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गुजरात: GIPCA में 538 जेल सिपाहियों के 20वें बैच ने पूरा किया 9 महीने का प्रशिक्षण, 60 महिलाएं भी शामिल

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गुजरात: GIPCA में 538 जेल सिपाहियों के 20वें बैच ने पूरा किया 9 महीने का प्रशिक्षण, 60 महिलाएं भी शामिल

सारांश

गुजरात के GIPCA में 538 जेल सिपाहियों — जिनमें 60 महिलाएं शामिल हैं — ने 9 महीने का प्रशिक्षण पूरा किया। 20वें बैच का यह ग्रेजुएशन नए आपराधिक कानूनों, आधुनिक सुरक्षा तकनीक और कैदी पुनर्वास पर केंद्रित पाठ्यक्रम के साथ गुजरात जेल प्रशासन की क्षमता विस्तार की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

538 नवनियुक्त जेल सिपाहियों — 478 पुरुष और 60 महिलाएं — ने GIPCA, अहमदाबाद में 9 महीने का प्रशिक्षण पूरा किया।
यह 20वां बैच था; 4 नवंबर 2026 को ग्रेजुएशन परेड और शपथ समारोह आयोजित किया गया।
पाठ्यक्रम में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) , भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) तीनों नए आपराधिक कानून शामिल।
बॉडी-वर्न कैमरे, बॉडी स्कैनर, बैगेज स्कैनर सहित आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का प्रशिक्षण भी दिया गया।
राव ने बताया कि 'व्हाइट-कॉलर' अपराध बढ़ने से जेल कर्मियों को उभरते आपराधिक रुझानों की गहरी समझ ज़रूरी है।

गुजरात जेल और सुधार प्रशासन विभाग के प्रशिक्षण संस्थान जीआईपीसीए (GIPCA), अहमदाबाद में 538 नवनियुक्त जेल सिपाहियों — जिनमें 60 महिला प्रशिक्षु शामिल हैं — ने अपना नौ महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 4 नवंबर 2026 को आयोजित ग्रेजुएशन परेड और शपथ समारोह के साथ इस 20वें बैच का प्रशिक्षण औपचारिक रूप से संपन्न हुआ। पाठ्यक्रम में आधुनिक जेल सुरक्षा, नए आपराधिक कानूनों और कैदियों के पुनर्वास पर विशेष बल दिया गया।

समारोह और मुख्य अतिथि

ग्रेजुएशन समारोह में गुजरात जेल और सुधार प्रशासन के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. के.एल.एन. राव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने 478 पुरुष और 60 महिला प्रशिक्षुओं के साथ-साथ उनके परिवारों, प्रशिक्षकों और संस्थान के प्रधानाचार्य को भी संबोधित किया। डॉ. राव ने कहा, 'ग्रेजुएशन समारोह वर्दीधारी कर्मियों के प्रशिक्षण के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक होता है।'

उन्होंने प्रशिक्षुओं और उनके परिवारों के योगदान की सराहना करते हुए जेल सेवा को 'साहस, त्याग और समर्पण' का पेशा बताया।

आपराधिक न्याय प्रणाली में जेल विभाग की भूमिका

डॉ. राव ने आपराधिक न्याय प्रणाली के तीन स्तंभों की व्याख्या करते हुए बताया कि पुलिस (कानून प्रवर्तन), न्यायपालिका (न्यायिक कार्यवाही) और जेल विभाग (कैदियों की हिरासत और पुनर्वास) मिलकर इस तंत्र को संचालित करते हैं। उन्होंने कहा, 'जेल कर्मचारियों पर कैदियों को पश्चाताप के जरिए सुधारने और उन्हें एक अच्छे नागरिक के रूप में समाज में वापस लाने की पवित्र जिम्मेदारी है।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आर्थिक वैश्वीकरण और तकनीकी प्रगति के साथ अपराध का स्वरूप बदल रहा है और जेलों में अब 'व्हाइट-कॉलर' अपराधियों की संख्या भी बढ़ रही है, जिसके लिए कार्यप्रणाली को अद्यतन करना ज़रूरी है।

प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में क्या-क्या शामिल था

नौ महीने के व्यापक पाठ्यक्रम में प्रशिक्षुओं को जेल मैनुअल, प्रिजन्स एक्ट, प्रिज़्नर्स एक्ट, पैरोल और फरलो नियमों के साथ-साथ भारतीय संविधान, मानवाधिकार, सूचना का अधिकार अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता की जानकारी दी गई।

