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ओडिशा को मिलेगा ₹8,300 करोड़ का रामेश्वर–पारादीप तटीय हाईवे, 160 किमी लंबे कॉरिडोर से पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा

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ओडिशा को मिलेगा ₹8,300 करोड़ का रामेश्वर–पारादीप तटीय हाईवे, 160 किमी लंबे कॉरिडोर से पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा

सारांश

₹8,300.79 करोड़ और 160 किलोमीटर — रामेश्वर–पारादीप तटीय हाईवे सिर्फ एक सड़क नहीं, ओडिशा के आध्यात्मिक, औद्योगिक और पारिस्थितिक भूगोल को एक धागे में पिरोने की कोशिश है। जगन्नाथ मंदिर से पारादीप बंदरगाह तक, यह कॉरिडोर राज्य की तटीय अर्थव्यवस्था को नई पहचान दे सकता है।

मुख्य बातें

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ₹8,300.79 करोड़ की लागत से 160.18 किमी लंबे रामेश्वर–पारादीप तटीय राजमार्ग को मंजूरी दी।
रामेश्वर से कोणार्क तक 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे और कोणार्क से पारादीप तक 2-लेन हाईवे बनेगा; डिज़ाइन गति 100 किमी/घंटा ।
परियोजना पूरी होने पर रामेश्वर–पारादीप यात्रा समय लगभग 2 घंटे 30 मिनट कम होगा।
हाईवे 9 इकोनॉमिक नोड्स और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को जोड़ेगा; पारादीप बंदरगाह और प्रस्तावित पुरी हवाई अड्डे से संपर्क बेहतर होगा।
यह कॉरिडोर खुर्दा , पुरी , केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से गुजरेगा और जगन्नाथ मंदिर , कोणार्क सूर्य मंदिर को एकीकृत पर्यटन सर्किट से जोड़ेगा।
गाहिरमाथा कछुआ प्रजनन स्थलों तक पहुँच आसान होगी; स्थानीय समुदायों के लिए होटल, हस्तशिल्प और पर्यटन कारोबार में नए अवसर अपेक्षित।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ₹8,300.79 करोड़ की लागत से 160.18 किलोमीटर लंबे रामेश्वर–पारादीप तटीय राजमार्ग को मंजूरी दी है, जो ओडिशा के पूर्वी समुद्री तट पर आर्थिक और पर्यटन विकास की नई इबारत लिखने के लिए तैयार है। सरकार की ओर से 19 जुलाई को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में यह जानकारी दी गई। यह परियोजना पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप है और ओडिशा के चार प्रमुख जिलों को जोड़ेगी।

परियोजना का ढाँचा और डिज़ाइन

इस कॉरिडोर को दो खंडों में विभाजित किया गया है। रामेश्वर से कोणार्क तक 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे बनाया जाएगा, जबकि कोणार्क से पारादीप तक 2-लेन हाईवे का निर्माण होगा। पूरे मार्ग को 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति के लिए डिज़ाइन किया गया है।

परियोजना पूरी होने के बाद रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा का समय लगभग 2 घंटे 30 मिनट कम होने का अनुमान है, जिससे यात्री और माल परिवहन दोनों अधिक सुगम होंगे।

आर्थिक नोड्स और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क

यह हाईवे 9 इकोनॉमिक नोड्स और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को आपस में जोड़ेगा, जिससे ओडिशा का औद्योगिक और व्यापारिक नेटवर्क और सुदृढ़ होगा। इसके अलावा यह पारादीप बंदरगाह, पुरी रेलवे स्टेशन और प्रस्तावित पुरी हवाई अड्डे तक पहुँच को भी बेहतर बनाएगा।

यह राजमार्ग खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर गुजरेगा। गौरतलब है कि ये चारों जिले सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से ओडिशा के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से हैं।

तीर्थ पर्यटन और विरासत स्थलों को लाभ

यह कॉरिडोर विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर (पुरी), ऐतिहासिक कोणार्क सूर्य मंदिर और रामचंडी मंदिर के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित करेगा। इससे हर वर्ष ओडिशा आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित होगी।

पुरी, कोणार्क और पारादीप के बीच बेहतर संपर्क से ये तीनों स्थान एक एकीकृत पर्यटन सर्किट का हिस्सा बन जाएंगे, जहाँ पर्यटकों को आध्यात्मिक विरासत, प्राचीन स्थापत्य कला, समुद्र तट और प्राकृतिक पारिस्थितिकी का समग्र अनुभव मिलेगा।

पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर असर

यह हाईवे बीच पर्यटन, ईको-टूरिज्म और प्रकृति-आधारित पर्यटन को प्रोत्साहन देगा। प्रसिद्ध गाहिरमाथा कछुआ प्रजनन स्थलों और वन्यजीव क्षेत्रों तक पहुँच आसान होगी। साथ ही, ओडिशा की अनूठी तटीय जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदार पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देने की भी उम्मीद है।

मार्ग के किनारे बसे स्थानीय समुदायों के लिए यह परियोजना नए रोज़गार के द्वार खोलेगी। होटल, होमस्टे, रेस्तरां, हस्तशिल्प बाज़ार और पर्यटन-आधारित कारोबार के विस्तार की संभावनाएँ बताई जा रही हैं, जिससे तटीय क्षेत्र के निवासियों की आजीविका में सुधार की उम्मीद है।

आगे क्या

यह परियोजना ओडिशा के पूर्वी तट को एक नए तटीय पर्यटन प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। क्षेत्र में विकसित हो रही नई हवाई अड्डा अवसंरचना के साथ मिलकर यह हाईवे ओडिशा को देश और विदेश के यात्रियों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक और प्राकृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में और मज़बूत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

300 करोड़ की यह परियोजना कागज़ पर आकर्षक है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — ओडिशा में बड़े बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट अक्सर भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरियों में अटकते रहे हैं। गाहिरमाथा जैसे नाजुक पारिस्थितिक क्षेत्रों के निकट निर्माण, यदि सावधानी से न हो, तो उन्हीं संसाधनों को नुकसान पहुँचा सकता है जिन्हें यह हाईवे पर्यटकों तक पहुँचाना चाहता है। पीएम गतिशक्ति का लेबल लगाने से फंडिंग प्राथमिकता तो मिलती है, पर समयबद्ध डिलीवरी की गारंटी नहीं। राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय कितना प्रभावी रहता है, यही तय करेगा कि यह कॉरिडोर ओडिशा की अर्थव्यवस्था को वाकई रफ्तार देता है या सिर्फ एक और घोषणा बनकर रह जाता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामेश्वर–पारादीप तटीय राजमार्ग परियोजना क्या है?
यह ओडिशा के पूर्वी समुद्री तट पर ₹8,300.79 करोड़ की लागत से बनने वाला 160.18 किलोमीटर लंबा तटीय हाईवे है, जो रामेश्वर को पारादीप से जोड़ेगा। इसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मंजूरी दी है और यह पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के अंतर्गत है।
इस हाईवे से यात्रा समय कितना कम होगा?
परियोजना पूरी होने के बाद रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा का समय लगभग 2 घंटे 30 मिनट कम होने का अनुमान है। पूरे मार्ग को 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस हाईवे से ओडिशा के किन जिलों को फायदा होगा?
यह राजमार्ग खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर गुजरेगा। ये जिले धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से ओडिशा के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हैं।
यह परियोजना पर्यटन को कैसे बढ़ावा देगी?
यह हाईवे जगन्नाथ मंदिर (पुरी), कोणार्क सूर्य मंदिर और रामचंडी मंदिर को एकीकृत पर्यटन सर्किट से जोड़ेगा। इससे तीर्थयात्रियों के साथ-साथ बीच पर्यटन, ईको-टूरिज्म और गाहिरमाथा कछुआ प्रजनन स्थलों तक पहुँच भी आसान होगी।
इस हाईवे से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
परियोजना 9 इकोनॉमिक नोड्स और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को जोड़ेगी और पारादीप बंदरगाह व प्रस्तावित पुरी हवाई अड्डे से संपर्क बेहतर करेगी। मार्ग के किनारे होटल, होमस्टे, हस्तशिल्प बाज़ार और पर्यटन-आधारित कारोबार के विस्तार से स्थानीय रोज़गार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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