तमिलनाडु में शराब पर ₹20 का पर्यावरण-कल्याण उपकर, हर बोतल पर बढ़ेगा दाम
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में बिकने वाली शराब की प्रत्येक बोतल और कंटेनर पर ₹20 तक का नया पर्यावरण एवं सामाजिक कल्याण उपकर (सेस) लगाने का निर्णय लिया है, जिससे राज्य में शराब की कीमतें बढ़ना तय है। यह प्रस्ताव 'तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026' में शामिल है, जिसे 8 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य शराब के खाली कंटेनरों से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण से निपटने और नशा मुक्ति कार्यक्रमों के लिए एक समर्पित निधि बनाना है।
विधेयक में क्या है प्रावधान
विधानसभा में वाणिज्यिक कर और पंजीकरण मंत्री डी. लोकेश तमिलसेल्वन द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में 'तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2006' में एक नई धारा 3-ए जोड़ने का प्रस्ताव है। इस धारा के तहत सरकार मौजूदा वैट (VAT) के अतिरिक्त यह उपकर वसूल कर सकेगी। प्रत्येक यूनिट कंटेनर पर सेस की अधिकतम सीमा ₹20 निर्धारित की गई है।
सरकार को शराब के प्रकार, मात्रा और पैकेजिंग के आधार पर अधिसूचना (नोटिफिकेशन) के ज़रिए इस राशि को तय करने अथवा संशोधित करने का अधिकार होगा। विधेयक में 'यूनिट कंटेनर' की व्यापक परिभाषा दी गई है — इसमें बोतलें, जार, फ्लास्क, बर्तन, टिन, कैन और टेट्रा पैक सभी शामिल हैं, ताकि तमिलनाडु में बिकने वाले हर प्रकार के पैक्ड शराब उत्पाद इस लेवी के दायरे में आ सकें।
पर्यावरण चिंता: उपकर की वजह
सरकार ने इस कदम को शराब की फेंकी गई बोतलों और पैकेजिंग सामग्री से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय संकट से सीधे जोड़ा है। कांच और प्लास्टिक का यह कचरा प्रदूषण की गंभीर समस्या बन चुका है और फेंके गए कंटेनर जंगलों, वन्यजीवों के आवासों और इकोसिस्टम को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में प्लास्टिक और कांच के कचरे के प्रबंधन को लेकर नीति-निर्माताओं पर दबाव बढ़ रहा है।
सेस की राशि का उपयोग
इस उपकर से एकत्र होने वाली राशि निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाएगी:
शराब के कंटेनरों की रीसाइक्लिंग और सुरक्षित निपटान, पुनर्वास एवं नशा मुक्ति कार्यक्रम, तथा शराब की लत से प्रभावित परिवारों को आजीविका सहायता। इसके अलावा, शराब के सेहत और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जन-जागरूकता अभियान चलाने और वनों, इकोसिस्टम व वन्यजीव आवासों की बहाली में भी यह राशि लगाई जा सकेगी। सरकार आगे नियमों के ज़रिए पर्यावरण या सामाजिक कल्याण से जुड़े अन्य उद्देश्य भी जोड़ सकती है।
उपभोक्ताओं पर असर और कानूनी स्थिति
विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि ग्राहकों से वसूला गया यह सेस शराब डीलर के कर-योग्य टर्नओवर में शामिल नहीं किया जाएगा। यह लेवी विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद तमिलनाडु सरकार द्वारा अलग से अधिसूचित तारीख से प्रभावी होगी। गौरतलब है कि इस उपकर की सटीक राशि — जो ₹20 तक हो सकती है — शराब के प्रकार और पैकेजिंग के अनुसार अलग-अलग होगी, जिसे सरकार नोटिफिकेशन के माध्यम से तय करेगी।
आगे क्या होगा
विधेयक के विधानसभा में पारित होने और राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद सरकार एक अलग अधिसूचना जारी कर लागू होने की तारीख और दरें घोषित करेगी। तमिलनाडु में शराब की बिक्री पर राज्य का एकाधिकार है और TASMAC (तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन) के ज़रिए इसकी बिक्री होती है, इसलिए उपकर का असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।