पश्चिम बंगाल विधानसभा में 14 साल बाद गृह विभाग के बजट पर चर्चा, सुवेंदु अधिकारी देंगे जवाब
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में 22 जुलाई 2026 को 14 वर्षों के अंतराल के बाद राज्य गृह विभाग के बजट प्रावधानों पर सदन में चर्चा होगी। गृह विभाग की ज़िम्मेदारी राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पास है, और वे विधायकों के सवालों का सदन में जवाब देंगे। यह चर्चा विस्तारित बजट सत्र के पहले भाग में होगी, जिसके लिए दो घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
14 साल का 'गिलोटिन' — क्या था यह?
गृह विभाग के बजट आवंटन पर अंतिम बार चर्चा 2012 में हुई थी। उसके बाद से इसे 'गिलोटिन' प्रक्रिया के तहत पारित किया जाता रहा — अर्थात सार्वजनिक व्यय की मंजूरी को बिना किसी विधायी चर्चा के सदन में तेज़ी से पास कर दिया जाता था। भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) इस प्रथा की लगातार आलोचना करते रहे।
ममता बनर्जी के कार्यकाल में क्यों नहीं हुई चर्चा?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) 2011 में सत्ता में आई और उसने वाम मोर्चे के 34 वर्षों के शासन को समाप्त किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2011 से 2026 तक गृह विभाग का प्रभार स्वयं अपने पास रखा। उनके कार्यकाल के पहले दो वर्षों — 2011 और 2012 — को छोड़कर, शेष पूरे कार्यकाल में गृह विभाग के बजट पर कोई विधायी चर्चा नहीं हुई। आलोचकों का कहना है कि इससे विधानसभा की जवाबदेही प्रक्रिया कमज़ोर हुई।
सुवेंदु अधिकारी की नई पहल
पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने 'गिलोटिन' की परंपरा को समाप्त करने का निर्णय लिया है। उनके नेतृत्व में सरकार ने गृह विभाग के बजट आवंटन पर सदन में खुली चर्चा शुरू करने का फैसला किया है। चर्चा का समापन मुख्यमंत्री अधिकारी के जवाब के साथ होगा।
बुधवार का पूरा कार्यक्रम
विस्तारित बजट सत्र के पहले भाग में गृह विभाग पर दो घंटे की चर्चा होगी। लंच ब्रेक के बाद विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट की बैठक होगी, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों को मंजूरी दी जाएगी। सत्र के दूसरे भाग में बिजली विभाग के बजट आवंटन पर चर्चा होगी — यह विभाग भी मुख्यमंत्री अधिकारी के पास ही है — जिसके बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होगी।
आगे क्या
यह चर्चा पश्चिम बंगाल की नई सरकार की विधायी पारदर्शिता की दिशा में पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। विपक्षी दल इस अवसर का उपयोग गृह विभाग की कार्यप्रणाली और खर्च पर सवाल उठाने के लिए करेंगे।