बंगाल विधानसभा में 25 जून को पेश होगा भ्रष्टाचार रोधी बिल, दोषियों की संपत्ति होगी जब्त: सीएम सुवेंदु अधिकारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 23 जून 2026 को राज्य विधानसभा में घोषणा की कि भ्रष्टाचार रोधी कड़े कानूनी प्रावधानों वाला एक नया विधेयक 25 जून को बजट सत्र के अंतिम दिन सदन के पटल पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नए कानून के तहत दोषियों को जेल भेजने के साथ-साथ उनकी अवैध संपत्ति भी जब्त कर नीलाम की जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता द्वारा सोमवार को पेश किए गए बजट प्रस्तावों पर चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति का ऐलान किया। उन्होंने कहा, "बहुत से लोग सोच सकते हैं कि वे दो महीने जेल में बिताएंगे और फिर कानूनी लड़ाई के बाद छूट जाएंगे। उन्हें याद रखना चाहिए कि इस बार हम उनकी संपत्ति जब्त कर लेंगे। हम संपत्ति की नीलामी करेंगे।"
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
प्रस्तावित विधेयक में दो मुख्य दंडात्मक उपाय शामिल बताए जा रहे हैं — पहला, भ्रष्टाचार के दोषी व्यक्ति को कारावास, और दूसरा, भ्रष्टाचार से अर्जित धन एवं संपत्ति की सरकारी जब्ती और उसकी सार्वजनिक नीलामी। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में पिछले वर्षों में शिक्षक भर्ती घोटाले और राशन वितरण अनियमितताओं को लेकर व्यापक विवाद रहा है।
विपक्ष पर परोक्ष निशाना
मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी पर परोक्ष रूप से निशाना साधा, हालाँकि उन्होंने किसी का भी नाम सीधे नहीं लिया। अधिकारी ने कोलकाता के कालीघाट इलाके और दक्षिण 24 परगना जिले के अमतला में स्थित कथित विवादित संपत्तियों का उल्लेख किया, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे ममता बनर्जी के परिवार के सदस्यों से जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा, "हम कोलकाता में फ्लाईओवर के नीचे रहने वाले लोगों को दक्षिण कोलकाता की हरीश चटर्जी स्ट्रीट और हरीश मुखर्जी रोड और दक्षिण 24 परगना के अमतला में मौजूद महलों में रहने की व्यवस्था करेंगे।" यह टिप्पणी सदन में तीखी राजनीतिक बहस का कारण बनी।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का वादा
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि अब से सरकारी नौकरियों की भर्ती में किसी भी राजनेता की कोई भूमिका नहीं होगी। उन्होंने कहा कि राज्य की सभी भर्तियाँ उसी मॉडल पर आधारित होंगी जिसका पालन केंद्र सरकार की भर्तियों में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) करता है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में शिक्षक एवं सरकारी भर्ती घोटालों के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़ी जा चुकी है।
आगे क्या होगा
विधेयक के 25 जून 2026 को विधानसभा में पेश होने की उम्मीद है, जो बजट सत्र का अंतिम दिन है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह राज्य में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक नया कानूनी ढाँचा स्थापित करेगा। विपक्षी TMC की प्रतिक्रिया और सदन की कार्यवाही पर सभी की निगाहें टिकी हैं।