30 अगस्त 2026
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उज्बेक राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने PM मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के वैश्विक उदय का श्रेय मोदी के नेतृत्व को

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उज्बेक राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने PM मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के वैश्विक उदय का श्रेय मोदी के नेतृत्व को

सारांश

ताशकंद में उज्बेक राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने PM मोदी को सर्वोच्च राज्य सम्मान दिया और भारत के वैश्विक उदय का श्रेय उनके नेतृत्व को दिया। दोनों देशों ने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' तक उन्नत किया और $1 अरब से $10 अरब व्यापार का लक्ष्य रखा।

मुख्य बातें

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने 30 अगस्त 2026 को ताशकंद में PM नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च राज्य सम्मान 'ओली दाराजली दोस्तलिक' से नवाज़ा।
यह PM मोदी को मिला 36वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान है; 'ओली दाराजली दोस्तलिक' का अर्थ है 'उच्च स्तरीय मित्रता'।
मिर्जियोयेव ने मोदी को 'बेहतरीन राजनेता' और 'बुद्धिमान राजनीतिज्ञ' बताते हुए भारत के वैश्विक उदय का श्रेय उनके नेतृत्व को दिया।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत किया।
मौजूदा $1 अरब के द्विपक्षीय व्यापार को पहले $5 अरब और फिर $10 अरब तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया।

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने 30 अगस्त 2026 को ताशकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान 'ओली दाराजली दोस्तलिक' से नवाज़ा और भारत की तेज़ रफ़्तार प्रगति तथा वैश्विक मंच पर बढ़ते कद का श्रेय सीधे तौर पर मोदी के नेतृत्व को दिया। उज्बेक भाषा में 'ओली दाराजली दोस्तलिक' का अर्थ 'उच्च स्तरीय मित्रता' होता है, और यह पीएम मोदी को मिला 36वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।

सम्मान समारोह और राष्ट्रपति के उद्गार

सम्मान प्रदान करते हुए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी को 'बेहतरीन राजनेता' और 'बुद्धिमान राजनीतिज्ञ' बताया। उन्होंने कहा, 'हम आपको न केवल एक बेहतरीन राजनेता और बुद्धिमान राजनीतिज्ञ के रूप में जानते हैं, बल्कि एक ऐसी हस्ती के रूप में भी जानते हैं जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान है।' उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में भारत का तेज़ी से विकास और अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बढ़ता प्रभाव सीधे तौर पर मोदी के नाम और नेतृत्व से जुड़ा है।

भाईचारे और सहयोग पर जोर

राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान हुई द्विपक्षीय वार्ता को 'बहुत सार्थक' बताया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री, मेरे प्यारे भाई, मैं आपके खुलेपन और भाईचारे के लिए आपका धन्यवाद करता हूँ। कल से हमने अपने सभी क्षेत्रों, ऐतिहासिक संबंधों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की है। ये बैठकें बहुत सार्थक रहीं... हम उज्बेकिस्तान के लिए आपकी ईमानदारी और स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए भी आपका धन्यवाद करना चाहते हैं।'

उन्होंने भारत सरकार के आधुनिकीकरण कार्यक्रमों और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा, 'देश के आधुनिकीकरण के लिए आपकी प्रभावी रणनीति और कार्यक्रमों की बदौलत, आज का भारत सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है। सच्चे भाइयों के तौर पर, हमें आपकी शानदार उपलब्धियों पर हमेशा बहुत खुशी होती है।'

'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का ऐतिहासिक दर्जा

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक परिणाम यह रहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत किया गया। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने इसे 'वास्तव में ऐतिहासिक' करार देते हुए कहा कि पीएम मोदी ने इस उपलब्धि को हासिल करने में 'अमूल्य व्यक्तिगत योगदान' दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत मध्य एशिया के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंध व्यापक बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

द्विपक्षीय व्यापार: $1 अरब से $10 अरब का लक्ष्य

आर्थिक मोर्चे पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने दोनों देशों के बीच मौजूदा $1 अरब के व्यापार कारोबार को 'महज़ एक शुरुआती बिंदु' बताया। उन्होंने कहा, 'हमारा लक्ष्य पहले पड़ाव के तौर पर $5 अरब तक पहुँचना है, और मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य में हम आसानी से $10 अरब का व्यापार कारोबार हासिल कर सकते हैं।' गौरतलब है कि भारत-उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई सूत्र सदियों पुराने हैं, और यह साझेदारी उन्हें आधुनिक आर्थिक ढाँचे में ढालने का प्रयास है।

आगे की राह

इस यात्रा के बाद भारत-उज्बेकिस्तान संबंध एक नए अध्याय में प्रवेश कर चुके हैं। 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में गहरे सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है। दोनों देशों के बीच आने वाले महीनों में उच्च-स्तरीय बैठकों और क्षेत्र-विशेष समझौतों की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का यह दर्जा ज़मीनी व्यापार और निवेश में कितना तब्दील होता है। $1 अरब से $10 अरब व्यापार का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सीधी भूमि-सीमा न होने की भौगोलिक चुनौती इसे जटिल बनाती है। मध्य एशिया में चीन और रूस की गहरी उपस्थिति के बीच भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है — पर इसे टिकाऊ बनाने के लिए कनेक्टिविटी और व्यापार-सुगमता पर ठोस काम ज़रूरी होगा।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ओली दाराजली दोस्तलिक' सम्मान क्या है और PM मोदी को यह क्यों दिया गया?
'ओली दाराजली दोस्तलिक' उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च राज्य सम्मान है, जिसका अर्थ 'उच्च स्तरीय मित्रता' है। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने यह पुरस्कार PM मोदी को भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को मज़बूत करने और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने में उनके योगदान के लिए दिया। यह PM मोदी को मिला 36वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।
भारत-उज्बेकिस्तान 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का क्या मतलब है?
इस दर्जे का अर्थ है कि दोनों देशों के संबंध अब व्यापार, रक्षा, शिक्षा, संस्कृति और कूटनीति जैसे कई क्षेत्रों में गहरे और संस्थागत सहयोग के स्तर पर पहुँच गए हैं। यह साधारण मित्रवत संबंधों से एक कदम आगे की औपचारिक प्रतिबद्धता है। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने इसे 'वास्तव में ऐतिहासिक' बताया।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार का लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार $1 अरब है। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने पहले चरण में इसे $5 अरब और दीर्घकालिक रूप से $10 अरब तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने $1 अरब के मौजूदा आँकड़े को 'महज़ एक शुरुआती बिंदु' बताया।
PM मोदी की ताशकंद यात्रा में और क्या अहम हुआ?
यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने ऐतिहासिक संबंधों, सहयोग के क्षेत्रों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने PM मोदी की भारत यात्रा के दौरान मिले स्नेह और गर्मजोशी के लिए भी धन्यवाद किया। यात्रा का सबसे बड़ा कूटनीतिक परिणाम संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा देना रहा।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक, भाषाई और व्यापारिक सूत्र सदियों पुराने हैं। आधुनिक कूटनीतिक संबंध 1991 में उज्बेकिस्तान की स्वतंत्रता के बाद स्थापित हुए। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा, शिक्षा और व्यापार में सहयोग बढ़ाया है, और यह 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' उसी क्रम में एक नया मील का पत्थर है।
राष्ट्र प्रेस
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