पश्चिम बंगाल में असामाजिक गतिविधियों पर लगाम: 29 जून को विधानसभा में पेश होगा नया विधेयक
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में 29 जून 2026 को 'द वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026' पेश किया जाएगा। कलकत्ता राजपत्र के एक विशेष अंक में इस विधेयक की अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। यह विधेयक सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संगठित असामाजिक गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
विधेयक की पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के दौरान इस सप्ताह की शुरुआत में ऐसे विधेयक को पेश करने की योजना की घोषणा की थी। गौरतलब है कि यह विधेयक भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की मौजूदा धाराओं से दो प्रमुख बिंदुओं पर अलग है, जो इसे राज्य स्तर पर एक विशिष्ट कानूनी हस्तक्षेप बनाता है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान
विधेयक दो मुख्य भागों में विभाजित है। पहले भाग के तहत, यदि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाए, तो उसे एक वर्ष तक निवारक हिरासत में रखा जा सकता है। दूसरे भाग के तहत राज्य सरकार को बीएनएस की उपयुक्त धारा का प्रयोग करके ऐसे अपराध में शामिल व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का अधिकार दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, पुलिस को किसी व्यक्ति को किसी क्षेत्र से निष्कासित या प्रतिबंधित करने का अधिकार भी दिया जाएगा, यदि यह आशंका हो कि वह अशांति फैला सकता है। कानून के क्रियान्वयन में पुलिस और सरकारी कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रावधान भी शामिल होंगे।
सलाहकार बोर्ड की संरचना
निवारक हिरासत के मामलों की निगरानी के लिए एक सलाहकार बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड की अध्यक्षता कलकत्ता उच्च न्यायालय के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश करेंगे, और इसमें दो अन्य सदस्य भी होंगे जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखते हों। यह बोर्ड निवारक हिरासत की तर्कसंगतता का आकलन करेगा।
हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अपना पक्ष रखने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार भी दिया जाएगा, जो न्यायिक निगरानी का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
आगे क्या होगा
विधेयक को 29 जून, सोमवार को विधानसभा में मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज़ है। विधेयक के अधिनियम बनने के बाद इसके क्रियान्वयन और नागरिक अधिकारों पर इसके संभावित प्रभाव पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।