गुजरात में 143 कैदियों को दीपावली पर 15 दिन की पैरोल, 40 महिला कैदी भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 143 कैदियों को दीपावली 2026 के अवसर पर परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए 6 नवंबर से 15 दिन की पैरोल देने का फैसला किया है। इस वार्षिक सुविधा के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के 103 पुरुष कैदी और 40 महिला कैदी अपने घर जा सकेंगे। यह निर्णय राज्य सरकार की कैदी कल्याण नीति के अंतर्गत लिया गया है।
पैरोल की अवधि और शुरुआत
पैरोल की यह अवधि धनतेरस, 6 नवंबर 2026 से प्रारंभ होगी और 15 दिनों तक चलेगी। उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी की देखरेख में चल रही जेल सुधार पहलों के तहत यह व्यवस्था की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य पात्र कैदियों को तय शर्तों का पालन करते हुए अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने का अवसर देना है।
2003 से जारी है यह परंपरा
गुजरात सरकार 2003 से हर वर्ष दीपावली के अवसर पर पात्र कैदियों को 15 दिन की पैरोल देती आ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास पर विमर्श तेज हो रहा है। गौरतलब है कि यह व्यवस्था केवल विशेष श्रेणी के कैदियों — महिलाओं और वरिष्ठ पुरुष कैदियों — तक सीमित है।
कौन होंगे पात्र, किसे नहीं मिलेगी सुविधा
पुलिस महानिदेशक (गुजरात जेल और सुधार विभाग) डॉ. के.एल.एन. राव ने बताया कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, गंभीर अपराधों में शामिल कैदी इस पैरोल के लिए पात्र नहीं हैं। जिन्हें यह सुविधा नहीं मिलेगी, उनमें शामिल हैं:
— नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (TADA) और प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म एक्ट (POTA) के तहत सजायाफ्ता कैदी; बलात्कार, अपहरण, लूट, डकैती, चोरी या जबरन वसूली जैसे गंभीर अपराधों के दोषी; एनआरआई कैदी और अन्य राज्यों के कैदी; जिनकी अपील उच्च न्यायालय में लंबित है; तथा वे जिन पर निवारक निरोध (Preventive Detention) आदेश लागू हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और नीतिगत संदेश
राज्य सरकार के प्रवक्ताओं ने इस कदम को मानवीय दृष्टिकोण और पुनर्वास की दिशा में उठाया गया सकारात्मक कदम बताया। यह व्यवस्था केवल त्योहारी राहत नहीं, बल्कि पात्र कैदियों में पारिवारिक जुड़ाव को बनाए रखने की नीति का हिस्सा है — जिसे विशेषज्ञ कैदी पुनर्वास में सहायक मानते हैं।
आगे क्या
पैरोल पर जाने वाले कैदियों को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा और 15 दिन बाद उन्हें संबंधित जेल में वापस लौटना होगा। यदि इस व्यवस्था का उल्लंघन होता है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह सुविधा गुजरात की जेल प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को बनाए रखने की कोशिश का प्रतीक है।