पश्चिम बंगाल एंटी सोशल बिल पर TMC नेता मदन मित्रा का हमला, बोले — 'राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने 26 जून 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रस्तावित एंटी सोशल बिल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मदन मित्रा ने क्या कहा
मित्रा ने शुक्रवार को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार इंदिरा गांधी के शासनकाल को अपना आदर्श मानकर यह बिल लेकर आई है। उन्होंने इसे कांग्रेस के उस अधिनियम से जोड़ा जो आपातकाल के दौरान लागू किया गया था। मित्रा के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) अभी उसी रास्ते पर चल रही है जिस पर कभी कांग्रेस चली थी।
आपातकाल से तुलना
मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान इसी प्रकार के बिल के तहत विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था — चाहे वे ज्योति बासु हों या सीपीएम के अन्य नेता। उन्होंने चेताया कि प्रस्तावित बिल के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना सुनवाई के एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। उन्होंने कहा, 'जो लोग गुंडे थे, वही अब गुंडे होने की परिभाषा तय कर रहे हैं — ऐसे में न्याय कैसे मिलेगा?'
यूसीसी पर सतर्क रुख
समान नागरिक संहिता (UCC) पर पूछे जाने पर मित्रा ने कहा कि उन्होंने अभी तक इस बिल को व्यक्तिगत रूप से नहीं देखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक यूसीसी बिल औपचारिक रूप से पेश नहीं हो जाता, वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
राजनीतिक निहितार्थ
मित्रा ने आशंका जताई कि एंटी सोशल बिल का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जाएगा और सरकार की आलोचना करने वालों को दबाने का हथियार बनेगा। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। गौरतलब है कि विधानसभा सत्र के दौरान इस बिल को लेकर सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह तीखी बहस देखी गई है।
आगे क्या होगा
फिलहाल एंटी सोशल बिल पश्चिम बंगाल विधानसभा में विचाराधीन है। विपक्षी दलों की बढ़ती आपत्तियों के बीच यह देखना होगा कि सरकार इस विधेयक को किस रूप में पारित कराती है। मित्रा जैसे TMC के अंदरूनी आवाज़ों का विरोध इस बिल के भविष्य पर सवाल खड़े करता है।