सुवेंदु अधिकारी का वादा: पश्चिम बंगाल में विपक्ष को मिलेगा बराबरी का लोकतांत्रिक अवसर
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को कोलकाता स्थित पश्चिम बंगाल विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी सरकार विपक्षी विधायकों को पूर्ण लोकतांत्रिक सम्मान और समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है — जो पिछले शासनकाल में कथित तौर पर नदारद था।
पिछली सरकारों पर सीधा प्रहार
अधिकारी ने बिना लाग-लपेट के 1977 से 2011 तक के वाम मोर्चा शासन और उसके बाद के 15 वर्षों (2011–2026) के तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकाल, दोनों की आलोचना की। उन्होंने कहा, "सबसे पहले 1977 से 2011 तक 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन के दौरान अधिकांश कामकाज सत्ताधारी दल के कार्यालय से ही संचालित होता था। पिछली सरकार में विपक्षी विधायकों का सम्मान नहीं किया जाता था। ब्लॉक विकास अधिकारी और थानों के प्रभारी अधिकारी भी विपक्षी विधायकों के फोन नहीं उठाते थे।"
मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं पाँच वर्षों तक विपक्ष के नेता रहे, लेकिन उन्हें किसी भी सरकारी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया। सार्वजनिक आयोजनों में केवल सत्ताधारी दल के विधायकों को ही स्थान मिलता था।
नई सरकार की कार्यशैली
राज्य के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में अधिकारी ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने में उन्होंने पाँच प्रशासनिक बैठकें आयोजित की हैं, जिनमें सत्ताधारी और विपक्षी दोनों दलों के विधायकों को आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा, "मैंने बजट प्रक्रिया में विपक्ष को भी शामिल किया है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि मेरा मानना है कि हमें राज्य का विकास मिलकर ही करना होगा।"
विधानसभा के आधुनिकीकरण पर जोर
अधिकारी ने विधानसभा की पुरातन कार्यप्रणाली पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अभी भी मतदान कागज पर होता है और कोई इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली नहीं है। उन्होंने वाम मोर्चा और TMC दोनों पर आधुनिक संचार तकनीकों को अपनाने से परहेज करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "विधानसभा के बुनियादी ढाँचे को ठीक करने की जरूरत है। हमें जनता के साथ काम करना चाहिए, न कि पार्टी के साथ।"
आम जनता पर असर
यदि अधिकारी का यह दृष्टिकोण व्यवहार में उतरता है, तो इसका सीधा असर उन क्षेत्रों की जनता पर पड़ेगा जहाँ विपक्षी विधायक निर्वाचित हैं। कथित तौर पर पहले ऐसे क्षेत्रों में विकास कार्य और प्रशासनिक सहयोग सीमित रहता था। ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों का विपक्षी जनप्रतिनिधियों के साथ सहयोगात्मक रवैया आम नागरिकों की शिकायत-निवारण प्रक्रिया को सीधे प्रभावित करता है।
क्या होगा आगे
दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम का उद्देश्य नवनिर्वाचित विधायकों को संसदीय परंपराओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से परिचित कराना है। मुख्यमंत्री ने कहा, "पश्चिम बंगाल एक बार फिर देश का नेतृत्व करेगा।" यह देखना होगा कि घोषित लोकतांत्रिक समावेश की नीति विधानसभा के भीतर और ज़मीनी प्रशासन में किस हद तक लागू होती है।