उज्बेकिस्तान सम्मान पर ओवैसी के 'बाबर' वाले बयान पर भाजपा का तीखा पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान द्वारा अपना सर्वोच्च राजकीय सम्मान प्रदान किए जाने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने इसे भारत की कूटनीतिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बताया। वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा इस सम्मान को 'बाबर के देश से अवार्ड' कहे जाने पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
पुणे से सांसद किरीट सोमैया ने कहा, 'नरेंद्र मोदी ने हिंदुत्व को इतनी ऊंचाई पर पहुंचाया है कि पूरी दुनिया उनका सम्मान करती है।' रायपुर से राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को अब तक 36 से अधिक देशों के सर्वोच्च सम्मान मिल चुके हैं, जो वैश्विक मंच पर उनके कद को रेखांकित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि ओवैसी के बयान अक्सर देश के हितों के विरुद्ध रहे हैं।
पटना में बिहार सरकार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि दुनिया के सभी देश प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति से प्रभावित हैं और उनकी हर यात्रा में भारत का गौरव बढ़ता है।
ओवैसी के बयान पर सीधा पलटवार
भोपाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा, 'यह सम्मान केवल भाजपा के लिए नहीं, बल्कि हर भारतीय नागरिक के लिए गर्व की बात है।' भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने ओवैसी की टिप्पणी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चाहे राष्ट्रमंडल देश हों या इस्लामिक देश, सभी ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है — और यह भारत का सम्मान है, न कि किसी एक व्यक्ति का।
शिवसेना की तीखी टिप्पणी
मुंबई में शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने ओवैसी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'असदुद्दीन ओवैसी, आपको हर चीज में बाबर ही दिखता है — यही आपकी समस्या है। उज्बेकिस्तान प्रधानमंत्री का सम्मान करता है और आपको इससे आपत्ति होती है।' उन्होंने आगे कहा कि जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) राष्ट्रवाद और वसुधैव कुटुम्बकम की बात करता है, तब भी ओवैसी ऐतिहासिक विवादों की ओर लौट जाते हैं।
आम जनता और राजनीतिक असर
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब भारत की विदेश नीति को लेकर देश में व्यापक चर्चा चल रही है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी को अब तक कई देशों के सर्वोच्च नागरिक और राजकीय सम्मान मिल चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान घरेलू राजनीति में ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे राष्ट्रीय गौरव के प्रश्न के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
आगे क्या
ओवैसी की ओर से इन पलटवारों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि भाजपा इस मुद्दे को अपनी विदेश नीति की उपलब्धि के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।