टीएमसी 'बुआ-भतीजे की लिमिटेड कंपनी': भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में 28 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में हुए रोड शो के दौरान भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने टीएमसी को 'नीति आधारित संगठन' नहीं, बल्कि 'बुआ और भाई-भतीजे की लिमिटेड कंपनी' करार दिया। यह बयान ऐसे समय आया जब जादवपुर विश्वविद्यालय विवाद और टीएमसी नेताओं के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर को लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर है।
रोड शो और राष्ट्रवाद का आह्वान
ढोल-नगाड़ों के साथ निकाले गए इस रोड शो में बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। विधायक सरबोरी मुखर्जी ने कहा कि जादवपुर की पहचान अब राष्ट्रवाद के आह्वान से जुड़ रही है। उन्होंने नारा दिया — 'जादवपुर का माटी, राष्ट्रवाद की घाटी।' मुखर्जी के अनुसार, लंबे समय से जादवपुर के नागरिक कथित तौर पर इन परिस्थितियों को सहन करते आ रहे थे, लेकिन अब जनता ने अपनी आवाज़ उठानी शुरू कर दी है।
अखबार की हेडलाइन पर विवाद
मुखर्जी ने सुवेंदु अधिकारी के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर एक अखबार की हेडलाइन में 'गेरुआ तांडव' और 'गेरुआ संत्रास' जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। मुखर्जी के अनुसार, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि संबंधित पक्ष को माफी माँगनी चाहिए, अन्यथा 'कड़वा जवाब' दिया जाएगा।
टीएमसी नेताओं पर एफआईआर और संगठनात्मक सवाल
टीएमसी नेताओं अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और सौगत रॉय के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए मुखर्जी ने कहा कि आज टीएमसी नेताओं को अदालत का रुख कर यह बताना पड़ रहा है कि 'तृणमूल कांग्रेस आखिर किसकी है' — यह स्थिति स्वयं में शर्मनाक है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा विपक्ष में रहते हुए भी लगातार यह कहती रही है कि टीएमसी कोई आदर्श या नीति आधारित संगठन नहीं है।
भाजपा का 'बुआ-भतीजा' वाला आरोप
मुखर्जी ने टीएमसी को 'लिमिटेड कंपनी' बताते हुए आरोप लगाया कि यह 'बुआ और भाई-भतीजे की कंपनी' के तौर पर काम करती रही है। गौरतलब है कि यह आरोप टीएमसी की आंतरिक संरचना और नेतृत्व पर भाजपा की पुरानी राजनीतिक लाइन का हिस्सा है, जो जादवपुर विवाद के बाद और तेज़ हो गई है।
आगे क्या
जादवपुर विश्वविद्यालय विवाद और एफआईआर को लेकर राजनीतिक टकराव जारी रहने के संकेत हैं। भाजपा की यह आक्रामक रणनीति आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। टीएमसी की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।