मद्रास हाईकोर्ट सख्त: TASMAC दुकानों के पास शराब पीने की समस्या पर तमिलनाडु सरकार से रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास हाईकोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि वह TASMAC शराब की दुकानों के आसपास खुलेआम शराब पीने से स्थानीय निवासियों को हो रही परेशानियों और उनकी सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। चेन्नई के पेरम्बूर इलाके के निवासी सुरेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह आदेश जारी किया।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता सुरेश ने अदालत में दलील दी कि पेरम्बूर में उनके आवास के निकट स्थित TASMAC दुकान के बाहर लोग नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं, जिससे इलाके के निवासियों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि TASMAC निगम की ज़िम्मेदारी केवल शराब बेचने तक सीमित नहीं होनी चाहिए — शराब की दुकानों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना भी उसके दायित्व का हिस्सा होना चाहिए।
गौरतलब है कि TASMAC (Tamil Nadu State Marketing Corporation) तमिलनाडु में शराब के थोक और खुदरा वितरण पर राज्य सरकार की एकाधिकार एजेंसी है। राज्य में शराब की बिक्री से होने वाला राजस्व सरकारी खजाने का एक प्रमुख स्रोत है, लेकिन दुकानों के आसपास व्यवस्था बनाए रखने पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं।
अदालत के निर्देश
न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार ने सुनवाई के दौरान निषेध एवं आबकारी विभाग के सचिव को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि शराब की दुकानों के आसपास शराब पीने से उत्पन्न होने वाली परेशानियों को रोकने के लिए प्रशासन ने अब तक क्या-क्या ठोस कदम उठाए हैं।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने चेन्नई उत्तर पुलिस जिले के पुलिस उपायुक्त को भी निर्देशित किया कि वे शराब पीकर वाहन चलाने से जुड़े मामलों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करें। इस विवरण में दर्ज मामलों की संख्या, वसूले गए जुर्माने की राशि तथा संबंधित शराब दुकानों के नंबर और उनके स्थान की जानकारी शामिल करने को कहा गया है।
सार्वजनिक सुरक्षा का व्यापक प्रश्न
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में TASMAC दुकानों की संख्या और उनके स्थान को लेकर नागरिक समाज में बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में या उनके ठीक समीप स्थापित दुकानें स्थानीय परिवारों — विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों — के लिए असुरक्षित माहौल पैदा करती हैं। शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों का ब्यौरा माँगना इस बात का संकेत है कि अदालत केवल सार्वजनिक उपद्रव तक नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के पहलू तक भी इस मामले को देख रही है।
यह Nवीं ऐसी घटना नहीं है जब किसी उच्च न्यायालय ने राज्य शराब एजेंसियों को जवाबदेही के दायरे में लाने की कोशिश की हो। देश के विभिन्न राज्यों में ऐसी याचिकाएँ पहले भी दायर हो चुकी हैं, लेकिन राजस्व निर्भरता के कारण नीतिगत बदलाव धीमे रहे हैं।
अगली सुनवाई
मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अदालत आगे के निर्देश जारी कर सकती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार अपनी रिपोर्ट में क्या जवाब देती है और क्या अदालत TASMAC दुकानों के संचालन संबंधी मानकों को और अधिक कड़ा बनाने का आदेश देती है।