28 अगस्त 2026
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टीएमसी 'बुआ-भतीजे की लिमिटेड कंपनी': भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी का तीखा हमला

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टीएमसी 'बुआ-भतीजे की लिमिटेड कंपनी': भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी का तीखा हमला

सारांश

जादवपुर विवाद और टीएमसी नेताओं पर एफआईआर के बीच भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी ने तृणमूल को 'बुआ-भतीजे की लिमिटेड कंपनी' करार दिया। कोलकाता में सुवेंदु अधिकारी के रोड शो के दौरान दिया यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई तल्खी का संकेत है।

मुख्य बातें

भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी ने 28 अगस्त को कोलकाता में टीएमसी को 'बुआ-भतीजे की लिमिटेड कंपनी' बताया।
सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में ढोल के साथ रोड शो निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए।
टीएमसी नेताओं अभिषेक बनर्जी , डेरेक ओ'ब्रायन और सौगत रॉय के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज हैं।
मुखर्जी ने कहा कि जादवपुर के नागरिक अब कथित दमन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठा रहे हैं।
अखबार में 'गेरुआ तांडव' और 'गेरुआ संत्रास' शब्दों के इस्तेमाल पर अधिकारी ने माफी की माँग की, अन्यथा 'कड़वे जवाब' की चेतावनी दी।

कोलकाता में 28 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में हुए रोड शो के दौरान भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने टीएमसी को 'नीति आधारित संगठन' नहीं, बल्कि 'बुआ और भाई-भतीजे की लिमिटेड कंपनी' करार दिया। यह बयान ऐसे समय आया जब जादवपुर विश्वविद्यालय विवाद और टीएमसी नेताओं के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर को लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर है।

रोड शो और राष्ट्रवाद का आह्वान

ढोल-नगाड़ों के साथ निकाले गए इस रोड शो में बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। विधायक सरबोरी मुखर्जी ने कहा कि जादवपुर की पहचान अब राष्ट्रवाद के आह्वान से जुड़ रही है। उन्होंने नारा दिया — 'जादवपुर का माटी, राष्ट्रवाद की घाटी।' मुखर्जी के अनुसार, लंबे समय से जादवपुर के नागरिक कथित तौर पर इन परिस्थितियों को सहन करते आ रहे थे, लेकिन अब जनता ने अपनी आवाज़ उठानी शुरू कर दी है।

अखबार की हेडलाइन पर विवाद

मुखर्जी ने सुवेंदु अधिकारी के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर एक अखबार की हेडलाइन में 'गेरुआ तांडव' और 'गेरुआ संत्रास' जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। मुखर्जी के अनुसार, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि संबंधित पक्ष को माफी माँगनी चाहिए, अन्यथा 'कड़वा जवाब' दिया जाएगा।

टीएमसी नेताओं पर एफआईआर और संगठनात्मक सवाल

टीएमसी नेताओं अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और सौगत रॉय के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए मुखर्जी ने कहा कि आज टीएमसी नेताओं को अदालत का रुख कर यह बताना पड़ रहा है कि 'तृणमूल कांग्रेस आखिर किसकी है' — यह स्थिति स्वयं में शर्मनाक है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा विपक्ष में रहते हुए भी लगातार यह कहती रही है कि टीएमसी कोई आदर्श या नीति आधारित संगठन नहीं है।

भाजपा का 'बुआ-भतीजा' वाला आरोप

मुखर्जी ने टीएमसी को 'लिमिटेड कंपनी' बताते हुए आरोप लगाया कि यह 'बुआ और भाई-भतीजे की कंपनी' के तौर पर काम करती रही है। गौरतलब है कि यह आरोप टीएमसी की आंतरिक संरचना और नेतृत्व पर भाजपा की पुरानी राजनीतिक लाइन का हिस्सा है, जो जादवपुर विवाद के बाद और तेज़ हो गई है।

आगे क्या

जादवपुर विश्वविद्यालय विवाद और एफआईआर को लेकर राजनीतिक टकराव जारी रहने के संकेत हैं। भाजपा की यह आक्रामक रणनीति आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। टीएमसी की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जादवपुर एफआईआर ने इसे एक ठोस राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया है। असली सवाल यह है कि क्या टीएमसी के भीतर केंद्रीकृत नेतृत्व को लेकर जो असंतोष कभी-कभी सतह पर आता है, वह भाजपा की इस 'कंपनी' वाली कहानी को जनता के बीच विश्वसनीय बनाता है। जादवपुर जैसे शैक्षणिक गढ़ में राष्ट्रवाद की राजनीति को स्थापित करने की कोशिश एक सोची-समझी रणनीति है — और यदि टीएमसी ने समय रहते जवाब नहीं दिया, तो यह कथा बंगाल के शहरी मतदाताओं के बीच पैठ बना सकती है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरबोरी मुखर्जी ने टीएमसी को 'बुआ-भतीजे की कंपनी' क्यों कहा?
भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस कोई नीति या आदर्श आधारित संगठन नहीं है, बल्कि यह 'बुआ और भाई-भतीजे' के इर्द-गिर्द केंद्रित एक 'लिमिटेड कंपनी' की तरह काम करती है। यह बयान अभिषेक बनर्जी समेत तीन टीएमसी नेताओं पर दर्ज एफआईआर के संदर्भ में आया।
टीएमसी के किन नेताओं पर एफआईआर दर्ज हुई है?
टीएमसी नेताओं अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और सौगत रॉय के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन एफआईआर के बाद टीएमसी नेताओं को अदालत का रुख करना पड़ा, जिसे मुखर्जी ने 'शर्मनाक स्थिति' बताया।
जादवपुर विश्वविद्यालय विवाद क्या है?
जादवपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रवाद से जुड़े नारों और कथित दमन को लेकर विवाद चल रहा है। भाजपा का दावा है कि वहाँ के नागरिक लंबे समय से कथित तौर पर प्रतिकूल परिस्थितियाँ सह रहे थे और अब वे एकजुट होकर आवाज़ उठा रहे हैं।
'गेरुआ तांडव' और 'गेरुआ संत्रास' विवाद क्या है?
सुवेंदु अधिकारी ने कथित तौर पर एक अखबार की हेडलाइन में 'गेरुआ तांडव' और 'गेरुआ संत्रास' जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। सरबोरी मुखर्जी के अनुसार, अधिकारी ने माफी की माँग की है और चेतावनी दी है कि माफी न मिलने पर 'कड़वा जवाब' दिया जाएगा।
इस घटनाक्रम का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर होगा?
जादवपुर विवाद और एफआईआर के बाद भाजपा की आक्रामक रणनीति टीएमसी पर संगठनात्मक और कानूनी दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ा रही है। आने वाले चुनावी समीकरणों में यह राजनीतिक टकराव निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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