8 अगस्त 2026
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तमिलनाडु में शराब पर ₹20 का पर्यावरण-कल्याण उपकर, हर बोतल पर बढ़ेगा दाम

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तमिलनाडु में शराब पर ₹20 का पर्यावरण-कल्याण उपकर, हर बोतल पर बढ़ेगा दाम

सारांश

तमिलनाडु सरकार ने शराब की हर बोतल पर ₹20 तक का नया उपकर लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह पैसा नशा मुक्ति, रीसाइक्लिंग और वन्यजीव आवास बहाली पर खर्च होगा — पर्यावरण चिंता और सामाजिक कल्याण को एक साथ साधने की कोशिश।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने शराब की प्रत्येक बोतल और कंटेनर पर ₹20 तक का पर्यावरण एवं सामाजिक कल्याण उपकर लगाने का प्रस्ताव किया है।
प्रस्ताव 'तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026' में शामिल है, जिसे 8 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश किया गया।
विधेयक में धारा 3-ए जोड़कर मौजूदा VAT के अतिरिक्त यह सेस वसूलने का प्रावधान है।
सेस की राशि शराब के प्रकार, मात्रा और पैकेजिंग के अनुसार नोटिफिकेशन के ज़रिए तय होगी।
एकत्र राशि रीसाइक्लिंग, नशा मुक्ति कार्यक्रम, प्रभावित परिवारों की आजीविका और वन-पारिस्थितिकी बहाली पर खर्च होगी।
यह लेवी विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार द्वारा अधिसूचित तारीख से लागू होगी।

तमिलनाडु सरकार ने राज्य में बिकने वाली शराब की प्रत्येक बोतल और कंटेनर पर ₹20 तक का नया पर्यावरण एवं सामाजिक कल्याण उपकर (सेस) लगाने का निर्णय लिया है, जिससे राज्य में शराब की कीमतें बढ़ना तय है। यह प्रस्ताव 'तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026' में शामिल है, जिसे 8 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य शराब के खाली कंटेनरों से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण से निपटने और नशा मुक्ति कार्यक्रमों के लिए एक समर्पित निधि बनाना है।

विधेयक में क्या है प्रावधान

विधानसभा में वाणिज्यिक कर और पंजीकरण मंत्री डी. लोकेश तमिलसेल्वन द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में 'तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2006' में एक नई धारा 3-ए जोड़ने का प्रस्ताव है। इस धारा के तहत सरकार मौजूदा वैट (VAT) के अतिरिक्त यह उपकर वसूल कर सकेगी। प्रत्येक यूनिट कंटेनर पर सेस की अधिकतम सीमा ₹20 निर्धारित की गई है।

सरकार को शराब के प्रकार, मात्रा और पैकेजिंग के आधार पर अधिसूचना (नोटिफिकेशन) के ज़रिए इस राशि को तय करने अथवा संशोधित करने का अधिकार होगा। विधेयक में 'यूनिट कंटेनर' की व्यापक परिभाषा दी गई है — इसमें बोतलें, जार, फ्लास्क, बर्तन, टिन, कैन और टेट्रा पैक सभी शामिल हैं, ताकि तमिलनाडु में बिकने वाले हर प्रकार के पैक्ड शराब उत्पाद इस लेवी के दायरे में आ सकें।

पर्यावरण चिंता: उपकर की वजह

सरकार ने इस कदम को शराब की फेंकी गई बोतलों और पैकेजिंग सामग्री से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय संकट से सीधे जोड़ा है। कांच और प्लास्टिक का यह कचरा प्रदूषण की गंभीर समस्या बन चुका है और फेंके गए कंटेनर जंगलों, वन्यजीवों के आवासों और इकोसिस्टम को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में प्लास्टिक और कांच के कचरे के प्रबंधन को लेकर नीति-निर्माताओं पर दबाव बढ़ रहा है।

सेस की राशि का उपयोग

इस उपकर से एकत्र होने वाली राशि निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाएगी:

