रक्षाबंधन पर गुजरात की जेलों में भावुक मिलन: 1,700 से अधिक बहनों ने बांधी राखी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात की साबरमती, राजकोट, जामनगर और वडोदरा सेंट्रल जेलों में 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर 1,700 से अधिक बहनों ने अपने कैदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। जेल की सलाखों के पीछे मनाए गए इस पर्व ने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को एक नई संवेदनशील परिभाषा दी, जहाँ आँखों में आँसू और होठों पर दुआएँ एक साथ थीं।
साबरमती और राजकोट: जेल प्रशासन की विशेष व्यवस्था
अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में बहनें अपने भाइयों से मिलने पहुँचीं और विधि-विधान के साथ राखी बांधी। महिलाओं ने बताया कि वे साल भर इस एक दिन का बेसब्री से इंतजार करती हैं। जेल सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस गौरव अग्रवाल ने कहा, 'हमारे लिए भी यह एक संवेदनशील अवसर होता है। परिजनों के मिलने से कैदियों को मानसिक संबल मिलता है।'
राजकोट सेंट्रल जेल में करीब 1,200 बहनों ने अपने भाइयों को राखी बांधी। सुरक्षा के मद्देनजर प्रत्येक बहन के लिए आधार कार्ड लाना अनिवार्य था और बाहर से कोई भी वस्तु जेल के अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। जेल प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि भाई-बहन बिना किसी कठिनाई के मिल सकें।
जामनगर: 500 से अधिक कैदियों को राखी, महिला कैदियों ने भी मनाया पर्व
जामनगर जिला जेल में जेल प्रशासन ने राखी बांधने की विधि के लिए थाली में कंकू, चावल और दीपक की व्यवस्था की। बहनें राखी और मिठाई लेकर लंबे इंतजार के बाद पहुँचीं और भाइयों का मुँह मीठा करवाया। जेल सुपरिटेंडेंट बलभद्र सिंह रायजादा ने बताया कि 500 से अधिक कैदियों की बहनों ने उन्हें राखी बांधी, जबकि लगभग 20 महिला कैदियों ने भी अपने भाइयों को राखी बांधी।
वडोदरा: भाइयों ने तुलसी का पौधा देकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
वडोदरा सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन अनोखे अंदाज में मनाया गया। जहाँ बहनों ने भाइयों की सलामती और बेहतर भविष्य की कामना की, वहीं भाइयों ने बहनों को भेंट स्वरूप तुलसी के पौधे दिए — स्नेह के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए। जेल परिसर में भावुक माहौल देखने को मिला।
जेल अधिकारियों की सोच: पश्चाताप और पुनर्वास
राजकोट जेल अधीक्षक वीपी गोहेल ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे अवसर पर कैदियों के मन में अपने जुर्म को लेकर पश्चाताप की भावना जागती है। उनके अनुसार, परिवार से अलग हो चुके इन लोगों के लिए ऐसे पर्व मानसिक पुनर्वास में सहायक होते हैं। गौरतलब है कि जेल प्रशासन का यह मानवीय दृष्टिकोण कैदियों के सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जाता है।
आगे की राह
गुजरात की जेलों में इस तरह के पारिवारिक मिलन कार्यक्रम कैदियों के मनोबल और पुनर्वास पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक संपर्क बनाए रखने से कैदियों में सुधार की संभावना बढ़ती है। आने वाले वर्षों में ऐसे आयोजनों को और व्यापक रूप देने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।