4 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

प्रियांक खड़गे बोले — 'आरएसएस के लोग अच्छे हैं', कर्नाटक में मार्च अनुमति विवाद पर नरम रुख

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
प्रियांक खड़गे बोले — 'आरएसएस के लोग अच्छे हैं', कर्नाटक में मार्च अनुमति विवाद पर नरम रुख

सारांश

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस के मार्च अनुमति विवाद में अचानक नरम रुख अपनाया — 'आरएसएस के लोग अच्छे हैं' कहकर। संगठन ने पूरे राज्य में औपचारिक अनुमति माँगी और 2 लाख से अधिक प्रतिभागियों की जानकारी दी। यह राजनीतिक संकेत महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

कर्नाटक गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 4 नवंबर 2026 को कहा कि आरएसएस के लोग 'अच्छे' हैं।
आरएसएस ने कर्नाटक भर में विजयदशमी पथ संचालन के लिए पुलिस से औपचारिक अनुमति माँगी और शाखाओं के सदस्यों की जानकारी दी।
जुलूसों में 2 लाख से अधिक प्रतिभागी और सैकड़ों मार्ग शामिल थे, जिसके लिए गृह विभाग ने पूर्व औपचारिक आवेदन को अनिवार्य बताया था।
खड़गे ने संकेत दिया कि आरएसएस भविष्य में अपना पंजीकरण और फंड विवरण सार्वजनिक कर सकता है।
खड़गे ने मीडिया पर आरएसएस के विरुद्ध 'दुष्प्रचार' करने का आरोप लगाया।

कर्नाटक के गृह, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोग 'अच्छे' हैं और संगठन ने कर्नाटक भर में अपने मार्चों के लिए सभी आवश्यक जानकारी प्रस्तुत कर दी है तथा औपचारिक अनुमति भी मांग ली है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब आरएसएस के विजयदशमी पथ संचालन को लेकर राज्य सरकार और संगठन के बीच कानूनी अनुमतियों पर तनातनी चल रही थी।

क्या था पूरा विवाद

विवाद की जड़ आरएसएस के विजयदशमी मार्ग मार्च (पथ संचालन) से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया थी। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने पहले सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था कि संगठन को स्थानीय पुलिस को केवल 'सूचित' करना पर्याप्त नहीं होगा — उन्हें औपचारिक पुलिस अनुमति लेनी होगी। उन्होंने आंतरिक पत्र भी साझा किए थे जिनमें आरएसएस ने पुलिस को रसद समन्वय के लिए 'सूचित' किया था, न कि अनुमति मांगी थी।

गृह विभाग का तर्क था कि इन जुलूसों में सैकड़ों मार्गों पर 2 लाख से अधिक प्रतिभागी शामिल होते हैं, इसलिए यातायात, सुरक्षा और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के सुचारू प्रबंधन के लिए पूर्व औपचारिक आवेदन अनिवार्य है। विभाग ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सभाओं को नियंत्रित करने वाले कानून आरएसएस पर भी समान रूप से लागू होते हैं।

खड़गे का बदला सुर

बुधवार को खड़गे ने कहा, 'आपने (मीडिया ने) हमें यह कहकर डरा दिया था कि वे अनुमति नहीं मांगेंगे या जानकारी नहीं देंगे। आरएसएस के लोग बहुत अच्छे हैं। जहाँ भी उन्होंने मार्च निकाले हैं, उन्होंने जानकारी दी है और अनुमति भी मांगी है। कुछ जगहों पर अनुमति नहीं मिली, लेकिन उन्होंने सहयोग किया।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरएसएस के आवेदनों में कहीं यह नहीं लिखा था कि वे केवल 'सूचना' दे रहे हैं — उन्होंने पूरे कर्नाटक में अनुमति माँगी। खड़गे ने कहा, 'वे बदल गए हैं। वे सौ वर्षों से इसी तरह काम करते आ रहे हैं, और उन्हें भी कुछ समय चाहिए।'

