पश्चिम बंगाल विधानसभा में सार्वजनिक सुरक्षा बिल 2026 पास, प्रिवेंटिव डिटेंशन और संपत्ति जब्ती का अधिकार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने 29 जून 2026 को पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण बिल, 2026 बहुमत से पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में भ्रष्टाचार, संगठित असामाजिक गतिविधियों और उपद्रव पर कड़ा अंकुश लगाना है। कोलकाता स्थित विधानसभा में सोमवार दोपहर हुई वोटिंग में 176 विधायकों ने बिल के पक्ष में मतदान किया।
मतदान का गणित
विधानसभा में हुई वोटिंग में 176 विधायकों ने बिल के समर्थन में वोट दिया, जबकि 41 विधायकों ने इसका विरोध किया। शेष 20 विधायक मतदान से अनुपस्थित रहे। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खेमे ने बिल के पक्ष में एकजुट होकर वोट दिया।
बिल की मुख्य विशेषताएँ
यह विधेयक भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रावधानों से दो अहम बिंदुओं पर अलग है। पहला, यदि किसी व्यक्ति को जनता की सुरक्षा के लिए खतरा माना जाए, तो उसे एक वर्ष तक 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' (एहतियाती हिरासत) में रखा जा सकता है। दूसरा, राज्य सरकार को ऐसे अपराध में लिप्त व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का अधिकार मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, नया कानून पुलिस को यह शक्ति भी देगा कि यदि उन्हें संदेह हो कि कोई व्यक्ति अशांति फैला सकता है, तो वे उसे किसी विशेष क्षेत्र से बाहर कर सकते हैं या उस क्षेत्र में प्रवेश से रोक सकते हैं। कानून को लागू करने वाले पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को भी इस विधेयक के तहत संरक्षण प्रदान किया गया है।
एडवाइजरी बोर्ड की भूमिका
प्रिवेंटिव डिटेंशन के प्रावधान को लागू करने के लिए एक एडवाइजरी बोर्ड गठित किया जाएगा। यह बोर्ड यह तय करेगा कि किसी व्यक्ति को हिरासत में रखना न्यायसंगत है या नहीं। बोर्ड के अध्यक्ष कलकत्ता उच्च न्यायालय के मौजूदा या पूर्व न्यायाधीश होंगे, और इसमें दो अन्य ऐसे सदस्य भी शामिल होंगे जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखते हों। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को बोर्ड के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार होगा।
मुख्यमंत्री की सफाई
बिल की आवश्यकता पर बोलते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सदन में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार के दौरान राज्य में हुई गुंडागर्दी और हिंसा की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने प्रिवेंटिव डिटेंशन को लेकर उठाई जा रही आशंकाओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि यह प्रावधान 'सज्जन लोगों' के लिए नहीं, बल्कि उन व्यक्तियों के लिए है जिनका आपराधिक इतिहास रहा हो।
आगे की राह
आलोचकों का कहना है कि प्रिवेंटिव डिटेंशन जैसे प्रावधान नागरिक स्वतंत्रता के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं, और इसके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह बिल अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा, जिसके बाद इसके क्रियान्वयन की दिशा और एडवाइजरी बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।