पश्चिम बंगाल बजट 2026: स्वपन दासगुप्ता पेश करेंगे BJP सरकार का पहला पूर्ण बजट, ₹8.15 लाख करोड़ के कर्ज़ के बीच निवेश नीतियों पर नज़र
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नवगठित सरकार के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता सोमवार, 22 जून को दोपहर विधानसभा में राज्य का पहला पूर्ण बजट प्रस्तुत करेंगे। पत्रकारिता से राजनीति में आए दासगुप्ता के इस बजट से आम नागरिकों और उद्योग जगत दोनों को व्यापक उम्मीदें हैं — विशेष रूप से कर राजस्व विस्तार, सरकारी व्यय की दक्षता और निवेश-अनुकूल नीतियों को लेकर।
बजट से क्या हैं उम्मीदें
बजट पूर्व चर्चाओं में दासगुप्ता ने स्पष्ट किया है कि सरकार आम नागरिकों पर अतिरिक्त कर का बोझ डाले बिना राज्य के राजस्व को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने कहा, 'मेरा मुख्य लक्ष्य राज्य के अपने कर राजस्व संग्रह को बढ़ाना है, लेकिन मौजूदा कर दरों में कोई वृद्धि किए बिना।' आर्थिक सलाहकारों के अनुसार, यह तर्कसंगत दृष्टिकोण है — बशर्ते राजस्व सृजन के नए चैनल खोले जाएं।
दासगुप्ता ने इस धारणा को भी खारिज किया है कि कर राजस्व बढ़ाने का एकमात्र तरीका कर दरों में वृद्धि है। उनका मानना है कि कई मामलों में कर दरों में कमी से भी वास्तविक संग्रह बढ़ सकता है।
विरासत में मिली वित्तीय चुनौतियाँ
नई BJP सरकार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार से गंभीर वित्तीय चुनौतियाँ विरासत में मिली हैं। राज्य पर संचित ऋण 31 मार्च 2027 तक ₹8.15 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है, जबकि 31 मार्च 2011 को — 34 साल के वाम मोर्चा शासन के अंतिम वर्ष में — यह मात्र ₹1.99 लाख करोड़ था।
अर्थशास्त्रियों की मुख्य शिकायत पिछली सरकार के दौरान राज्य के सीमित राजस्व चैनलों को लेकर रही है, जो मुख्यतः दो मदों — राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) और राज्य उत्पाद शुल्क — पर निर्भर थे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस संचित ऋण संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता कर राजस्व में वृद्धि और गैर-योजनागत व्यय में भारी कटौती का संयोजन है।
उत्पाद शुल्क सुधार: बजट से पहले का कदम
बजट प्रस्तुति से पहले ही दासगुप्ता ने राज्य उत्पाद शुल्क प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सुधार लागू किया है। राज्य वित्त विभाग ने पिछले सप्ताह एक अधिसूचना जारी कर शराब निर्माताओं, ब्रुअरीज और बॉटलिंग प्लांटों के लिए सभी उत्पाद शुल्क का अग्रिम भुगतान अनिवार्य कर दिया। इस नई व्यवस्था के तहत किसी भी उत्पाद को फैक्ट्री या बॉटलिंग प्लांट से बाहर भेजने से पहले पूरा शुल्क जमा करना होगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य भ्रष्टाचार के रास्ते बंद करना और राजस्व संग्रह को पारदर्शी बनाना है।
निवेश और भूमि नीति सुधार की दरकार
उद्योग जगत के जानकारों के अनुसार, राज्य में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करने के लिए दो प्रमुख भूमि नीति सुधार आवश्यक हैं। पहला, शहरी भूमि (अधिकतम सीमा और विनियमन) अधिनियम, 1976 को निरस्त करना, और दूसरा, उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण या खरीद में राज्य की भागीदारी को रोकने वाली मौजूदा नीति को समाप्त करना। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) नीति में भी बदलाव की माँग उद्योग जगत लंबे समय से कर रहा है।
आगे क्या
यह बजट केवल एक वार्षिक वित्तीय दस्तावेज़ नहीं, बल्कि BJP सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण की पहली औपचारिक परीक्षा है। दासगुप्ता के सामने चुनौती है कि वे ऋण प्रबंधन, राजस्व विस्तार और निवेश-अनुकूल माहौल — तीनों मोर्चों पर एक साथ ठोस दिशा दें। बजट के बाद उद्योग संगठनों और अर्थशास्त्रियों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह सरकार अपने वादों को नीतिगत ज़मीन पर उतारने में कितनी सफल रही।