की जबरदस्त संभावनाएँ हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय कंपनियाँ पहले से मिस्र में निवेश कर रही हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और सुदृढ़ होंगे।

लॉजिस्टिक चुनौतियाँ और समाधान

कलंत्री ने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच व्यापार में कोई बड़ी बाधा तो नहीं है, लेकिन कुछ लॉजिस्टिक चुनौतियाँ अवश्य हैं जिन्हें तेज़ी से हल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वीज़ा प्रक्रिया, माल ढुलाई और लोगों की आवाजाही को आसान बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

तवाकोल और कलंत्री दोनों ने पर्यटन को द्विपक्षीय संबंधों का अहम स्तंभ बताया। कलंत्री के अनुसार,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मौजूदा $5 अरब से यह छलाँग तभी संभव है जब दोनों पक्ष लॉजिस्टिक बाधाओं को वास्तविक रूप से दूर करें। सूएज नहर आर्थिक क्षेत्र में भारतीय निवेश की संभावना रोचक है, लेकिन अब तक ठोस प्रतिबद्धताओं का अभाव दिखता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पश्चिम एशिया और अफ्रीका में अपनी आर्थिक उपस्थिति को विविध बना रहा है — मिस्र इस रणनीति का स्वाभाविक केंद्र बिंदु हो सकता है, बशर्ते घोषणाएँ ज़मीनी निवेश में तब्दील हों।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और मिस्र के बीच 2030 तक $12 अरब व्यापार का लक्ष्य क्या है?
भारत और मिस्र ने 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा लगभग $5 अरब से बढ़ाकर $12 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य जून 2023 की रणनीतिक साझेदारी और अक्टूबर 2025 के नई दिल्ली संवाद के बाद मुंबई सम्मेलन में दोहराया गया।
'डूइंग बिजनेस विद इजिप्ट' कार्यक्रम कहाँ और कब हुआ?
यह कार्यक्रम 7 मई 2026 को मुंबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित हुआ। इसमें दोनों देशों के व्यापारिक प्रतिनिधियों ने व्यापार, निवेश, पर्यटन, ऊर्जा और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की।
सूएज नहर आर्थिक क्षेत्र भारतीय कंपनियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
सूएज नहर आर्थिक क्षेत्र वैश्विक व्यापार का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है और भारतीय कंपनियों के लिए निवेश एवं निर्यात के कई अवसर प्रदान करता है। मिस्र की महावाणिज्य दूत के अनुसार, यह क्षेत्र भारत-मिस्र आर्थिक सहयोग का एक अहम स्तंभ बन सकता है।
भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी कब और कैसे शुरू हुई?
जून 2023 में दोनों देशों के बीच औपचारिक रणनीतिक साझेदारी समझौता हुआ था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में नई दिल्ली में रणनीतिक संवाद आयोजित किया गया, जिससे दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ हुए हैं।
भारत और मिस्र के बीच व्यापार में कौन-से क्षेत्र सबसे अधिक संभावनाशील हैं?
फार्मास्युटिकल, केमिकल, टेक्सटाइल, ऊर्जा, कृषि और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में सहयोग की सबसे अधिक संभावनाएँ बताई गई हैं। मिस्र से स्ट्रॉबेरी, अंगूर, उर्वरक और इलेक्ट्रॉनिक वायर के निर्यात को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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