विजय देवरकोंडा भावुक: 'अर्जुन रेड्डी' के संघर्ष के दिन याद कर बोले — संदीप के लिए प्यार शब्दों में नहीं
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता विजय देवरकोंडा ने हाल ही में निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा के साथ अपने गहरे रिश्ते और फिल्म 'अर्जुन रेड्डी' के निर्माण के उन संघर्षपूर्ण दिनों को याद कर भावुक हो गए, जब दोनों के पास न पहचान थी, न पैसा और न ही कोई बड़ा सहारा। मुंबई में निर्देशक वेणु गोपाल रेड्डी की आगामी फिल्म 'रोमांचकम' के प्री-रिलीज इवेंट में पहुँचे विजय ने कहा कि संदीप के लिए उनके मन में जो प्यार है, उसे वे शब्दों में बयान नहीं कर सकते।
प्री-रिलीज इवेंट में छलका दर्द और प्यार
गौरतलब है कि 'रोमांचकम' को संदीप रेड्डी वांगा प्रस्तुत कर रहे हैं और यह फिल्म दुनियाभर के सिनेमाघरों में 3 सितंबर को रिलीज होने वाली है। इसी इवेंट में विजय से जब संदीप के साथ रिश्ते पर सवाल किया गया, तो उन्होंने खुलकर अपनी भावनाएँ साझा कीं। विजय ने कहा, 'संदीप के लिए मेरे मन में जो प्यार है, उसे मैं शब्दों में नहीं बता सकता। यह सिर्फ निर्देशक और अभिनेता का रिश्ता नहीं है। यह सिर्फ भाई का रिश्ता या दोस्ती भी नहीं है — यह कुछ और है।'
जब एक फिल्म पर लगा था सबकुछ दांव पर
विजय ने 'अर्जुन रेड्डी' के निर्माण काल को याद करते हुए बताया कि उस समय दोनों के पास न पर्याप्त धन था, न कोई प्रभाव और न ही दर्शकों के बीच कोई पहचान। उन्होंने कहा, 'उस वक्त हम दोनों साथ में जंग लड़ रहे थे। हमें नहीं पता था कि हम क्या कर रहे हैं। अगर फिल्म नहीं चलती तो हमारे लिए हालात बहुत मुश्किल हो सकते थे। हमारे कोई फैंस नहीं थे, क्योंकि तब तक फिल्म 'पेलीचूपुलु' रिलीज नहीं हुई थी।'
अभिनेता ने यह भी खुलासा किया कि फिल्म के निर्माताओं प्रणय और प्रभाकर ने 'अर्जुन रेड्डी' बनाने के लिए अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी। उन्होंने संदीप पर भरोसा करके पैसा लगाया था और संदीप ने भी विजय पर पूरा विश्वास जताया।
सफलता से नहीं, साझे पलों से है जुड़ाव
विजय ने स्पष्ट किया कि उनके लिए 'अर्जुन रेड्डी' की अहमियत उसकी व्यावसायिक सफलता से नहीं, बल्कि उस दौर में साथ गुज़ारे पलों से है। उन्होंने कहा, 'मुझे संदीप को सिर्फ इसलिए याद नहीं करता कि 'अर्जुन रेड्डी' सफल रही। मेरे लिए इस फिल्म से जुड़े असली मायने हमारे साथ बिताए हुए पल हैं। फिल्म बनाते समय हमने न सिर्फ काम किया, बल्कि अपनी जिंदगी, तनाव और मुश्किलें भी एक-दूसरे के साथ साझा कीं।'
विश्वास का वह बंधन जो आज भी अटूट है
विजय ने अपनी बात को और गहराई से रखते हुए कहा, 'उस फिल्म के साथ बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ था — एक परिवार की कमाई, भविष्य और बहुत सारी उम्मीदें। संदीप मेरे लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और मैं भी संदीप के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूँ।' यह रिश्ता महज़ फिल्मी सहयोग नहीं, बल्कि साझे संघर्ष की नींव पर खड़ी एक गहरी इंसानी दोस्ती है। आने वाले समय में यह जोड़ी फिर साथ काम करेगी या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।