सेवाश्रय कैंप विवाद: मेडिकल इंटर्न से CID करेगी पूछताछ, दबाव या स्वेच्छा — जांच में होगा खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की अपराध जांच विभाग (CID) और राज्य स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम उन मेडिकल इंटर्न और छात्रों से पूछताछ करने की तैयारी में है, जिन्होंने डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी की पहल पर आयोजित मुफ्त 'सेवाश्रय' स्वास्थ्य शिविरों में भाग लिया था। जांच का केंद्रीय सवाल यह है कि इन छात्रों ने शिविर में अपनी इच्छा से हिस्सा लिया था या उन पर किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा राजनीतिक नेता की ओर से दबाव डाला गया था।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया था कि इन मुफ्त स्वास्थ्य शिविरों के संचालन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CID और पश्चिम बंगाल पुलिस दोनों को सौंपने का निर्णय लिया।
25 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री ने विधानसभा में उन मरीजों की तस्वीरें प्रस्तुत कीं, जिनके बारे में दावा किया गया कि शिविर में इलाज के बाद उनके हाथ या पैर काटने पड़े। उन्होंने एक कथित डॉक्टर का पत्र भी पढ़कर सुनाया, जिसमें पिछली सरकार के कार्यकाल में इन शिविरों के संचालन में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।
जांच का दायरा
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, जांच में यह पता लगाया जाएगा कि मेडिकल इंटर्न और छात्रों ने किसी योग्य और वरिष्ठ डॉक्टर की निगरानी में काम किया था या अकेले। इसके अलावा, यह भी जांचा जाएगा कि शिविर में इस्तेमाल की गई दवाइयां और मेडिकल उपकरण किस स्रोत से प्राप्त किए गए थे।
अधिकारी ने कहा, 'अगर यह साबित होता है कि इनमें से कुछ लोगों ने अपनी मर्ज़ी से इन हेल्थ कैंप में हिस्सा लिया था, तो राज्य का शिक्षा विभाग उन्हें चेतावनी दे सकता है। साथ ही, उनसे लिखित रूप में यह वादा भी लिया जा सकता है कि जब तक उन्हें योग्य डॉक्टर के रूप में लाइसेंस नहीं मिल जाता, तब तक वे भविष्य में किसी भी निजी हेल्थ कैंप में हिस्सा नहीं लेंगे।'
दबाव साबित होने पर कानूनी कार्रवाई
उसी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि मेडिकल इंटर्न और छात्रों पर किसी वरिष्ठ अधिकारी या राजनीतिक नेता की ओर से दबाव डाला गया था, तो मामला कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'अगर मेडिकल इंटर्न और छात्रों को किसी योग्य डॉक्टर की निगरानी के बिना अकेले ऑपरेशन करने के लिए मजबूर किया गया, तो यह चिकित्सा नैतिकता के खिलाफ एक गंभीर और खतरनाक मामला है। इन कैंपों के आयोजकों ने न सिर्फ मरीजों की जान से खिलवाड़ किया, बल्कि मेडिकल छात्रों और इंटर्न के भविष्य को भी नुकसान पहुंचाया है।'
राजनीतिक आरोप और 'मास्टरमाइंड भतीजे' का संदर्भ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में अभिषेक बनर्जी का सीधे नाम लिए बिना कहा कि एक बार आरोप साबित हो जाने पर 'मास्टरमाइंड भतीजा' जेल के पीछे होगा और कभी बाहर नहीं आ पाएगा। यह टिप्पणी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर इशारा मानी जा रही है।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नई राज्य सरकार पिछले TMC शासनकाल की नीतियों और कार्यक्रमों की व्यापक समीक्षा कर रही है।
आगे क्या होगा
CID और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित मेडिकल इंटर्न और छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। इस मामले की जांच रिपोर्ट पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकती है।