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चीन, तिब्बत और नेपाल में घंटों के भीतर 4 भूकंप: सबसे तेज 4.5 तीव्रता चीन में दर्ज

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चीन, तिब्बत और नेपाल में घंटों के भीतर 4 भूकंप: सबसे तेज 4.5 तीव्रता चीन में दर्ज

सारांश

31 जुलाई की रात से सुबह के बीच चीन, तिब्बत और नेपाल में मात्र ढाई घंटों में चार भूकंप आए — सबसे तेज 4.5 तीव्रता का चीन में। NCS ने सभी झटके दर्ज किए; कोई जनहानि या सुनामी चेतावनी नहीं। हिमालयी टेक्टोनिक सक्रियता की यह ताज़ा कड़ी है।

मुख्य बातें

31 जुलाई 2026 की रात 11:25 IST से सुबह 1:44 IST के बीच चीन, तिब्बत और नेपाल में चार भूकंप दर्ज।
सबसे तेज भूकंप 4.5 तीव्रता का चीन में, गहराई मात्र 10 किलोमीटर ।
तिब्बत में 4.3 (गहराई 130 किमी) और 4.2 (गहराई 90 किमी); नेपाल में 3.4 (गहराई 15 किमी) तीव्रता के झटके।
अधिकारियों ने कोई जनहानि, सुनामी चेतावनी या आपातकालीन परामर्श जारी नहीं किया।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने सभी झटके दर्ज किए और नागरिकों को आधिकारिक भूकंप ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 की सुबह चीन, तिब्बत और नेपाल में मात्र कुछ घंटों के भीतर चार अलग-अलग भूकंप दर्ज किए गए। इनमें सबसे तीव्र झटका रिक्टर स्केल पर 4.5 तीव्रता का रहा, जो चीन में महसूस किया गया। अधिकारियों ने अब तक किसी जनहानि या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की है।

मुख्य भूकंपीय घटनाक्रम

NCS के अनुसार, पहला झटका 30 जुलाई 2026 की रात 11 बजकर 25 मिनट 39 सेकंड IST पर तिब्बत में आया, जिसकी तीव्रता 4.3 और गहराई 130 किलोमीटर थी। इसके लगभग डेढ़ घंटे बाद, 31 जुलाई को रात 12 बजकर 50 मिनट 07 सेकंड IST पर तिब्बत में ही 4.2 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया, जिसकी गहराई 90 किलोमीटर रही।

इसके बाद 1 बजकर 18 मिनट 42 सेकंड IST पर नेपाल में 3.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी गहराई 15 किलोमीटर थी। श्रृंखला का सबसे तेज भूकंप 1 बजकर 44 मिनट 06 सेकंड IST पर चीन में आया — तीव्रता 4.5, गहराई मात्र 10 किलोमीटर

भौगोलिक विस्तार और गहराई का अंतर

इन चारों झटकों की गहराई 10 किलोमीटर से 130 किलोमीटर के बीच रही, जो हिमालयी क्षेत्र की जटिल भूगर्भीय संरचना को दर्शाती है। उथले भूकंप (10-15 किमी) आमतौर पर अधिक तीव्र कंपन उत्पन्न करते हैं, जबकि गहरे भूकंप (90-130 किमी) का प्रभाव व्यापक क्षेत्र में फैलता है।

गौरतलब है कि हिमालय क्षेत्र — जिसमें नेपाल, तिब्बत और पश्चिमी चीन के हिस्से शामिल हैं — भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के निरंतर टकराव के कारण विश्व के सर्वाधिक भूकंप-सक्रिय क्षेत्रों में गिना जाता है। यह टकराव प्रतिवर्ष जारी रहता है और इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि को स्थायी बनाता है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

NCS ने बताया कि इन झटकों के बाद न तो कोई सुनामी चेतावनी जारी की गई और न ही कोई आपातकालीन परामर्श। चीन, तिब्बत और नेपाल के संबंधित अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह तक कोई आपातकालीन अपडेट सार्वजनिक नहीं किया था।

NCS ने नागरिकों को भूकंप संबंधी वास्तविक समय की जानकारी के लिए आधिकारिक भूकंप ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी है।

क्या होगा आगे

भूवैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रकार की क्रमिक भूकंपीय गतिविधि हिमालयी क्षेत्र में असामान्य नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग गहराई पर आने वाले ये झटके अक्सर टेक्टोनिक तनाव के क्रमिक निर्मोचन (release) का संकेत होते हैं। NCS इस क्षेत्र की निगरानी जारी रखे हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इस क्षेत्र का भूगर्भीय स्वभाव है। NCS की त्वरित एक्स-पोस्ट सूचनाएँ सराहनीय हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सीमावर्ती भारतीय राज्यों — उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल — में आपदा-पूर्व तैयारी उस गति से हो रही है जो इस क्षेत्र की भूकंपीय आवृत्ति माँगती है। 2015 का नेपाल भूकंप और 2023 का जोशीमठ संकट इसी उपेक्षा के परिणाम थे।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

31 जुलाई 2026 को चीन, तिब्बत और नेपाल में कितने भूकंप आए?
NCS के अनुसार, 30 जुलाई की रात 11:25 IST से 31 जुलाई की सुबह 1:44 IST के बीच कुल चार भूकंप दर्ज किए गए — दो तिब्बत में, एक नेपाल में और एक चीन में।
इन भूकंपों में सबसे तेज झटका कहाँ और कितनी तीव्रता का था?
सबसे तेज भूकंप चीन में 4.5 तीव्रता का रहा, जो 31 जुलाई को सुबह 1:44 IST पर 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया।
क्या इन भूकंपों से कोई जनहानि या नुकसान हुआ?
अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह तक किसी जनहानि या बड़े नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। न ही कोई सुनामी चेतावनी या आपातकालीन परामर्श जारी किया गया।
हिमालय क्षेत्र में इतने भूकंप क्यों आते हैं?
हिमालय क्षेत्र भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के निरंतर टकराव के कारण विश्व के सर्वाधिक भूकंप-सक्रिय क्षेत्रों में से एक है। यह टकराव अलग-अलग गहराई पर भूकंपीय तनाव उत्पन्न करता है, जिससे बार-बार झटके आते हैं।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) क्या है और यह कैसे जानकारी देता है?
NCS भारत सरकार की संस्था है जो देश और पड़ोसी क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी करती है। यह एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर रीयल-टाइम अपडेट साझा करती है और नागरिकों को आधिकारिक भूकंप ऐप के माध्यम से सूचित रहने की सलाह देती है।
राष्ट्र प्रेस
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