ओडिशा को मिलेगा ₹8,300 करोड़ का रामेश्वर–पारादीप तटीय हाईवे, 160 किमी लंबे कॉरिडोर से पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा
सारांश
मुख्य बातें
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ₹8,300.79 करोड़ की लागत से 160.18 किलोमीटर लंबे रामेश्वर–पारादीप तटीय राजमार्ग को मंजूरी दी है, जो ओडिशा के पूर्वी समुद्री तट पर आर्थिक और पर्यटन विकास की नई इबारत लिखने के लिए तैयार है। सरकार की ओर से 19 जुलाई को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में यह जानकारी दी गई। यह परियोजना पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप है और ओडिशा के चार प्रमुख जिलों को जोड़ेगी।
परियोजना का ढाँचा और डिज़ाइन
इस कॉरिडोर को दो खंडों में विभाजित किया गया है। रामेश्वर से कोणार्क तक 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे बनाया जाएगा, जबकि कोणार्क से पारादीप तक 2-लेन हाईवे का निर्माण होगा। पूरे मार्ग को 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति के लिए डिज़ाइन किया गया है।
परियोजना पूरी होने के बाद रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा का समय लगभग 2 घंटे 30 मिनट कम होने का अनुमान है, जिससे यात्री और माल परिवहन दोनों अधिक सुगम होंगे।
आर्थिक नोड्स और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क
यह हाईवे 9 इकोनॉमिक नोड्स और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को आपस में जोड़ेगा, जिससे ओडिशा का औद्योगिक और व्यापारिक नेटवर्क और सुदृढ़ होगा। इसके अलावा यह पारादीप बंदरगाह, पुरी रेलवे स्टेशन और प्रस्तावित पुरी हवाई अड्डे तक पहुँच को भी बेहतर बनाएगा।
यह राजमार्ग खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर गुजरेगा। गौरतलब है कि ये चारों जिले सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से ओडिशा के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से हैं।
तीर्थ पर्यटन और विरासत स्थलों को लाभ
यह कॉरिडोर विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर (पुरी), ऐतिहासिक कोणार्क सूर्य मंदिर और रामचंडी मंदिर के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित करेगा। इससे हर वर्ष ओडिशा आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित होगी।
पुरी, कोणार्क और पारादीप के बीच बेहतर संपर्क से ये तीनों स्थान एक एकीकृत पर्यटन सर्किट का हिस्सा बन जाएंगे, जहाँ पर्यटकों को आध्यात्मिक विरासत, प्राचीन स्थापत्य कला, समुद्र तट और प्राकृतिक पारिस्थितिकी का समग्र अनुभव मिलेगा।
पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर असर
यह हाईवे बीच पर्यटन, ईको-टूरिज्म और प्रकृति-आधारित पर्यटन को प्रोत्साहन देगा। प्रसिद्ध गाहिरमाथा कछुआ प्रजनन स्थलों और वन्यजीव क्षेत्रों तक पहुँच आसान होगी। साथ ही, ओडिशा की अनूठी तटीय जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदार पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देने की भी उम्मीद है।
मार्ग के किनारे बसे स्थानीय समुदायों के लिए यह परियोजना नए रोज़गार के द्वार खोलेगी। होटल, होमस्टे, रेस्तरां, हस्तशिल्प बाज़ार और पर्यटन-आधारित कारोबार के विस्तार की संभावनाएँ बताई जा रही हैं, जिससे तटीय क्षेत्र के निवासियों की आजीविका में सुधार की उम्मीद है।
आगे क्या
यह परियोजना ओडिशा के पूर्वी तट को एक नए तटीय पर्यटन प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। क्षेत्र में विकसित हो रही नई हवाई अड्डा अवसंरचना के साथ मिलकर यह हाईवे ओडिशा को देश और विदेश के यात्रियों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक और प्राकृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में और मज़बूत करेगा।