पश्चिम बंगाल विधानसभा का विस्तारित बजट सत्र 21 जुलाई से, 13 विभागों के आवंटन पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा का विस्तारित बजट सत्र 21 जुलाई 2026 (सोमवार) से शुरू होगा और 25 जुलाई तक चलेगा, जिसमें राज्य सरकार के 13 विभागों के बजट आवंटन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह सत्र पश्चिम बंगाल में नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद विधायी पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सत्र की संरचना और कार्यक्रम
विस्तारित सत्र की शुरुआत 'मेंशन्स फेज' से होगी, जिसमें विधायक अपने-अपने चुनाव क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं और जनहित के मामलों को संक्षेप में सदन के सामने रख सकेंगे। सोमवार को पहले हिस्से के अंत और पूरे दूसरे हिस्से में स्वास्थ्य, पंचायत मामलों, ग्रामीण विकास और परिवहन विभागों के बजट आवंटन पर चर्चा होगी।
संबंधित विभागों के मंत्री चर्चा में भाग लेंगे और विधायकों के सवालों का जवाब देंगे। विधानसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, सबसे अधिक समय गृह विभाग के बजट आवंटन को दिया गया है — 22 जुलाई को इस पर तीन घंटे की चर्चा निर्धारित है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की भूमिका
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी गृह विभाग की बजट चर्चा के अंत में अंतिम जवाब देंगे। गौरतलब है कि गृह विभाग सीधे मुख्यमंत्री के नियंत्रण में आता है, इसलिए इस चर्चा पर सदन का विशेष ध्यान रहेगा।
पिछली सरकार से तुलना: पारदर्शिता का नया दौर
राज्य कैबिनेट के एक सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, '2021 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल के पिछले 15 वर्षों में विभागीय बजट आवंटन पर चर्चा के मामले बहुत कम थे। ज्यादातर मामलों में, विभागीय बजट आवंटन के प्रस्तावों — खासकर उन विभागों के, जो सीधे तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नियंत्रण में थे — सदन में चर्चा किए बिना ही गिलोटिन कर दिया जाता था।'
उन्होंने आगे कहा, 'नई सरकार विभागीय आवंटन पर चर्चा की व्यवस्था को फिर से शुरू करना चाहती है और इसमें पूरी पारदर्शिता रखना चाहती है, ताकि विपक्ष के विधायक भी अपने सुझाव दे सकें।'
CAG रिपोर्ट की वापसी: एक और बड़ा बदलाव
इससे पहले, राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता — जो पत्रकार से राजनेता बने हैं — ने घोषणा की थी कि नई सरकार भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्तुत करेगी। यह मुद्दा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के कार्यकाल में पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता रहा था।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल और नागरिक समाज लंबे समय से राज्य की वित्तीय जवाबदेही पर सवाल उठाते रहे हैं। CAG रिपोर्ट की प्रस्तुति और विभागीय बजट चर्चा की बहाली मिलकर राज्य विधानसभा में विधायी निगरानी के एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है।