19 जुलाई 2026
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तमिलनाडु: 21 शहरी निकायों की 28 जल-सीवरेज परियोजनाओं का पर्यावरणीय ऑडिट शुरू, मैनुअल स्कैवेंजिंग पर भी अध्ययन

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तमिलनाडु: 21 शहरी निकायों की 28 जल-सीवरेज परियोजनाओं का पर्यावरणीय ऑडिट शुरू, मैनुअल स्कैवेंजिंग पर भी अध्ययन

सारांश

तमिलनाडु सरकार ने विश्व बैंक समर्थित कार्यक्रम के तहत 21 शहरी निकायों की 28 जल एवं सीवरेज परियोजनाओं का स्वतंत्र पर्यावरणीय ऑडिट शुरू किया है। साथ ही मैनुअल स्कैवेंजिंग की खतरनाक प्रथाओं पर एक व्यापक अध्ययन भी कराया जाएगा — जो शहरी बुनियादी ढाँचे में जवाबदेही की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने 21 शहरी स्थानीय निकायों की 28 जलापूर्ति और सीवरेज परियोजनाओं का स्वतंत्र पर्यावरणीय एवं सामाजिक ऑडिट शुरू किया।
परियोजनाएँ विश्व बैंक समर्थित तमिलनाडु क्लाइमेट रेजिलिएंट अर्बन डेवलपमेंट प्रोग्राम (2024–2030) के अंतर्गत हैं, जिसे दिसंबर 2023 में मंजूरी मिली।
ऑडिट में 7 सीवर-नेटवर्क परियोजनाएँ, 7 STP सहित सीवरेज परियोजनाएँ, 1 शहरव्यापी जलापूर्ति परियोजना और 13 पायलट 24x7 जलापूर्ति परियोजनाएँ शामिल हैं।
कार्यान्वयन एजेंसी TNUIFSL ने स्वतंत्र सलाहकार की नियुक्ति के लिए निविदाएँ आमंत्रित की हैं।
मैनुअल स्कैवेंजिंग और सीवर की खतरनाक सफाई पर एक अलग व्यापक अध्ययन भी होगा, जिसमें फील्ड विजिट और कर्मियों से सीधी बातचीत शामिल है।
पूरी ऑडिट प्रक्रिया तीन महीने में पूरी होगी; प्रारंभिक रिपोर्ट पहले दो सप्ताह में आएगी।

तमिलनाडु सरकार ने राज्य के 21 शहरी स्थानीय निकायों में संचालित 28 प्रमुख जलापूर्ति और भूमिगत सीवरेज परियोजनाओं के स्वतंत्र पर्यावरणीय एवं सामाजिक ऑडिट की प्रक्रिया 19 जुलाई 2026 को औपचारिक रूप से आरंभ कर दी है। इसके साथ ही शहरी बुनियादी ढाँचे से जुड़ी एक गंभीर समस्या — मैनुअल स्कैवेंजिंग और सीवर की जोखिमपूर्ण सफाई — पर एक समर्पित अध्ययन भी कराया जाएगा।

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

ये सभी परियोजनाएँ तमिलनाडु क्लाइमेट रेजिलिएंट अर्बन डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत लागू की जा रही हैं। यह विश्व बैंक की सहायता से संचालित छह वर्षीय कार्यक्रम है, जो 2024 से 2030 तक चलेगा। दिसंबर 2023 में विश्व बैंक द्वारा स्वीकृत इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करना, जलवायु परिवर्तन के प्रति शहरी तंत्र की लचीलापन क्षमता बढ़ाना और स्थानीय प्रशासन का आधुनिकीकरण करना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के कई शहर गर्मियों में तीव्र जल संकट और मानसून में जलभराव की दोहरी मार झेलते हैं।

ऑडिट के दायरे में कौन-सी परियोजनाएँ

कार्यक्रम की कार्यान्वयन एजेंसी तमिलनाडु अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (TNUIFSL) ने स्वतंत्र सलाहकार की नियुक्ति के लिए निविदाएँ आमंत्रित की हैं। यह सलाहकार 2024-25 के दौरान परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पर्यावरणीय और सामाजिक सुरक्षा मानकों के अनुपालन का आकलन करेगा।

ऑडिट के दायरे में चार श्रेणियों की परियोजनाएँ हैं। पहली श्रेणी में सलेम, तूतीकोरिन, कराईकुडी, तिरुवरूर, कृष्णागिरि, थेनी और अवाडी में केवल सीवर कलेक्शन नेटवर्क वाली 7 भूमिगत सीवरेज योजनाएँ शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में तिरुवन्नामलाई, पुदुकोट्टई, नमक्कल, धर्मपुरी, कुड्डालोर, डिंडीगुल और कांचीपुरम में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) सहित 7 भूमिगत सीवरेज परियोजनाएँ हैं।

तीसरी श्रेणी में कांचीपुरम की शहरव्यापी जलापूर्ति सुधार परियोजना है। चौथी और सबसे बड़ी श्रेणी में अवाडी, कराईकुडी, पुदुकोट्टई, तिरुचिरापल्ली (तिरुची), तूतीकोरिन, तिरुनेलवेली, इरोड, वेल्लोर, कुड्डालोर, डिंडीगुल, तांबरम, नागरकोइल और राजापालयम में 24 घंटे जलापूर्ति उपलब्ध कराने वाली 13 पायलट परियोजनाएँ शामिल हैं।

