6 अक्टूबर 2026
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मद्रास हाई कोर्ट का सवाल: शराब दुकानों जैसी सुरक्षा पहाड़ियों को क्यों नहीं?

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मद्रास हाई कोर्ट का सवाल: शराब दुकानों जैसी सुरक्षा पहाड़ियों को क्यों नहीं?

सारांश

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु सरकार पर तीखा कटाक्ष किया — शराब दुकानों की सुरक्षा के लिए तत्पर सरकार ऐतिहासिक ओनन कराडु पहाड़ी को खदान से क्यों नहीं बचा रही? अदालत ने सरकार से तीन हफ्ते में जवाबी हलफनामा माँगा है।

मुख्य बातें

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने 6 अक्टूबर 2026 को ओनन कराडु पहाड़ी पर अवैध खनन मामले में सरकार से तीखे सवाल किए।
नम्मलवार नेचर कंजर्वेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष पेथथानन ने पहाड़ियों के संरक्षण के लिए जनहित याचिका दायर की थी।
ओनन कराडु पहाड़ी पर पुरातात्विक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक अवशेष हैं और यह भूजल पुनर्भरण का महत्वपूर्ण स्रोत है।
जस्टिस वेलमुरुगन और जस्टिस के.के.
रामकृष्णन की पीठ ने कहा कि प्राकृतिक संरचनाओं को दोबारा नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने तमिलनाडु सरकार को विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया; सुनवाई तीन हफ्ते के लिए स्थगित।

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने 6 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से तीखा सवाल किया — जब सरकार शराब की दुकानों की सुरक्षा के लिए इतनी सतर्क है, तो ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहाड़ियों की रक्षा में वही तत्परता क्यों नहीं दिखती? यह टिप्पणी पेरायुर क्षेत्र की ओनन कराडु पहाड़ी पर अवैध पत्थर खनन रोकने के लिए दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की गई।

मामले की पृष्ठभूमि

नम्मलवार नेचर कंजर्वेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष पेथथानन ने मदुरै पीठ में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी। याचिका में बताया गया कि पेरायुर इलाके के शंकरलिंगपुरम गाँव के निकट स्थित सलुप्पेन कराडु, ओनन कराडु और पेरुमल मलाई — तीन पहाड़ियाँ पारिस्थितिकीय और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें से ओनन कराडु पहाड़ी पर पुरातात्विक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवशेष मौजूद हैं, जो प्राचीन सभ्यता के रहन-सहन और दफनाने की प्रथाओं के प्रमाण देते हैं।

याचिकाकर्ता के अनुसार यह पहाड़ी प्राकृतिक जल संग्रह और भूजल पुनर्भरण की भी महत्वपूर्ण कड़ी है। बावजूद इसके, इस स्थल पर पत्थर की खदान संचालित करने की अनुमति दे दी गई, जिससे ये सभी अमूल्य अवशेष नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है।

अदालत की तीखी टिप्पणी

मंगलवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस वेलमुरुगन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने कहा, 'सरकार शराब की दुकानों की सुरक्षा को लेकर तो चिंता दिखाती है, लेकिन पहाड़ियों की सुरक्षा को लेकर क्यों नहीं? ऐसी प्राकृतिक संरचनाओं को दोबारा नहीं बनाया जा सकता। अगर हम इनके प्रति बेपरवाह रहे तो क्या होगा?' यह टिप्पणी पर्यावरणीय मुकदमेबाज़ी में सरकारी प्राथमिकताओं पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप के रूप में देखी जा रही है।

खनन की अनुमति पर सवाल

याचिकाकर्ता का तर्क है कि ओनन कराडु जैसी ऐतिहासिक महत्व की पहाड़ी पर खनन गतिविधियाँ न केवल पुरातात्विक विरासत को मिटाएँगी, बल्कि स्थानीय जल तंत्र को भी बाधित करेंगी। गौरतलब है कि यह क्षेत्र जैव-विविधता की दृष्टि से भी समृद्ध बताया जाता है। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा खनन की अनुमति देना पर्यावरणीय संरक्षण कानूनों की अनदेखी को दर्शाता है।

अदालत का निर्देश और आगे की सुनवाई

खंडपीठ ने तमिलनाडु सरकार को मामले में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते के लिए स्थगित कर दी है। अब देखना होगा कि सरकार इस ऐतिहासिक और पारिस्थितिक संपदा की रक्षा के संदर्भ में अदालत को क्या जवाब देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि पुरातात्विक और पारिस्थितिकीय रूप से अमूल्य स्थल खनन माफिया के सामने बेसहारा छोड़ दिए जाते हैं। ओनन कराडु अकेला मामला नहीं है — दक्षिण भारत में ऐसी दर्जनों पहाड़ियाँ 'लीज़ की अनुमति' के नाम पर खोखली हो चुकी हैं। असली सवाल यह है कि खनन अनुमति किस आधार पर और किसके दबाव में दी गई — और अदालती हस्तक्षेप के बिना यह जाँच होती भी है या नहीं।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओनन कराडु पहाड़ी विवाद क्या है?
तमिलनाडु के पेरायुर क्षेत्र में स्थित ओनन कराडु पहाड़ी पर पत्थर की खदान चलाने की अनुमति दी गई है, जबकि यह पुरातात्विक अवशेषों और भूजल पुनर्भरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। नम्मलवार नेचर कंजर्वेशन एसोसिएशन ने इस खनन को रोकने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है।
मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
जस्टिस वेलमुरुगन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने कहा कि सरकार शराब की दुकानों की सुरक्षा जितनी संवेदनशीलता पहाड़ियों के प्रति नहीं दिखाती, जबकि ऐसी प्राकृतिक संरचनाओं को दोबारा नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को तीन हफ्ते में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
इस पहाड़ी का ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व क्या है?
ओनन कराडु पहाड़ी पर प्राचीन काल के पुरातात्विक और सांस्कृतिक अवशेष मिले हैं, जो तत्कालीन रहन-सहन और दफनाने की प्रथाओं के प्रमाण देते हैं। यह पहाड़ी प्राकृतिक जल संग्रह और भूजल पुनर्भरण का भी महत्वपूर्ण स्रोत है, और इसके आसपास समृद्ध जैव-विविधता भी पाई जाती है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने मामले की सुनवाई तीन हफ्ते के लिए स्थगित कर दी है। इस दौरान तमिलनाडु सरकार को अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा अदालत में पेश करना होगा।
जनहित याचिका किसने और क्यों दायर की?
नम्मलवार नेचर कंजर्वेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष पेथथानन ने यह जनहित याचिका दायर की, ताकि ओनन कराडु समेत पेरायुर की तीन पहाड़ियों पर खनन गतिविधियों को रोका जा सके। उनका तर्क है कि खनन से पुरातात्विक विरासत नष्ट होगी और स्थानीय जल तंत्र पर भी विपरीत असर पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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