बंगाल विधानसभा में आज सीएजी रिपोर्ट पेश, 15 साल की वित्तीय अनियमितताओं का होगा खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा के विस्तारित बजट सत्र का शनिवार, 26 जुलाई को होने वाला अंतिम दिन तीन अहम निर्धारित कार्यवाहियों के चलते बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इनमें सबसे प्रमुख है — सदन में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट की प्रस्तुति, जो राज्य के राजकोष से होने वाली आय और व्यय की विस्तृत जाँच पर आधारित है।
सीएजी रिपोर्ट: 15 साल बाद बड़ा मौका
सत्र के समापन दिवस की पहली और सबसे अहम कार्यवाही राज्य के राजकोषीय लेन-देन पर सीएजी रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखना है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के पिछले 15 वर्षों के कार्यकाल में ऐसी रिपोर्ट पेश करना बेहद दुर्लभ रहा था। उनके अनुसार, यह रिपोर्ट प्राकृतिक आपदाओं में राहत वितरण सहित किसी भी क्षेत्र में हुई वित्तीय अनियमितताओं को उजागर कर सकती है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि चाहे मुख्यमंत्री हों, मंत्री हों या कोई अन्य वरिष्ठ नेता — किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार में संलिप्त मंत्रियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की अनुमति के लिए राज्यपाल को सिफारिश करेगी।
अभिषेक बनर्जी के स्वास्थ्य शिविरों पर बयान
दिन की दूसरी निर्धारित कार्यवाही में मुख्यमंत्री सदन में TMC महासचिव और लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी द्वारा दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र में संचालित निःशुल्क 'सेवा आश्रय' स्वास्थ्य शिविरों से जुड़े आरोपों की जाँच पर बयान देंगे। इन शिविरों पर कुप्रबंधन, चिकित्सा उपकरणों के दुरुपयोग और गलत उपचार पद्धति से मरीजों को हुई पीड़ा के आरोप हैं। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पहले ही दो एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और कई पुलिस शिकायतें भी दाखिल हो चुकी हैं।
पंचायत विधेयक पर दो घंटे की चर्चा
तीसरी कार्यवाही के तहत पश्चिम बंगाल के पंचायत कार्य एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष अपने विभाग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करेंगे। इस विधेयक पर दो घंटे की विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है।
छह दिवसीय सत्र का महत्व
पश्चिम बंगाल विधानसभा का यह छह दिवसीय विस्तारित बजट सत्र राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के बजटीय आवंटन पर चर्चा के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया था। गौरतलब है कि 22 जुलाई को राज्य गृह विभाग के बजटीय आवंटन पर चर्चा हुई — जो 2012 के बाद पहली बार, यानी 14 वर्षों के अंतराल के बाद संभव हो सकी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में शासन और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
सीएजी रिपोर्ट की प्रस्तुति के बाद उसे विधानसभा की लोक लेखा समिति को भेजे जाने की संभावना है, जहाँ विस्तृत समीक्षा होगी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्य आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।