ऑडिट की कार्यप्रणाली

सलाहकार अपनी रिपोर्ट में निष्कर्षों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत करेगा — अनुपालन, गैर-अनुपालन, सर्वोत्तम प्रथाएँ और सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्र। जहाँ भी कमियाँ पाई जाएँगी, वहाँ सुधारात्मक उपाय लागू होने के बाद परियोजनाओं का पुनः निरीक्षण किया जाएगा और अनुपालन की पुष्टि के बाद ही अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी। तीन महीने की इस प्रक्रिया में पहले दो सप्ताह के भीतर प्रारंभिक अनुपालन रिपोर्ट, फिर मसौदा रिपोर्ट और अंत में अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी।

मैनुअल स्कैवेंजिंग पर विशेष अध्ययन

इस ऑडिट का एक महत्त्वपूर्ण घटक मैनुअल स्कैवेंजिंग और सीवर की खतरनाक सफाई से जुड़ा व्यापक अध्ययन है। इसमें सीवर रखरखाव से संबंधित नीतिगत और कानूनी ढाँचे की समीक्षा, शहरी स्थानीय निकायों द्वारा क्रियान्वयन में मौजूद कमियों की पहचान और उन परिस्थितियों का विश्लेषण शामिल होगा जिनमें सफाईकर्मियों को जोखिमपूर्ण तरीके से सीवर में उतरना पड़ता है। अधिकारियों, ठेकेदारों और स्वच्छता कर्मियों से बातचीत तथा फील्ड विजिट के माध्यम से पूर्व में हुई घटनाओं की भी जाँच की जाएगी। मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP), प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सुरक्षा उपायों की समीक्षा भी इसका हिस्सा होगी।

आगे की राह

यह ऑडिट तमिलनाडु के शहरी बुनियादी ढाँचे में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। विश्व बैंक की निगरानी में संचालित इस कार्यक्रम की अंतिम रिपोर्ट न केवल तमिलनाडु बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक नीतिगत संदर्भ दस्तावेज़ बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके निष्कर्षों पर होने वाली कार्रवाई होगी। विश्व बैंक-वित्तपोषित परियोजनाओं में पर्यावरणीय अनुपालन की जाँच अक्सर रस्मी बनकर रह जाती है, क्योंकि सुधारात्मक उपायों की समयसीमा और जवाबदेही तंत्र कमज़ोर होते हैं। मैनुअल स्कैवेंजिंग पर अलग अध्ययन की माँग वर्षों से उठती रही है — यह देखना होगा कि इस बार रिपोर्ट की सिफारिशें नीतिगत बदलाव में तब्दील होती हैं या फ़ाइलों में दब जाती हैं। 24 घंटे जलापूर्ति की 13 पायलट परियोजनाओं की सफलता या विफलता तमिलनाडु के व्यापक शहरी जल एजेंडे की दिशा तय करेगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में 28 जल-सीवरेज परियोजनाओं का पर्यावरणीय ऑडिट क्यों कराया जा रहा है?
ये परियोजनाएँ विश्व बैंक समर्थित तमिलनाडु क्लाइमेट रेजिलिएंट अर्बन डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत चल रही हैं, जिसमें पर्यावरणीय और सामाजिक सुरक्षा मानकों का अनुपालन अनिवार्य है। यह ऑडिट यह सुनिश्चित करने के लिए है कि 21 शहरी निकाय इन मानकों का पालन कर रहे हैं।
तमिलनाडु क्लाइमेट रेजिलिएंट अर्बन डेवलपमेंट प्रोग्राम क्या है?
यह विश्व बैंक की सहायता से संचालित एक छह वर्षीय कार्यक्रम है, जिसे दिसंबर 2023 में मंजूरी मिली और यह 2024 से 2030 तक चलेगा। इसका उद्देश्य राज्य में जल सुरक्षा मजबूत करना, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाना और शहरी प्रशासन का आधुनिकीकरण करना है।
इस ऑडिट में किन शहरों की परियोजनाएँ शामिल हैं?
ऑडिट में सलेम, तूतीकोरिन, कराईकुडी, तिरुवरूर, कृष्णागिरि, थेनी, अवाडी, तिरुवन्नामलाई, पुदुकोट्टई, नमक्कल, धर्मपुरी, कुड्डालोर, डिंडीगुल, कांचीपुरम, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, इरोड, वेल्लोर, तांबरम, नागरकोइल और राजापालयम शामिल हैं। कुल 21 शहरी स्थानीय निकायों की 28 परियोजनाएँ इसके दायरे में हैं।
मैनुअल स्कैवेंजिंग अध्ययन में क्या शामिल होगा?
इस अध्ययन में सीवर रखरखाव से जुड़े नीतिगत और कानूनी ढाँचे की समीक्षा, शहरी निकायों द्वारा क्रियान्वयन की कमियाँ, और उन परिस्थितियों का विश्लेषण होगा जिनमें कर्मियों को जोखिमपूर्ण तरीके से सीवर में उतरना पड़ता है। अधिकारियों, ठेकेदारों और स्वच्छता कर्मियों से फील्ड विजिट और बातचीत के ज़रिये पूर्व घटनाओं की भी जाँच की जाएगी।
यह ऑडिट प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी और रिपोर्ट कब आएगी?
पूरी ऑडिट प्रक्रिया तीन महीने में पूरी होगी। पहले दो सप्ताह में प्रारंभिक अनुपालन रिपोर्ट आएगी, इसके बाद कार्यान्वयन एजेंसियों और विश्व बैंक की समीक्षा के लिए मसौदा रिपोर्ट तैयार होगी, और अंत में अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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