विशेष रूप से तीन नए आपराधिक कानूनों — भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) — को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और अपराध विज्ञान (क्रिमिनोलॉजी) का प्रशिक्षण भी दिया गया।

आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक कौशल

तकनीकी प्रशिक्षण के तहत प्रशिक्षुओं को एनयूडी, बॉडी-वर्न कैमरे, हैंड-हेल्ड और डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, बॉडी स्कैनर और ब्रेथलाइजर जैसे आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर कौशल, ई-प्रिजन्स एप्लिकेशन, प्राथमिक चिकित्सा, योग, कराटे और विभिन्न खेल व आउटडोर गतिविधियाँ भी पाठ्यक्रम का हिस्सा रहीं।

डॉ. राव ने नवनियुक्त कर्मियों से आग्रह किया कि वे जेलों में अनुशासन, शांति और सुरक्षा बनाए रखें, कानून के शासन को कायम रखें और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के प्रति सदैव सतर्क रहें। यह प्रशिक्षित बल अब गुजरात की जेलों में तैनाती के लिए तैयार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बीएनएसएस, बीएसए) के ज़मीनी क्रियान्वयन की पहली परीक्षा है। जेल विभाग प्राय: पुलिस और न्यायपालिका की तुलना में सुधारों में पीछे रहता है, इसलिए इन कानूनों को पाठ्यक्रम में शामिल करना सकारात्मक संकेत है। हालाँकि असली कसौटी यह होगी कि क्या ये प्रशिक्षित कर्मी भीड़भाड़ से जूझती भारतीय जेलों में पुनर्वास के उस आदर्श को व्यवहार में उतार पाते हैं, जिसका डीजीपी ने समारोह में उल्लेख किया। महिला सिपाहियों की उपस्थिति उत्साहजनक है, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या उनकी तैनाती महिला कैदियों की देखभाल व सुरक्षा में वास्तविक बदलाव लाती है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात GIPCA में 20वें बैच का प्रशिक्षण क्या था?
GIPCA, अहमदाबाद में 538 नवनियुक्त जेल सिपाहियों के 20वें बैच ने 9 महीने का प्रशिक्षण पूरा किया, जिसमें 60 महिला प्रशिक्षु भी शामिल थीं। 4 नवंबर 2026 को ग्रेजुएशन परेड और शपथ समारोह के साथ यह प्रशिक्षण संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण में कौन-से विषय और कानून पढ़ाए गए?
पाठ्यक्रम में जेल मैनुअल, प्रिजन्स एक्ट, प्रिज़्नर्स एक्ट, पैरोल व फरलो नियम, भारतीय संविधान, मानवाधिकार, सूचना का अधिकार और तीन नए आपराधिक कानून — भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) — शामिल थे। मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और क्रिमिनोलॉजी भी पाठ्यक्रम का हिस्सा रहे।
प्रशिक्षण में कौन-से आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का प्रशिक्षण दिया गया?
प्रशिक्षुओं को एनयूडी, बॉडी-वर्न कैमरे, हैंड-हेल्ड व डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, बॉडी स्कैनर और ब्रेथलाइजर के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा कंप्यूटर कौशल और ई-प्रिजन्स एप्लिकेशन भी सिखाई गई।
डीजीपी डॉ. के.एल.एन. राव ने जेल कर्मियों को क्या संदेश दिया?
डीजीपी डॉ. के.एल.एन. राव ने कहा कि जेल कर्मियों की जिम्मेदारी कैदियों को पश्चाताप के जरिए सुधारकर समाज में अच्छे नागरिक के रूप में वापस लाना है। उन्होंने यह भी कहा कि 'व्हाइट-कॉलर' अपराध बढ़ने के साथ कार्यप्रणाली को अपडेट करना और उभरते आपराधिक रुझानों को समझना आवश्यक है।
इस बैच में महिला जेल सिपाहियों की संख्या कितनी थी?
20वें बैच में कुल 60 महिला जेल सिपाहियों ने प्रशिक्षण पूरा किया, जबकि पुरुष प्रशिक्षुओं की संख्या 478 थी। कुल 538 प्रशिक्षुओं ने यह 9 महीने का कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया।
राष्ट्र प्रेस
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