जादवपुर यूनिवर्सिटी झड़प: टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी को बताया सीधा जिम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर में एबीवीपी और एसएफआई कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सरबोरी मुखर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रॉय ने कहा कि इस विवाद से मुखर्जी का सीधा संबंध है और उनके बयानों ने माहौल को भड़काने का काम किया।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार-गुरुवार की रात इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संकाय छात्र संघ (FETSU) की बैठक के बाद जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर में दो अलग-अलग स्थानों पर झड़पें हुईं। पहली झड़प 8बी बस स्टैंड क्रॉसिंग पर एसएफआई कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई। इसके बाद दूसरी झड़प विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के सामने एसएफआई और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई, जिसमें कई छात्र घायल हो गए।
सौगत रॉय के आरोप
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भाजपा विधायक सरबोरी मुखर्जी के इनकार पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'मैंने नहीं देखा, लेकिन भाजपा विधायक ने खुद कहा था कि पूरी रात 'तांडव' चलेगा। चुन-चुनकर दोषियों को पकड़ा जाएगा। इसलिए, एक सीधा लिंक है।' रॉय ने यह भी कहा कि परिसर में हमला करने वाले एबीवीपी से जुड़े हैं, जो आरएसएस का संगठन है और आरएसएस तथा भाजपा व्यावहारिक रूप से एक ही हैं।
भाजपा विधायक का पक्ष
विधायक सरबोरी मुखर्जी ने इससे पहले ही झड़प के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं को भड़काने के किसी भी आरोप से इनकार किया था। उन्होंने परिसर में हुई हिंसा में अपनी किसी भी भूमिका से साफ मना किया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ टीएमसी और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है।
जेन-जी आउटरीच पर भी निशाना
रॉय ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा युवा पीढ़ी (जेन-जी) तक पहुँच बनाने के लिए एक विशेष आउटरीच कमेटी गठित किए जाने पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, 'वह अपनी पार्टी की तरफ से कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं होगा। जेन-जी को भाजपा पर कोई भरोसा नहीं है।' गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के विश्वविद्यालय परिसर लंबे समय से वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्र संगठनों के बीच प्रतिद्वंद्विता के केंद्र रहे हैं।
आगे क्या होगा
घायल छात्रों की स्थिति और विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नज़र बनी हुई है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में किस तरह की जाँच कराता है और क्या दोनों छात्र संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है।