शराब के कंटेनरों की रीसाइक्लिंग और सुरक्षित निपटान, पुनर्वास एवं नशा मुक्ति कार्यक्रम, तथा शराब की लत से प्रभावित परिवारों को आजीविका सहायता। इसके अलावा, शराब के सेहत और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जन-जागरूकता अभियान चलाने और वनों, इकोसिस्टम व वन्यजीव आवासों की बहाली में भी यह राशि लगाई जा सकेगी। सरकार आगे नियमों के ज़रिए पर्यावरण या सामाजिक कल्याण से जुड़े अन्य उद्देश्य भी जोड़ सकती है।

उपभोक्ताओं पर असर और कानूनी स्थिति

विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि ग्राहकों से वसूला गया यह सेस शराब डीलर के कर-योग्य टर्नओवर में शामिल नहीं किया जाएगा। यह लेवी विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद तमिलनाडु सरकार द्वारा अलग से अधिसूचित तारीख से प्रभावी होगी। गौरतलब है कि इस उपकर की सटीक राशि — जो ₹20 तक हो सकती है — शराब के प्रकार और पैकेजिंग के अनुसार अलग-अलग होगी, जिसे सरकार नोटिफिकेशन के माध्यम से तय करेगी।

आगे क्या होगा

विधेयक के विधानसभा में पारित होने और राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद सरकार एक अलग अधिसूचना जारी कर लागू होने की तारीख और दरें घोषित करेगी। तमिलनाडु में शराब की बिक्री पर राज्य का एकाधिकार है और TASMAC (तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन) के ज़रिए इसकी बिक्री होती है, इसलिए उपकर का असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एकत्र राशि का उपयोग कितना पारदर्शी और सत्यापन-योग्य होगा। राज्य में TASMAC का एकाधिकार है, यानी यह सेस अंततः उपभोक्ता ही चुकाएगा — और सरकार को राजस्व भी मिलेगा, भले ही इसे 'कल्याण निधि' कहा जाए। बिना स्वतंत्र ऑडिट तंत्र के, यह उपकर एक और अप्रत्यक्ष कर-वृद्धि बनकर रह सकता है। नशा मुक्ति के लिए धन जुटाना सराहनीय है, पर इसी सरकार की शराब-बिक्री से राजस्व निर्भरता एक स्पष्ट विरोधाभास है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में शराब पर नया उपकर क्या है?
तमिलनाडु सरकार ने शराब की हर बोतल और कंटेनर पर ₹20 तक का पर्यावरण एवं सामाजिक कल्याण उपकर लगाने का प्रस्ताव किया है। यह प्रस्ताव 'तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026' के तहत 8 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश किया गया।
यह उपकर कब से लागू होगा?
यह लेवी विधानसभा में विधेयक पारित होने और राज्यपाल की सहमति के बाद तमिलनाडु सरकार द्वारा अलग से जारी अधिसूचना में उल्लिखित तारीख से प्रभावी होगी। अभी तक कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।
उपकर से इकट्ठा पैसा कहाँ खर्च होगा?
एकत्र राशि शराब के कंटेनरों की रीसाइक्लिंग और सुरक्षित निपटान, नशा मुक्ति व पुनर्वास कार्यक्रमों, शराब की लत से प्रभावित परिवारों की आजीविका सहायता, जन-जागरूकता अभियानों और वन-पारिस्थितिकी बहाली पर खर्च की जाएगी। सरकार बाद में नियमों के ज़रिए अन्य उद्देश्य भी जोड़ सकती है।
किन कंटेनरों पर यह सेस लागू होगा?
विधेयक में 'यूनिट कंटेनर' की व्यापक परिभाषा दी गई है जिसमें बोतलें, जार, फ्लास्क, बर्तन, टिन, कैन और टेट्रा पैक सभी शामिल हैं। इसका उद्देश्य तमिलनाडु में बिकने वाले हर प्रकार के पैक्ड शराब उत्पाद को इस लेवी के दायरे में लाना है।
क्या यह उपकर डीलर के टर्नओवर में जुड़ेगा?
नहीं। विधेयक में स्पष्ट प्रावधान है कि ग्राहकों से वसूला गया यह सेस शराब डीलर के कर-योग्य टर्नओवर में शामिल नहीं किया जाएगा। उपकर की दर शराब के प्रकार, मात्रा और पैकेजिंग के आधार पर सरकार नोटिफिकेशन के ज़रिए तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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