पश्चिम बंगाल पंचायत संशोधन विधेयक 2026 पारित: 169 के मुकाबले 13 वोट, TMC के भीतर भी विरोध
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने 25 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल पंचायत (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 को भारी बहुमत से पारित कर दिया। पक्ष में 169 वोट पड़े, जबकि विरोध में मात्र 13 वोट पड़े। यह विधेयक पश्चिम बंगाल पंचायत अधिनियम, 1973 के प्रमुख प्रावधानों में संशोधन करता है और ग्राम पंचायत से लेकर जिला परिषद तक — तीनों स्तरों पर — निर्वाचित प्रमुखों के बिल स्वीकृति एवं हस्ताक्षर के अधिकारों को काफी हद तक सीमित करता है।
मतदान का विवरण और विरोधी खेमा
विरोध में पड़े 13 वोटों में से 9 वोट पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक 'मूल लेकिन अल्पसंख्यक' गुट के विधायकों के थे — जो सत्तारूढ़ दल के भीतर ही असंतोष का संकेत है। इसके अलावा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के दो, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के एक और अखिल भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा (AISF) के एक विधायक ने भी विरोध दर्ज कराया। मतदान के दौरान कुल 32 विधायक अनुपस्थित रहे।
विधेयक में क्या बदला
नए प्रावधानों के अनुसार, निर्वाचित पंचायत प्रमुख किसी भी प्रस्ताव को मंजूरी देने का अधिकार बनाए रखेंगे, परंतु उन प्रस्तावों की अंतिम स्वीकृति और अनुमोदन अब नौकरशाहों — यानी सरकारी अधिकारियों — द्वारा किया जाएगा। पंचायत कार्य एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव निर्वाचित प्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों को नहीं छीनता, बल्कि ग्रामीण नागरिक सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी पर अंकुश लगाने के लिए है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवाओं के लिए स्वीकृत धन का उपयोग केवल उसी निर्धारित उद्देश्य के लिए हो — यह सुनिश्चित करना इस विधेयक का मूल लक्ष्य है। उल्लेखनीय है कि यह विधेयक 23 जुलाई 2026 को कोलकाता गजट में प्रकाशित हो चुका था।
सरकार का तर्क और विपक्ष पर निशाना
उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने बहस में भाग लेते हुए TMC के पिछले 15 वर्षों के शासन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार के कार्यकाल में सहभागी पंचायत प्रणाली की जगह एक 'वंशानुगत पंचायत प्रणाली' पनपी, जिसमें भ्रष्ट पंचायत प्रमुखों ने अपने कार्यालय आना बंद कर दिया और सार्वजनिक सेवाएँ बाधित होती रहीं। उनके अनुसार, यह विधेयक उसी टूटी हुई व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास है।
आम जनता पर असर
यह संशोधन पश्चिम बंगाल के लाखों ग्रामीण नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा, जो अपनी बुनियादी सेवाओं — सड़क, पानी, स्वच्छता और सरकारी योजनाओं के लाभ — के लिए पंचायत व्यवस्था पर निर्भर हैं। समर्थकों का तर्क है कि नौकरशाही अनुमोदन से धन के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। आलोचकों का कहना है कि इससे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की वास्तविक शक्ति कम होगी और जवाबदेही का केंद्र मतदाताओं से हटकर नियुक्त अधिकारियों की ओर खिसक जाएगा।
आगे क्या
विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। TMC के भीतर से उठे विरोध के स्वर और विपक्षी दलों की आपत्तियों को देखते हुए इस विधेयक के क्रियान्वयन पर राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर नज़र बनी रहेगी।