पश्चिम बंगाल बजट 2026-27: वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता बोले — ₹8 लाख करोड़ के कर्ज से बाजार अर्थव्यवस्था की ओर
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने 24 जून 2026 को स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार से ₹8 लाख करोड़ के भारी कर्ज और 'पूरी तरह असामान्य हो चुकी' आर्थिक स्थिति विरासत में मिली है। राज्य का बजट 2026-27 पेश करने के बाद दासगुप्ता ने कहा कि सरकार इस स्थिति को 'तेजी से बढ़ती बाजार-आधारित अर्थव्यवस्था' में बदलने के इरादे से काम कर रही है।
विरासत में मिली चुनौतियाँ
दासगुप्ता ने बताया कि बजट तैयार करते समय उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की थी — न तो अत्यधिक नौकरशाही वाला बजट और न ही पूरी तरह राजनीतिक। उन्होंने कहा, 'पिछले 10 से 15 वर्षों में पश्चिम बंगाल ने केंद्र सरकार की लगभग सभी योजनाओं और परियोजनाओं को नजरअंदाज किया, जिससे राज्य को मिलने वाले लाभों से कुछ अधिकारी भी अनजान थे।'
उन्होंने बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐसी कई योजनाओं की जानकारी दी जिनसे राज्य वंचित रह गया था। इसके अलावा, बीरभूम जिले में रेत और खदानों के क्षेत्र में व्यापक अनियमितताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रॉयल्टी भुगतान में भारी चूक थी — 'आठ में से शायद एक ट्रक ही भुगतान करता था।' अब सरकार डिटेक्शन टेक्नोलॉजी के जरिये इस पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है।
उद्योग और निवेश की वापसी
दासगुप्ता ने स्वीकार किया कि सिंगुर की घटनाओं के बाद से उद्योगपतियों का राज्य से भरोसा उठ गया था और आम धारणा बन गई थी कि 'बंगाल में बिजनेस करना बहुत मुश्किल है।' उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही एक नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी लागू करेगी और राज्य को 'बिजनेस-फ्रेंडली' बनाना प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बड़े निवेशक सम्मेलन आयोजित करने से पहले सरकार अपनी तैयारी पूरी करना चाहती है। 'बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट' के बारे में उन्होंने कहा कि यह प्राथमिकता नहीं है, क्योंकि पिछले आयोजन 'मजाक बनकर रह गए थे।'
बुनियादी ढाँचे की योजनाएँ
इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर वित्त मंत्री ने लुधियाना से डंकुनी तक के फ्रेट कॉरिडोर को पूरा करने का इरादा जताया, जिसे पिछली सरकार ने अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने अर्बन लैंड (सीलिंग एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1976 की समीक्षा की घोषणा का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने 'पुराने समाजवादी दौर की निशानी' बताते हुए समाप्त किए जाने की वकालत की। उनके अनुसार, उद्योगों के लिए आवंटित लेकिन अनुपयोगी पड़ी जमीनों का उपयोग औद्योगिक विकास के लिए किया जाना चाहिए।
मिड-डे मील और सामाजिक मुद्दे
राज्य में इस्कॉन के जरिये मिड-डे मील योजना लागू करने और उसमें अंडे न शामिल किए जाने पर उठे विवाद पर दासगुप्ता ने कहा कि इस्कॉन बंगाली स्वाद के अनुसार अपना मेन्यू बदल सकता है, लेकिन उनसे अंडे परोसने की उम्मीद रखना उचित नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले से चल रही 'मां किचन' में अंडे और मछली परोसे जा रहे हैं, इसलिए यह शाकाहार को बढ़ावा देने की नीति नहीं है।
शराब की स्थिति पर उन्होंने कहा कि यह 'सामाजिक समस्या' बन चुकी थी और रिहायशी इलाकों में दुकानों को लेकर महिलाओं की शिकायतें थीं। सरकार राजस्व के लिए शराब पर अत्यधिक निर्भरता कम करना चाहती है।
आगे की राह
दासगुप्ता ने कहा कि दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे, सातों दिन संचालन की अनुमति देने से राजस्व संग्रह और रोजगार दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने बंगाल को फिर से 'गेटवे ऑफ द ईस्ट' बनाने का संकल्प जताते हुए कहा — 'हमने 50 साल गंवा दिए और हम उसकी भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं।' आने वाले महीनों में नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी और निवेशकों के साथ बातचीत के नतीजे यह तय करेंगे कि यह संकल्प जमीन पर कितना उतरता है।