14 अक्टूबर 2026
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मद्रास हाई कोर्ट सख्त: तमिलनाडु सरकार से पूछा — आरएसएस मार्च पर रोक का क्या आधार है

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मद्रास हाई कोर्ट सख्त: तमिलनाडु सरकार से पूछा — आरएसएस मार्च पर रोक का क्या आधार है

सारांश

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से सीधा सवाल किया — आरएसएस के शांतिपूर्ण विजयादशमी मार्च पर रोक का संवैधानिक आधार क्या है? जस्टिस लक्ष्मीनारायण ने कहा, हर सरकार में संगठन को इनकार मिला; जम्मू-कश्मीर में भी अनुमति मिलती है तो तमिलनाडु में क्यों नहीं? सुनवाई गुरुवार तक स्थगित।

मुख्य बातें

मद्रास हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से आरएसएस के रूट मार्च पर रोक लगाने का आधार पूछा।
लक्ष्मीनारायण ने कहा कि बार-बार आवेदन खारिज किए जाने से अनावश्यक मुकदमेबाजी होती है।
याचिका आरएसएस सदस्य वी.जी.
जगदीसन ने दायर की; 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर या 1 नवंबर को मार्च की अनुमति माँगी गई।
एडवोकेट जनरल विजया नारायण ने कहा कि प्रस्तावित स्थल अधिसूचित स्थान नहीं था।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पाँच प्रतिनिधियों को पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जॉन सत्यन से मिलकर शांतिपूर्ण समाधान निकालने का निर्देश दिया।
सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित; राज्य से रिपोर्ट तलब।

मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के रूट मार्च की अनुमति न देने के फैसले पर कड़े सवाल उठाए और राज्य प्रशासन को निर्देश दिया कि वह शांतिपूर्ण जुलूस एवं जनसभा के आयोजन के लिए संगठन के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर समाधान निकाले। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बार-बार आवेदन खारिज किए जाने से अनावश्यक मुकदमेबाजी का बोझ बढ़ता है।

न्यायालय की मौखिक टिप्पणियाँ

याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण ने जुलूसों के लिए आवेदन बार-बार खारिज किए जाने की मौखिक रूप से आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले संगठनों को अदालत का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर करते हैं। जज ने यह भी देखा कि सत्ता में चाहे कोई भी सरकार रही हो, आरएसएस को अनुमति के मामले में हमेशा इनकार का सामना करना पड़ा है।

न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायण ने अपनी मौखिक टिप्पणियों में कहा कि विरोध-प्रदर्शन और जुलूस की माँगों से निपटते समय राज्य सरकार नागरिकों को दुश्मन की तरह देखती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब जम्मू-कश्मीर में भी आरएसएस के मार्च की अनुमति दी जाती है, तो तमिलनाडु में रोक क्यों लगाई जाती है।

याचिकाकर्ता का पक्ष

यह याचिका आरएसएस सदस्य वी.जी. जगदीसन ने दायर की थी। उन्होंने पुलिस को निर्देश देने की माँग की थी कि 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर, 1 नवंबर या किसी अन्य उपयुक्त तारीख पर रूट मार्च के आवेदन पर विचार किया जाए। प्रस्तावित कार्यक्रम में यूनिफॉर्म में मार्च, म्यूजिकल बैंड और उसके बाद एक जनसभा शामिल थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एन.एल. राजा ने बताया कि संगठन को हर साल इसी तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जबकि वे केवल अपना स्थापना दिवस मनाना चाहते हैं जो विजयादशमी के दिन पड़ता है। राजा ने तर्क दिया कि पुलिस कानून-व्यवस्था की संभावित समस्याओं का हवाला देकर आवेदन खारिज कर देती है, और यह भी सवाल उठाया कि अगर छोटी संस्थाओं को भी इसी तरह इनकार का सामना करना पड़े तो उनके पास मुकदमेबाजी के संसाधन नहीं होते।

सरकार का रुख

एडवोकेट जनरल विजया नारायण ने अदालत में कहा कि अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि प्रस्तावित स्थल जनसभा के लिए अधिसूचित स्थान नहीं था। गौरतलब है कि न्यायालय ने इस स्पष्टीकरण के बावजूद राज्य सरकार से शांतिपूर्ण जुलूस की व्यवस्था पर रिपोर्ट तलब की।

न्यायालय का निर्देश और आगे की सुनवाई

कोर्ट ने याचिकाकर्ता पक्ष के पाँच प्रतिनिधियों को राज्य के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जॉन सत्यन से मिलकर कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने का समाधान निकालने का निर्देश दिया। सुनवाई को गुरुवार तक के लिए स्थगित करते हुए अदालत ने राज्य से इस विषय पर रिपोर्ट माँगी।

यह विवाद आरएसएस के रूट मार्च से जुड़े न्यायालय के पहले के दिशानिर्देशों के संदर्भ में और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है। 2024 में भी अनुमति देने से इनकार के बाद मुकदमेबाजी हुई थी, और तब अदालत ने मार्च की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया था कि पुलिस को आयोजकों एवं जनता की सुरक्षा करनी चाहिए, न कि कानून-व्यवस्था के आधार पर मनगढ़ंत कारण गढ़कर आवेदन खारिज करने चाहिए। यह मामला अब एक बार फिर राज्य सरकार की अनुमति नीति को कसौटी पर रख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि समस्या विचारधारा से परे प्रशासनिक संस्कृति में है। यदि राज्य सरकार इस बार भी केवल अदालती दबाव में अनुमति देती है, तो यह न्यायिक निगरानी की स्थायी आवश्यकता को उजागर करेगा — जो किसी भी लोकतंत्र के लिए आदर्श नहीं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाई कोर्ट ने आरएसएस मार्च मामले में क्या कहा?
मद्रास हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से आरएसएस के रूट मार्च की अनुमति न देने का आधार पूछा और राज्य को निर्देश दिया कि वह आयोजकों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण समाधान निकाले। सुनवाई गुरुवार तक स्थगित कर दी गई है।
आरएसएस को तमिलनाडु में मार्च की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
एडवोकेट जनरल विजया नारायण ने अदालत को बताया कि प्रस्तावित स्थल जनसभा के लिए अधिसूचित स्थान नहीं था, इसलिए अनुमति नहीं दी गई। हालाँकि अदालत ने इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट हुए बिना राज्य से रिपोर्ट तलब की।
आरएसएस का यह मार्च किस उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है?
यह मार्च आरएसएस के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाता है, जो विजयादशमी के दिन पड़ता है। प्रस्तावित कार्यक्रम में यूनिफॉर्म में मार्च, म्यूजिकल बैंड और उसके बाद जनसभा शामिल थी।
क्या पहले भी इस मुद्दे पर अदालत में सुनवाई हुई है?
हाँ, 2024 में भी आरएसएस के रूट मार्च पर अनुमति देने से इनकार के बाद मुकदमेबाजी हुई थी। तब अदालत ने मार्च की अनुमति देते हुए कहा था कि पुलिस को कानून-व्यवस्था के मनगढ़ंत कारण गढ़कर आवेदन खारिज नहीं करने चाहिए।
अब आगे क्या होगा इस मामले में?
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पाँच प्रतिनिधियों को पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जॉन सत्यन से मिलकर समाधान निकालने का निर्देश दिया है। गुरुवार को अगली सुनवाई में राज्य सरकार को शांतिपूर्ण जुलूस की व्यवस्था पर अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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