अंबुमणि रामदास की माँग: तमिलनाडु में 3 साल में बंद हों शराब की दुकानें, कानून-व्यवस्था पर भी सवाल
सारांश
मुख्य बातें
पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु सरकार से तीन वर्षों के भीतर राज्य की सभी शराब की दुकानें चरणबद्ध तरीके से बंद करने की माँग की है। उनका तर्क है कि शराब की बिक्री से प्राप्त राजस्व की तुलना में इसके सेवन से होने वाला मानवीय और आर्थिक नुकसान कहीं अधिक गहरा है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में हाल ही में हुई हत्याओं का हवाला देते हुए तमिलनाडु की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी कड़े सवाल उठाए।
चरणबद्ध बंदी का प्रस्ताव
रामदास ने सुझाव दिया कि हर वर्ष 1,000 शराब की दुकानें बंद की जाएँ, ताकि तीन साल की समयसीमा में पूर्ण बंदी सुनिश्चित हो सके। हालाँकि, उनके बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वार्षिक लक्ष्य के आधार पर निर्धारित समयसीमा में सभी दुकानें पूरी तरह कैसे बंद होंगी। गौरतलब है कि तमिलनाडु में शराब की बिक्री मुख्यतः राज्य सरकार के नियंत्रण वाले TASMAC के माध्यम से होती है, जो सरकारी खजाने का एक बड़ा स्रोत है।
राजस्व बनाम नुकसान का तर्क
रामदास ने दावा किया कि तमिलनाडु सरकार को शराब के कारोबार से प्रतिवर्ष ₹60,000 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। उनके अनुसार, शराब की लत से दिल की बीमारियाँ, किडनी फेल होना, सड़क दुर्घटनाएँ और आत्महत्याएँ जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, और इन सबका कुल बोझ सरकारी आमदनी से कहीं अधिक है। उन्होंने तर्क दिया कि नीति-निर्माण में केवल राजस्व पहलू को नहीं, बल्कि इन सामाजिक परिणामों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मृत्यु-दर के आँकड़े और उनकी सीमाएँ
रामदास के अनुसार, पिछले वर्ष तमिलनाडु में महिलाओं की तुलना में 1.10 लाख अधिक पुरुषों की मृत्यु हुई, और उन्होंने इस अंतर का एक प्रमुख कारण शराब के सेवन से जुड़ी समस्याओं को बताया। हालाँकि, उनके बयान में इन आँकड़ों के स्रोत या मौतों का विस्तृत वर्गीकरण नहीं दिया गया, इसलिए इन दावों को उनके कथन के रूप में ही रेखांकित करना उचित है।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
शराब-बंदी की माँग के अलावा रामदास ने तिरुनेलवेली में दो लोगों की हत्या और चेन्नई में एक युवक की उसके परिजनों के सामने हत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सवाल किया कि तमिलनाडु में अपराध की स्थिति किस दिशा में जा रही है। उल्लेखनीय है कि उनके बयान में इन हत्याओं को शराब से नहीं जोड़ा गया — दोनों मुद्दे उन्होंने अलग-अलग उठाए।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में DMK सरकार पर विपक्ष का दबाव बढ़ रहा है। PMK पारंपरिक रूप से शराब-विरोधी रुख के लिए जानी जाती है और रामदास ने पहले भी इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई है। आलोचकों का कहना है कि TASMAC राजस्व पर राज्य की निर्भरता को देखते हुए ऐसी किसी भी बंदी की राह आसान नहीं होगी। आगे देखना होगा कि तमिलनाडु सरकार इस माँग पर क्या प्रतिक्रिया देती है।