मीडिया पर निशाना

खड़गे ने मीडिया पर भी आरोप लगाया कि संगठन द्वारा सभी प्रशासनिक आवश्यकताओं का पालन करने के बावजूद, उसके विरुद्ध 'दुष्प्रचार' किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरएसएस द्वारा दी गई जानकारी से सरकार को यह जानने में मदद मिली है कि उसकी प्रत्येक शाखा से कौन-कौन जुड़ा हुआ है।

पारदर्शिता की संभावना

खड़गे ने संकेत दिया कि भविष्य में आरएसएस अपना पंजीकरण कराने के साथ-साथ अपने फंड का विवरण भी सार्वजनिक कर सकता है — जिसमें यह भी शामिल होगा कि धन देश के भीतर से आ रहा है या विदेश से। उन्होंने कहा, 'सब कुछ पारदर्शी हो जाएगा।' गौरतलब है कि आरएसएस की फंडिंग और पंजीकरण की स्थिति लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है।

आगे की राह

इस बयान के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच प्रत्यक्ष टकराव टला नज़र आता है। हालाँकि, राज्य सरकार और आरएसएस के बीच प्रशासनिक संबंध किस दिशा में जाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल अनुमति प्रक्रिया तक सीमित नहीं है — यह राज्य सरकार और संघ परिवार के बीच व्यापक राजनीतिक संबंधों का भी संकेतक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ कहीं गहरे हैं। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने संघ परिवार के साथ सीधे टकराव से परहेज़ किया — यह संकेत देता है कि राज्य स्तर पर वैचारिक विरोध की भी व्यावहारिक सीमाएँ होती हैं। दूसरी ओर, खड़गे द्वारा आरएसएस की फंडिंग-पारदर्शिता का उल्लेख एक सुनियोजित राजनीतिक संकेत भी हो सकता है — जो अभी नरम है, पर भविष्य में कसा जा सकता है। असली सवाल यह है कि क्या यह 'सहयोग' दीर्घकालिक है, या अगले बड़े राजनीतिक अवसर पर दोनों पक्ष फिर टकराव की राह पकड़ेंगे।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियांक खड़गे ने आरएसएस के बारे में क्या कहा?
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 4 नवंबर 2026 को कहा कि 'आरएसएस के लोग बहुत अच्छे हैं' और संगठन ने कर्नाटक भर में अपने मार्चों के लिए औपचारिक अनुमति माँगी और सभी आवश्यक जानकारी प्रदान की। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ अनुमति नहीं मिली, वहाँ भी आरएसएस ने सहयोग किया।
कर्नाटक में आरएसएस मार्च अनुमति विवाद क्या था?
विवाद इस बात पर था कि आरएसएस ने विजयदशमी पथ संचालन के लिए पुलिस को केवल 'सूचित' किया था, न कि औपचारिक अनुमति माँगी थी। गृह मंत्री खड़गे ने स्पष्ट किया कि 2 लाख से अधिक प्रतिभागियों वाले जुलूसों के लिए पूर्व पुलिस अनुमति अनिवार्य है।
क्या आरएसएस ने कर्नाटक में सभी मार्चों के लिए अनुमति माँगी?
हाँ, खड़गे के अनुसार आरएसएस ने पूरे कर्नाटक में अनुमति माँगी और आवेदनों में कहीं भी यह नहीं लिखा कि वे केवल सूचना दे रहे हैं। संगठन ने शाखाओं के सदस्यों की जानकारी भी सरकार को उपलब्ध कराई।
खड़गे ने आरएसएस की पारदर्शिता पर क्या कहा?
खड़गे ने संकेत दिया कि आरएसएस भविष्य में अपना पंजीकरण कराने और फंड विवरण सार्वजनिक करने पर विचार कर सकता है, जिसमें यह भी शामिल होगा कि धन देश के भीतर से आता है या विदेश से। उन्होंने कहा कि इससे 'सब कुछ पारदर्शी हो जाएगा।'
खड़गे ने मीडिया पर क्या आरोप लगाया?
खड़गे ने आरोप लगाया कि मीडिया ने सरकार को यह कहकर डराया था कि आरएसएस अनुमति नहीं माँगेगा, और संगठन के सहयोग के बावजूद उसके विरुद्ध 'दुष्प्रचार' जारी है। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले