31 अगस्त 2026
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भागवत के न्यूयॉर्क बयान पर ओवैसी की प्रतिक्रिया से भड़की भाजपा, नेताओं ने कहा — 'बेतुकी बातों की आदत'

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भागवत के न्यूयॉर्क बयान पर ओवैसी की प्रतिक्रिया से भड़की भाजपा, नेताओं ने कहा — 'बेतुकी बातों की आदत'

सारांश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क बयान — 'मुसलमानों को बाहर चाहने वाला हिंदू नहीं' — पर ओवैसी ने संघ की नीयत पर सवाल उठाए। भाजपा ने तीखा पलटवार करते हुए ओवैसी को 'बेतुकी बातों का आदी' बताया। विवाद ने आरएसएस के स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका की पुरानी बहस को फिर से हवा दे दी।

मुख्य बातें

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा कि मुसलमानों को भारत से बाहर चाहने वाला व्यक्ति हिंदू नहीं रह सकता।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संघ की 'पुरानी चाल' बताया और आरएसएस पर स्वतंत्रता संग्राम में भाग न लेने का आरोप लगाया।
केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने ओवैसी के बयान को 'बेतुका' और 'गैर-गंभीर' बताया।
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन.
रामचंद्र राव ने कहा कि हेडगेवार स्वयं स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा थे।
भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि भागवत का यह बयान पहली बार नहीं, बल्कि विज्ञान भवन सहित कई मंचों पर दोहराया जा चुका है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा न्यूयॉर्क में दिए गए एक बयान पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की तीखी टिप्पणी के बाद 31 अगस्त को देशभर में राजनीतिक विवाद तेज हो गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने ओवैसी के बयान को 'बेतुका' और 'गैर-गंभीर' बताते हुए कड़ा पलटवार किया।

भागवत का मूल बयान और ओवैसी की प्रतिक्रिया

भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा था कि यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमानों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, तो वह व्यक्ति हिंदू कहलाने का अधिकारी नहीं है। उन्होंने इससे पहले विज्ञान भवन में भी इसी भावना को व्यक्त किया था।

ओवैसी ने इस बयान को संघ की 'पुरानी चाल' करार दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया था और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने महात्मा गांधी की हिंदू-मुस्लिम एकता की नीति से असहमति के चलते कांग्रेस छोड़ी थी।

भाजपा नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

रायपुर में केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने ओवैसी के बयान को गैर-गंभीर बताया। उन्होंने कहा, 'ओवैसी को किसी न किसी चीज पर कुछ न कुछ कहना होता है। न तो लोग और न ही मीडिया उन्हें गंभीरता से ले रहे हैं। वह बहुत ही बेतुकी बातें करते रहते हैं। चाहे मीडिया हो या देश के नागरिक, अब उनकी बात नहीं सुन रहे हैं।'

तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने ओवैसी के इतिहास-संबंधी दावों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'ओवैसी आरएसएस के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। आरएसएस के कई सदस्यों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था। हेडगेवार खुद इस आंदोलन का हिस्सा थे। वह कांग्रेस का हिस्सा थे क्योंकि उस समय कांग्रेस कोई राजनीतिक पार्टी नहीं थी।'

दिल्ली और हैदराबाद से भी पलटवार

नई दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि सरसंघचालक भागवत का बयान बहुत स्पष्ट और सकारात्मक है तथा यह पहली बार नहीं कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग हिंदू-मुस्लिम के बीच दरार चाहते हैं, उन्हें यह बयान 'चुभता' है। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मदनी और ओवैसी दोनों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे बयान देने की कोई जरूरत नहीं है।

हैदराबाद में भाजपा नेता टी. आर. श्रीनिवास ने कहा कि भारत का वैचारिक रुख 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'विविधता में एकता' पर आधारित रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी इस विचार को बार-बार दोहराया है।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर

यह ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय पहचान को लेकर बहस तेज है। गौरतलब है कि भागवत इससे पहले भी कई मंचों पर मुसलमानों को लेकर समावेशी बयान दे चुके हैं, जिन पर विपक्ष ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दी हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के विवाद वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं, जबकि भाजपा का तर्क है कि संघ की सोच को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना है, क्योंकि विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करने में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी हर बार यह उतनी ही तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। सवाल यह है कि क्या यह बहस वास्तव में विचारधारा की है, या दोनों पक्षों के लिए राजनीतिक ध्रुवीकरण का एक सुविधाजनक उपकरण बन चुकी है। ओवैसी के आरोप और भाजपा का पलटवार — दोनों अपने-अपने मतदाता आधार को संबोधित कर रहे हैं, न कि किसी वास्तविक संवाद को। इस चक्र में असली पीड़ित वह सार्वजनिक विमर्श है जो सांप्रदायिक सौहार्द की ज़मीन पर टिकी नीति-निर्माण की माँग करता है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में क्या कहा था?
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमानों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। यह बयान उन्होंने इससे पहले विज्ञान भवन में भी दिया था।
ओवैसी ने भागवत के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ओवैसी ने भागवत के बयान को संघ की 'पुरानी चाल' बताया और आरोप लगाया कि आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि संघ के संस्थापक हेडगेवार ने गांधी की हिंदू-मुस्लिम एकता की नीति से असहमति के कारण कांग्रेस छोड़ी थी।
भाजपा ने ओवैसी के बयान पर क्या कहा?
भाजपा के कई नेताओं ने ओवैसी के बयान को 'बेतुका' और 'गैर-गंभीर' बताया। केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि न मीडिया और न जनता ओवैसी को गंभीरता से लेती है, जबकि प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि जो लोग हिंदू-मुस्लिम तनाव चाहते हैं, उन्हें भागवत का बयान चुभता है।
क्या आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था?
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव के अनुसार, आरएसएस के कई सदस्यों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था और हेडगेवार स्वयं उस संघर्ष का हिस्सा थे। यह दावा ओवैसी के आरोपों के सीधे विरोध में है और इतिहासकारों के बीच यह विषय लंबे समय से विवादित रहा है।
इस विवाद का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह विवाद आरएसएस की विचारधारा, मुसलमानों के प्रति उसके रुख और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका जैसे संवेदनशील मुद्दों को फिर से केंद्र में ले आया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की बहसें विभिन्न दलों के मतदाता आधार को प्रभावित करती हैं और चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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